मेरठ में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण पर कथित टिप्पणी को लेकर विवाद, सपा नेताओं ने SSP को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्ट- मनीष पाराशर
मेरठ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई कथित टिप्पणी का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कथा के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विभिन्न स्थानों पर विरोध और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मेरठ में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सपा नेताओं ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर सौंपा शिकायती पत्र
जानकारी के अनुसार, सपा नेताओं ने एसएसपी कार्यालय में शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व और उनके स्वरूप को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों ने आपत्तिजनक माना है। इसके अलावा, शिकायतकर्ताओं ने अयोध्या और वृंदावन का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
शिकायत दर्ज कराने पहुंचे सपा नेता एडवोकेट अनुज भड़ाना ने कहा कि उनकी पार्टी और कार्यकर्ता भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कथित टिप्पणी से आहत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के खड़े होने के तरीके, गर्दन, कमर और पैरों को लेकर टिप्पणी की गई। साथ ही, एक तबला वादक से उनकी बांसुरी बजाने की क्षमता की तुलना किए जाने की बात भी कही गई।
अनुज भड़ाना ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन परंपरा में श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में उन्हें अलग-अलग खेमों में बांटने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कृष्ण नाम में आने वाले अक्षर ‘र’ को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई।
धार्मिक भावनाएं आहत होने का लगाया आरोप
सपा नेता अनुज भड़ाना का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से धार्मिक प्रतीकों और आराध्य देवताओं को लेकर की गई टिप्पणियों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए उनके संबंध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करते समय धार्मिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही, उन्होंने पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की कि संबंधित वीडियो और उसमें कही गई बातों की जांच कराई जाए। यदि जांच में कोई आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाली बात सामने आती है तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
हालांकि, सपा नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनका कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द का सम्मान किया जाना चाहिए।
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर दी सफाई
दूसरी ओर, विवाद बढ़ने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच किसी प्रकार का अंतर पैदा करना या श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वे स्वयं ब्रज और ठाकुरजी के अनन्य भक्त हैं। उनके मन में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरी श्रद्धा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी किसी बात या अभिव्यक्ति से किसी श्रद्धालु की भावना आहत हुई है तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं।
पुलिस जांच और कार्रवाई की मांग
फिलहाल मेरठ में सपा नेताओं की ओर से सौंपे गए शिकायती पत्र के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अब इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से जारी सफाई के बाद विवाद को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

