खागा की ऐतिहासिक रामलीला में धनुष भंग होते ही गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां

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रिपोर्ट- अशोक सिंह

 फतेहपुर। जनपद फतेहपुर के खागा नगर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में धनुषयज्ञ की लीला का भव्य और आकर्षक मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग से जुड़ी इस लीला को देखने के लिए दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। रामलीला परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा। वहीं, कलाकारों के शानदार अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को पूरी रात अपनी जगह पर बैठे रहने के लिए मजबूर कर दिया।

रामलीला आयोजन के लिए परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंच की भव्य सजावट और धार्मिक वातावरण ने आयोजन की सुंदरता को और बढ़ा दिया। जैसे-जैसे लीला आगे बढ़ी, वैसे-वैसे दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया। विशेष रूप से धनुष भंग और भगवान परशुराम-लक्ष्मण संवाद का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।

राजा जनक के दरबार में शिव धनुष उठाने में असफल रहे राजा-महाराजा

धनुषयज्ञ की लीला के दौरान राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का विशाल धनुष रखा गया। माता सीता के स्वयंवर में शामिल होने के लिए अनेक राजा-महाराजा पहुंचे थे। सभी के सामने यह चुनौती थी कि जो भी भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा।

इसके बाद एक-एक कर कई राजा-महाराजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। सभी राजाओं को असफल देखकर राजा जनक की चिंता बढ़ गई। उनकी निराशा और भावुक संवादों ने दर्शकों को भी भावुक कर दिया।

वहीं, लीला में पेटू राजा के हास्य अभिनय ने माहौल को मनोरंजक बना दिया। उनके मजेदार अंदाज और संवादों पर दर्शक खूब हंसे। पूरा रामलीला पंडाल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। इस तरह धार्मिक प्रसंग के साथ हास्य का सुंदर समावेश देखने को मिला।

श्रीराम के धनुष तोड़ते ही जय श्रीराम से गूंजा रामलीला परिसर

जब सभी राजा-महाराजा भगवान शिव के धनुष को उठाने में असफल हो गए, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचे। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने सहजता से भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया।

इसी दौरान धनुष टूटने की आवाज से पूरा परिसर गूंज उठा। धनुष भंग होते ही रामलीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। चारों ओर माता जानकी और प्रभु श्रीराम के जयकारे सुनाई देने लगे। दर्शकों ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ इस प्रसंग का स्वागत किया।

यह दृश्य रामलीला के सबसे खास और भावनात्मक क्षणों में शामिल रहा। श्रद्धालुओं के उत्साह और कलाकारों की प्रस्तुति ने स्वयंवर प्रसंग को जीवंत बना दिया।

परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

धनुष भंग होने के बाद मंच पर भगवान परशुराम का आगमन हुआ। भगवान शिव के धनुष के टूटने की जानकारी मिलने पर परशुराम क्रोधित हो उठे। इसके बाद भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखे संवादों का सिलसिला शुरू हुआ।

इस प्रसंग में दोनों कलाकारों ने अपने अभिनय कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। एक ओर परशुराम के क्रोध और ओजपूर्ण वाणी ने दर्शकों को प्रभावित किया, तो दूसरी ओर लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण जवाबों ने लीला में रोमांच के साथ हास्य का भी रंग भर दिया।

दोनों पात्रों के बीच हुए संवादों को दर्शकों ने खूब सराहा। कई मौकों पर दर्शक तालियां बजाते नजर आए, वहीं लक्ष्मण के चुटीले जवाबों पर पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। कलाकारों की संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं ने इस प्रसंग को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

देर सुबह तक दर्शकों ने लिया रामलीला का आनंद

खागा नगर की ऐतिहासिक रामलीला में धनुषयज्ञ का मंचन धार्मिक आस्था, मनोरंजन और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर संगम रहा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शकों के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

इसके अलावा, आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने पूरी रात रामलीला का आनंद लिया। धनुष भंग का दृश्य और परशुराम-लक्ष्मण संवाद इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण बने रहे। कलाकारों की मेहनत, प्रभावशाली प्रस्तुति और दर्शकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

खागा की यह ऐतिहासिक रामलीला धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने के साथ ही नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है।

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