अलविदा मैक्सी! 38 साल की उम्र में ग्लेन मैक्सवेल ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, याद रहेगा अफगानिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक दोहरा शतक

WhatsApp Image 2026-11-03 at 12.34.20 PM

Digital UP News

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के विस्फोटक ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 38 साल की उम्र में उनके इस फैसले के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के एक ऐसे रोमांचक अध्याय का अंत हो गया, जिसने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को अनगिनत यादगार पल दिए। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी, अनोखे शॉट्स और मुश्किल परिस्थितियों में मैच का रुख पलटने की क्षमता के लिए मशहूर मैक्सवेल को क्रिकेट जगत हमेशा ‘द बिग शो’ के नाम से याद रखेगा।

मैक्सवेल का संन्यास केवल एक खिलाड़ी की विदाई नहीं है, बल्कि उस अंदाज का अंत भी है, जिसने क्रिकेट को कई बार असंभव लगने वाले मुकाबलों में रोमांच की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पीली जर्सी में मैदान पर उतरते ही दर्शकों को उनसे कुछ अलग और खास करने की उम्मीद रहती थी। वह ऐसे खिलाड़ी थे, जो कुछ ही ओवरों में विपक्षी टीम की मेहनत पर पानी फेरने की क्षमता रखते थे।

286 अंतरराष्ट्रीय मैचों में छोड़ी अपनी छाप

ग्लेन मैक्सवेल का अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग 14 वर्षों तक चला। इस दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए तीनों प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कुल 286 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिनमें सात टेस्ट, 149 वनडे और 130 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच शामिल हैं।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में मैक्सवेल ने 7,226 रन बनाए और गेंदबाजी में भी अपनी उपयोगिता साबित करते हुए 136 विकेट हासिल किए। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10 शतक दर्ज हैं। खासतौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। इसके अलावा, वह ऑस्ट्रेलिया की उन सफल टीमों का हिस्सा रहे, जिन्होंने 2015 और 2023 में वनडे विश्व कप का खिताब जीता। वहीं, 2021 टी-20 विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

अफगानिस्तान के खिलाफ 201 रन की ऐतिहासिक पारी

मैक्सवेल के करियर की सबसे यादगार पारियों में 2023 वनडे विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 201 रन की पारी सबसे ऊपर रहेगी। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया 292 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय 91 रन पर सात विकेट गंवा चुका था। टीम की हार लगभग तय मानी जा रही थी।

हालांकि, इसके बाद मैदान पर जो हुआ, उसने क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। मैक्सवेल ने शारीरिक परेशानियों और तेज ऐंठन के बावजूद हार मानने से इनकार कर दिया। वह ठीक से दौड़ने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने अद्भुत जज्बे और बल्लेबाजी कौशल के दम पर 128 गेंदों में नाबाद 201 रन बना दिए। इस पारी में उन्होंने 21 चौके और 10 छक्के लगाए। कप्तान पैट कमिंस के साथ आठवें विकेट के लिए उनकी नाबाद 202 रनों की साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को असंभव दिखने वाली जीत दिला दी। उस दिन पूरी दुनिया ने देखा कि क्रिकेट में केवल तकनीक और ताकत ही नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति भी कितनी महत्वपूर्ण होती है। मैक्सवेल की यह पारी आज भी वनडे विश्व कप इतिहास की महान पारियों में गिनी जाती है।

मैदान पर हमेशा कुछ नया करने का अंदाज

मैक्सवेल की सबसे बड़ी खासियत उनका बेखौफ खेल था। वह पारंपरिक क्रिकेट शॉट्स के साथ ऐसे अनोखे शॉट खेलने के लिए भी जाने जाते थे, जिनकी कल्पना करना आसान नहीं था। उनकी बल्लेबाजी में जोखिम, आत्मविश्वास और मनोरंजन का अनोखा मेल देखने को मिलता था।

वह केवल बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि उपयोगी ऑफ स्पिन गेंदबाज और बेहतरीन क्षेत्ररक्षक भी रहे। यही वजह थी कि टीम को उनसे हर विभाग में योगदान की उम्मीद रहती थी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा, फ्रेंचाइजी क्रिकेट जारी रहेगा

मैक्सवेल ने अपने फैसले के पीछे शरीर को आराम देने और अपने करियर के बाकी क्रिकेट टूर्नामेंटों के लिए फिटनेस बनाए रखने की जरूरत बताई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ विक्टोरिया के लिए 50 ओवर और चार दिवसीय घरेलू क्रिकेट से भी संन्यास लेने का फैसला किया है। हालांकि, क्रिकेट प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि मैक्सवेल अभी फ्रेंचाइजी टी-20 क्रिकेट में खेलना जारी रखेंगे। वह बिग बैश लीग में मेलबर्न स्टार्स के लिए भी मैदान पर नजर आएंगे।

यादों में हमेशा जिंदा रहेगा द बिग शो

ग्लेन मैक्सवेल के संन्यास के साथ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट ने एक ऐसे खिलाड़ी को विदा किया है, जिसने अपनी प्रतिभा से खेल को नई पहचान दी। उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन जब भी टीम को किसी चमत्कार की जरूरत पड़ी, मैक्सवेल ने अपने प्रदर्शन से उम्मीद जगाई।

आंकड़े उनके करियर की उपलब्धियां जरूर बताते हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उन पलों में छिपी है, जब उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।

 

You may have missed