ब्रज उत्सव 2026 में शरद अग्रवाल की गायकी का दिखा जादू, तीन गीतों से बांधा समां – झूम उठे दर्शक,,,
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में आयोजित ब्रज उत्सव 2026 की सांस्कृतिक संध्या संगीत और सुरों के नाम रही। कार्यक्रम में मथुरा के शरद अग्रवाल ने अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने लगातार तीन लोकप्रिय फिल्मी गीतों की प्रस्तुति देकर महफिल में ऐसा रंग जमाया कि पूरा माहौल संगीत की मिठास से भर उठा।
अशोका ट्रैवेल्स, मथुरा के संचालक शरद अग्रवाल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीत ‘चिट्ठी आई है’ से की। पंकज उधास की आवाज में लोकप्रिय हुआ यह गीत फिल्म ‘नाम’ का हिस्सा है। गीत के भावपूर्ण बोल और शरद अग्रवाल की गायकी ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘बॉर्डर’ का लोकप्रिय गीत ‘संदेशे आते हैं’ प्रस्तुत किया। इस गीत के माध्यम से उन्होंने देशप्रेम और अपनों से दूर रहने की भावनाओं को सुरों में पिरोने का प्रयास किया।
वहीं, उनकी तीसरी प्रस्तुति फिल्म ‘कल हो ना हो’ का शीर्षक गीत रही। ‘हर घड़ी बदल रही है रूप जिंदगी’ से शुरू होने वाले इस गीत ने कार्यक्रम में एक अलग ही माहौल बना दिया। लगातार तीन लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को संगीत के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराया।
तीन गीतों से सजी ब्रज उत्सव की शाम
ब्रज उत्सव में शरद अग्रवाल की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि उन्होंने एक के बाद एक तीन गीत प्रस्तुत किए। उनकी गायकी में सहजता और संगीत के प्रति लगाव साफ दिखाई दिया। गीतों के चयन में भी विविधता नजर आई। जहां ‘चिट्ठी आई है’ ने भावनात्मक पक्ष को सामने रखा, वहीं ‘संदेशे आते हैं’ ने देशप्रेम की भावना को स्वर दिया। इसके बाद ‘कल हो ना हो’ के शीर्षक गीत ने जीवन के बदलते रंगों और संवेदनाओं को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया।
इस तरह तीनों गीतों ने कार्यक्रम की सांस्कृतिक शाम को एक अलग पहचान दी। शरद अग्रवाल की मंच पर सहज मौजूदगी और आत्मविश्वास ने उनकी प्रस्तुति को खास बनाया। संगीत के प्रति उनका उत्साह उनकी गायकी में भी दिखाई दिया।
स्थानीय प्रतिभाओं को मिला मंच
ब्रज उत्सव 2026 में देश-विदेश से जुड़े कलाकारों की भागीदारी के बीच स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे आयोजनों की विशेषता यही है कि इनके माध्यम से क्षेत्रीय कलाकारों को बड़े सांस्कृतिक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। साथ ही, दर्शकों को अलग-अलग विधाओं और प्रस्तुतियों का आनंद लेने का अवसर भी मिलता है।
इसी क्रम में शरद अग्रवाल की प्रस्तुति ने मथुरा की स्थानीय प्रतिभा और सांस्कृतिक रुचि को सामने रखा। व्यवसाय से जुड़े होने के बावजूद संगीत के प्रति उनका लगाव उनकी प्रस्तुति में स्पष्ट नजर आया। उन्होंने अपनी तीनों प्रस्तुतियों के जरिए यह दिखाया कि कला और संगीत के प्रति जुनून किसी एक पेशे तक सीमित नहीं होता।
व्यवसाय के साथ संगीत का शौक भी रखते हैं शरद अग्रवाल
मथुरा में शरद अग्रवाल व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े हैं और अशोका ट्रैवेल्स का संचालन करते हैं। हालांकि, संगीत के प्रति उनकी रुचि भी लंबे समय से उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रही है। ब्रज उत्सव जैसे सार्वजनिक सांस्कृतिक मंच पर उनकी प्रस्तुति इसी रुचि की एक झलक रही।
दरअसल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की भागीदारी आयोजन को और अधिक जीवंत बनाती है। जब किसी शहर का व्यक्ति अपनी प्रतिभा के साथ ऐसे मंच पर सामने आता है, तो आयोजन में स्थानीय जुड़ाव भी बढ़ता है। शरद अग्रवाल की प्रस्तुति को इसी दृष्टि से मथुरा की स्थानीय प्रतिभा की एक खूबसूरत अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है।
ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाता उत्सव
ब्रज क्षेत्र अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और संगीत परंपराओं के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। यहां आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सवों में लोककला, संगीत, नृत्य और आधुनिक प्रस्तुतियों का संगम देखने को मिलता है। ब्रज उत्सव 2026 भी इसी सांस्कृतिक विविधता को मंच प्रदान कर रहा है।
31 अक्टूबर की शाम शरद अग्रवाल की तीन लगातार प्रस्तुतियों ने इस आयोजन में संगीत का नया रंग जोड़ा। उनके द्वारा चुने गए तीनों गीत हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतों में शामिल हैं और अलग-अलग भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। यही वजह रही कि उनकी प्रस्तुति ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपनी अलग छाप छोड़ी।
कुल मिलाकर, ब्रज उत्सव 2026 की यह शाम मथुरा की स्थानीय प्रतिभा, संगीत के प्रति जुनून और सांस्कृतिक सहभागिता का अच्छा उदाहरण बनी। शरद अग्रवाल ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से आयोजन में यादगार पल जोड़े और ब्रज की सांस्कृतिक शाम को संगीत की मिठास से भर दिया।

