हरदोई में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धनंजय कुमार गिरफ्तार, सावरिया रेस्टोरेंट के खिलाफ वायरल किया था भ्रामक वीडियो
रिपोर्ट- संजीव आनंद
इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री की सत्यता और उसकी जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। खासकर ऐसे मामलों में जहां किसी व्यक्ति या व्यापारिक प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका रहती है, वहां तथ्यों की पुष्टि करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
रेस्टोरेंट संचालक ने दर्ज कराई थी शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरदोई के कोतवाली सिटी थाना क्षेत्र के रेलवे गंज निवासी मनोज गुप्ता सावरिया स्वीट्स एवं रेस्टोरेंट का संचालन करते हैं। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि ग्राम कटईया निवासी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धनंजय कुमार ने उनके रेस्टोरेंट से संबंधित एक वीडियो तैयार किया था।
शिकायतकर्ता का कहना था कि वीडियो में वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और उसे भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। इसके बाद आरोपी ने वीडियो को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
रेस्टोरेंट संचालक के मुताबिक, वीडियो के प्रसारित होने से उनके प्रतिष्ठान की छवि प्रभावित हुई। इसके अलावा, ग्राहकों के बीच गलत संदेश जाने और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका भी जताई गई। उनका आरोप था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित इस सामग्री के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
मामले की शिकायत मिलने के बाद कोतवाली सिटी पुलिस ने प्रकरण को गंभीरता से लिया। पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने मामले के नामजद आरोपी धनंजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री पोस्ट करने और उसके संभावित कानूनी परिणामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है। ऐसे में मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में कार्रवाई
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। उपलब्ध विवरण में धारा 353, धारा 356 और धारा 336 का उल्लेख किया गया है।
इन धाराओं के संबंध में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय न्याय संहिता में प्रत्येक धारा के अलग-अलग कानूनी प्रावधान और तत्व निर्धारित हैं। इसलिए किसी मामले में कौन-सा प्रावधान लागू होगा, यह जांच में सामने आए तथ्यों और कानूनी परीक्षण पर निर्भर करता है।
पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि वायरल वीडियो को किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था। इसके अलावा, वीडियो को आगे री-पोस्ट करने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल का सवाल खड़ा किया है। आज इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कोई भी व्यक्ति वीडियो बनाकर बड़ी संख्या में लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकता है। हालांकि, इस सुविधा के साथ तथ्यात्मक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
किसी दुकान, रेस्टोरेंट, संस्थान या व्यक्ति से संबंधित शिकायत होने पर उसे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर सामने रखना जरूरी है। यदि किसी प्रतिष्ठान में कोई कमी दिखाई देती है तो संबंधित विभाग या प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। वहीं, सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना आवश्यक है।
इसके साथ ही, वीडियो को एडिट करके या अधूरी जानकारी के आधार पर प्रसारित करने से गलतफहमी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित पक्ष की प्रतिष्ठा और व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका रहती है।
हरदोई में सावरिया रेस्टोरेंट से जुड़े इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्षों पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल पुलिस आरोपी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो के प्रसार की कड़ियों की जांच कर रही है।

