कानपुर में भारतीय किसान यूनियन का प्रदर्शन, फसल मुआवजे और मजदूरों के उचित वेतन की उठाई मांग

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रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर नगर। किसानों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने कानपुर में मंडल कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किसानों को फसल बर्बादी का मुआवजा दिलाने, खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने तथा औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को उचित वेतन देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लंबे समय से किसानों और मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी किसान और मजदूर वर्ग अपनी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। खेती-किसानी से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार करने वाले श्रमिकों तक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

फसल बर्बादी के मुआवजे की मांग

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। यूनियन के पदाधिकारियों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं, लेकिन अभी तक नुकसान का उचित आकलन कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, डीजल और कृषि उपकरणों पर खर्च बढ़ने के कारण किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं। ऐसे में यदि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब हो जाती है और समय पर मुआवजा नहीं मिलता, तो किसानों के लिए अगली फसल की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराकर पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाना चाहिए।

खाद और बीज की उपलब्धता का मुद्दा उठाया

धरना-प्रदर्शन में खाद और बीज की कथित किल्लत को लेकर भी नाराजगी जताई गई। किसान नेताओं का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने मांग की कि कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों को खाद एवं बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को निर्धारित दरों पर कृषि सामग्री मिल सके और उन्हें अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के वेतन पर सवाल

प्रदर्शनकारियों ने कानपुर मंडल के औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति पर भी चिंता जताई। यूनियन के नेताओं का आरोप है कि कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों से 12-12 घंटे तक काम कराया जाता है, लेकिन इसके बदले उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं दिया जाता।

यूनियन के मुताबिक, कुछ मजदूरों को दिनभर की मेहनत के बदले मात्र 400 रुपये तक दिए जाने की शिकायतें हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महंगाई के मौजूदा दौर में इतनी कम मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन है। उन्होंने श्रम विभाग से औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की कार्यस्थितियों, वेतन भुगतान और निर्धारित कार्य समय की जांच कराने की मांग की।

अधिकारियों की उदासीनता का लगाया आरोप

भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर कई बार आवाज उठाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर नियमित निगरानी और जवाबदेही जरूरी है।

आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान मंडल अध्यक्ष ठाकुर आयुष सिंह राजावत ने किसानों और मजदूरों की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान का उचित मुआवजा, खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता और मजदूरों को सम्मानजनक वेतन दिलाना जरूरी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ही समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो भारतीय किसान यूनियन आंदोलन को और व्यापक रूप देगी। यूनियन ने स्पष्ट किया कि किसानों और मजदूरों के अधिकारों को लेकर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

कुल मिलाकर, कानपुर में हुआ यह प्रदर्शन किसानों की कृषि संबंधी परेशानियों और औद्योगिक श्रमिकों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने का प्रयास रहा। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।

 

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