हस्तिनापुर में सरकारी राशन की कालाबाजारी का आरोप, धर्मकांटे पर बोरियां उतारने का वीडियो सौंपा

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हस्तिनापुर क्षेत्र में सरकारी राशन की कथित कालाबाजारी और राशन वितरण में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को वितरित किए जाने वाले सरकारी खाद्यान्न को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय खुले बाजार में बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं, राशन वितरण में भी निर्धारित मात्रा से कम अनाज देने और कार्ड धारकों से अतिरिक्त पैसे वसूलने की शिकायत की गई है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) मेरठ के कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी है। साथ ही, आरोपों के समर्थन में वीडियो साक्ष्य भी अधिकारियों को सौंपे हैं।

राशन की बोरियां उतारकर बेचने का आरोप

शिकायतकर्ता रवि कुमार की ओर से दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, हस्तिनापुर स्थित मनोरहपुर कॉलोनी की उचित दर वाली सरकारी राशन दुकान रितु शर्मा के नाम पर आवंटित है। हालांकि, आरोप है कि दुकान का दैनिक संचालन उनके पति कुलदीप शर्मा करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि सरकारी खाद्यान्न का वितरण पात्र लाभार्थियों को करने के बजाय उसकी कालाबाजारी की जा रही है।

शिकायत में 22 अक्टूबर 2026 की एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि सरकारी खाद्यान्न से भरा ट्रक जब हस्तिनापुर स्थित धर्मकांटे पर वजन कराने पहुंचा, तो वहां मौजूद कुलदीप शर्मा की मौजूदगी में ट्रक से कई बोरियां उतारी गईं। इसके बाद इन बोरियों को निजी दोपहिया वाहनों पर लादकर दूसरी जगह भेज दिया गया।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है, जिसे उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी के कार्यालय में साक्ष्य के रूप में जमा कराया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकारी राशन की बोरियां खुले बाजार में करीब 1000 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेची जा रही हैं।

राशन कार्ड धारकों को कम अनाज देने की शिकायत

ग्रामीणों ने केवल खाद्यान्न की कालाबाजारी ही नहीं, बल्कि राशन वितरण में कथित अनियमितताओं की भी शिकायत की है। स्थानीय निवासी ओमवीर गुर्जर के अनुसार, राशन दुकान पर आने वाले महिलाओं, बंगाली समाज तथा दलित और वंचित वर्ग के कुछ जरूरतमंद परिवारों को कथित रूप से डराकर निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है।

उनका आरोप है कि चावल और अन्य खाद्यान्न के वितरण में कटौती की जाती है। शिकायत में चावल की निर्धारित मात्रा में 17 किलोग्राम तक की कटौती और अन्य अनाज में केवल 15 किलोग्राम देने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने राशन कार्ड बनवाने के नाम पर 1500 रुपये लेने और 100 रुपये मूल्य की वस्तु के बदले 120 रुपये वसूलने जैसे आरोप भी लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की कथित वसूली से गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

डीएसओ कार्यालय पहुंचकर ग्रामीणों ने की शिकायत

स्थानीय निवासी ओमवीर गुर्जर ने बताया कि ग्रामीण जिला पूर्ति अधिकारी के कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। उन्होंने कहा कि उनके पास वीडियो सहित पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी राशन के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

उनका कहना है कि सरकार गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी राशन देती है। ऐसे में यदि खाद्यान्न की कालाबाजारी होती है या लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा से कम राशन मिलता है, तो इसका सीधा नुकसान जरूरतमंद परिवारों को उठाना पड़ता है।

डीएसओ ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन

इस मामले में जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि हस्तिनापुर क्षेत्र के कुछ लोग राशन डीलर के खिलाफ शिकायत लेकर उनके कार्यालय पहुंचे थे। शिकायतकर्ताओं ने उन्हें लिखित शिकायती पत्र भी सौंपा है।

डीएसओ ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित राशन डीलर के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, ग्रामीणों की शिकायत और सौंपे गए वीडियो साक्ष्यों के आधार पर विभागीय जांच का इंतजार है। अब देखना होगा कि जांच में सरकारी खाद्यान्न की कथित कालाबाजारी और राशन वितरण में अनियमितताओं के आरोप कितने सही साबित होते हैं।

 

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