SIR पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- 13 करोड़ वोट चोरी हुए होते तो देश की तस्वीर अलग होती

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Digital UP News

वाराणसी: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। वाराणसी में उन्होंने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर सवाल उठाए। संबित पात्रा ने कहा कि यदि वास्तव में 13 करोड़ वोटों की चोरी हुई होती, तो देश की राजनीतिक तस्वीर कुछ और होती।

उन्होंने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता रहा है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले इसके इतिहास और उद्देश्य को भी समझना चाहिए।

संबित पात्रा ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार SIR की प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में दो बार यह प्रक्रिया हुई है। उन्होंने इसी आधार पर कांग्रेस से सवाल किया कि जब पहले भी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण होता रहा है, तो अब इसे लेकर आपत्ति क्यों जताई जा रही है?

SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर उठाए सवाल

वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान संबित पात्रा ने SIR को लेकर कांग्रेस के रुख पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन करना चुनावी व्यवस्था का एक सामान्य हिस्सा है। इसके तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जबकि नियमों के अनुसार मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य त्रुटियों को भी ठीक किया जा सके।

भाजपा सांसद ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि पहले की सरकारों के समय भी SIR की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है, तो मौजूदा समय में इसका विरोध किस आधार पर किया जा रहा है? उनके अनुसार, किसी भी चुनावी प्रक्रिया पर चर्चा तथ्यों और नियमों के आधार पर होनी चाहिए।

क्या है SIR और मतदाता सूची में क्यों होता है पुनरीक्षण?

SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव आयोग मतदाता सूची की विस्तृत जांच करता है, ताकि उसमें पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज रहें।

दरअसल, समय के साथ कई मतदाताओं के पते बदल जाते हैं। कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो जाती है, जबकि नए युवा 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मतदान के पात्र बनते हैं। ऐसी परिस्थितियों में मतदाता सूची को अपडेट करना आवश्यक होता है।

इसके तहत नए मतदाताओं के नाम शामिल करने, गलत प्रविष्टियों को ठीक करने और नियमों के अनुसार अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, इस दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटे, यह सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।

कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार SIR होने का किया दावा

संबित पात्रा ने अपने बयान में SIR प्रक्रिया के इतिहास का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया था। वहीं, मौजूदा सरकार के दौरान दो बार SIR की प्रक्रिया अपनाई गई है।

उन्होंने इस तुलना के जरिए कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पहले से चली आ रही है, तो वर्तमान में इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।

इस बयान के जरिए भाजपा सांसद ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण किसी एक सरकार या राजनीतिक दल से जुड़ी व्यवस्था नहीं है। हालांकि, उनके बताए गए 10 और दो बार के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित चुनावी रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।

13 करोड़ वोट चोरी के आरोप पर संबित पात्रा का जवाब

SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच 13 करोड़ वोटों का मुद्दा भी चर्चा में है। संबित पात्रा ने इसी आंकड़े को लेकर कांग्रेस से सवाल किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में 13 करोड़ वोटों की चोरी हुई होती, तो देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक तस्वीर अलग होती।

उनका यह बयान विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब के तौर पर सामने आया है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि मतदाता सूची में बदलाव और वोट चोरी के आरोपों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

हालांकि, इस मामले में यह समझना भी जरूरी है कि मतदाता सूची में नामों का जुड़ना, हटना और किसी व्यक्ति के मतदान अधिकार से वंचित होने की स्थिति अलग-अलग विषय हैं। इसलिए 13 करोड़ वोटों से जुड़े दावे का मूल्यांकन आधिकारिक आंकड़ों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर भी महत्वपूर्ण सवाल

SIR को लेकर चल रही बहस में केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि आम मतदाताओं के अधिकारों का संरक्षण भी एक बड़ा विषय है। मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि होने पर उसका असर संबंधित नागरिक के मतदान अधिकार पर पड़ सकता है।

इसलिए पुनरीक्षण के दौरान पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। पात्र मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचने, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने और किसी प्रकार की गलती होने पर आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

इसके अलावा, जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की स्थिति बनती है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। इससे मतदाताओं के बीच भरोसा कायम रखने में मदद मिल सकती है।

वहीं, राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी है कि वे मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाएं। इससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के सामने सही जानकारी पहुंच सकती है।

SIR पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी है सियासी बहस

कुल मिलाकर, वाराणसी में संबित पात्रा का बयान SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। एक ओर भाजपा इस प्रक्रिया को मतदाता सूची के नियमित सुधार और पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्षी दलों की ओर से मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मतदान अधिकारों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ऐसे में इस पूरे विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आधिकारिक आंकड़ों, पारदर्शी प्रक्रिया और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण से ही संभव है।

अब देखना होगा कि SIR को लेकर कांग्रेस की ओर से संबित पात्रा के बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और चुनाव आयोग इस प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर किस तरह स्थिति स्पष्ट करता है।

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