कानपुर में दीपावली से पहले FSDA की छापेमारी का विरोध, व्यापारियों ने त्योहार बाद जांच कराने की मांग उठाई
रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कानपुर में मिठाई और खाद्य पदार्थों का कारोबार तेज हो गया है। इसी बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की ओर से की जा रही लगातार छापेमारी को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ने लगी है। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सोमवार को मंडलीय सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नाम ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि त्योहार के व्यस्त समय में जांच के नाम पर कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि दीपावली तक जांच और कार्रवाई रोककर त्योहार के बाद अभियान चलाया जाए।
संगठन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन पर प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र और जिला अध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे के हस्ताक्षर हैं। इसमें खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति जताते हुए लाइसेंस निलंबन वापस लेने और कारोबारियों को जागरूक करने के लिए पहले विशेष अभियान चलाने की मांग की गई है।
एक दिन में 20 बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई
व्यापारियों की नाराजगी की मुख्य वजह त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता है। विभागीय कार्रवाई के आंकड़ों के अनुसार, शहर में 12 टीमों ने एक दिन में 20 बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। इस दौरान 16 दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए, जबकि दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए।
इसके अलावा, इससे पहले एक अन्य दुकान पर गंदगी मिलने के बाद उसका लाइसेंस निलंबित किया गया था। विभाग की ओर से जांच के लिए कुल 21 खाद्य नमूने भी भेजे गए हैं। इन कार्रवाइयों के बाद मिठाई कारोबारियों के बीच चिंता का माहौल है।
व्यापारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और दुकानों में स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन सामान्य कमियां मिलने पर सीधे लाइसेंस निलंबित करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि लाइसेंस निलंबित होने के बाद संबंधित दुकानदार कानूनी रूप से खाद्य सामग्री का कारोबार नहीं कर सकता। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े त्योहार के समय दुकान बंद होने से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बाहरी जिलों से आए अधिकारियों की कार्रवाई पर उठाए सवाल
ज्ञापन में दूसरे जिलों से आए अधिकारियों की ओर से की जा रही जांच पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि त्योहार के समय इस तरह की कार्रवाई से स्थानीय खाद्य कारोबारियों में भय और असमंजस की स्थिति बन रही है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों और कारोबार की व्यावहारिक चुनौतियों को समझते हुए विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन कराने के साथ-साथ कारोबारियों को अपनी कमियां सुधारने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
मिलावट के खिलाफ व्यापार मंडल, लेकिन उत्पीड़न का विरोध
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने स्पष्ट किया कि संगठन खाद्य पदार्थों में मिलावट के पूरी तरह खिलाफ है। व्यापारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सभी कारोबारियों की जिम्मेदारी है।
हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि कुछ दुकानों पर सामान्य सफाई संबंधी कमियां मिलने पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय पहले सुधार के निर्देश दिए जाने चाहिए। इससे कारोबारियों को नियमों का पालन करने का अवसर मिलेगा और विभाग तथा व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित हो सकेगा।
व्यापारियों ने ज्ञापन में रखीं चार प्रमुख मांगें
व्यापार मंडल ने खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
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दीपावली के त्योहार तक किसी भी खाद्य कारोबारी के प्रतिष्ठान पर जांच और कार्रवाई नहीं की जाए।
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दीपावली के बाद खाद्य कारोबारियों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
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जागरूकता अभियान पूरा होने के बाद ही नियमित जांच की प्रक्रिया शुरू की जाए और छोटी कमियां मिलने पर सुधार के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
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केवल सफाई और सामान्य कमियों के आधार पर निलंबित किए गए खाद्य लाइसेंस तत्काल बहाल किए जाएं।
संगठन का कहना है कि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से व्यापारियों को राहत मिलेगी और वे बिना किसी अतिरिक्त दबाव के त्योहार के दौरान ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे सकेंगे।
ज्ञानेश मिश्र बोले- मिलावट के खिलाफ हैं, लेकिन पहले सुधार का मौका मिले
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि संगठन खाद्य पदार्थों में मिलावट का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है, लेकिन कार्रवाई का तरीका भी व्यावहारिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम मिलावट के साथ नहीं हैं। लेकिन दीपावली के चार दिन पहले दुकान बंद करा देना कहां का न्याय है? पहले समझाइए, सुधार का मौका दीजिए। सजा देनी हो, तो त्योहार के बाद दीजिए।”
खाद्य विभाग ने कहा- शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना अभियान का उद्देश्य
वहीं, खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली के पावन पर्व पर शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम जनता का भरोसा बढ़ाना और लोगों को शुद्ध एवं स्वच्छ खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से विभाग की टीमें जांच और आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं। व्यापार मंडल की ओर से सौंपा गया ज्ञापन प्राप्त हुआ है। उसमें उठाई गई उचित मांगों पर संज्ञान लिया जाएगा।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा और व्यापारियों की राहत के बीच संतुलन जरूरी
दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में त्योहार के लिए बाजारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस दौरान उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
हालांकि, सामान्य कमियों और गंभीर मिलावट के मामलों में अंतर करना भी जरूरी है। छोटी गलतियों पर कारोबारियों को सुधार का अवसर दिया जा सकता है, जबकि मिलावट या जनस्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब व्यापारियों के ज्ञापन पर खाद्य सुरक्षा विभाग क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद है कि विभाग उपभोक्ताओं की सुरक्षा और व्यापारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कदम उठाएगा, ताकि त्योहार की मिठास और बाजार का भरोसा दोनों कायम रह सकें।

