जाति की जकड़न समाज को बांटती है, साझी संस्कृति जोड़ती है: पढ़िए CM योगी का बड़ा बयान,,,

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Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातीय विभाजन और जाति आधारित राजनीति को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा है कि जाति की जड़ता समाज को बांटने का काम करती है, जबकि साझी आस्था और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में पिरोती हैं। उन्होंने सामाजिक एकता के लिए सांस्कृतिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज की पहचान केवल जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आपसी सहयोग और भागीदारी से होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री के इस बयान में जातीय राजनीति के साथ-साथ अयोध्या के दीपोत्सव का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव को जन-जन का उत्सव बनाने का प्रयास किया गया है। इस आयोजन में अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग भाग लेते हैं। उनके मुताबिक, दीप अलग-अलग हाथों में जलते हैं, लेकिन उनका प्रकाश पूरे समाज को एकता का संदेश देता है।

जातीय विभाजन को लेकर मुख्यमंत्री ने रखी बात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जाति व्यवस्था और जातीय राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटती है। इसके विपरीत, साझा आस्था, संस्कृति और परंपराएं समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।

उनका कहना है कि सामाजिक जीवन में लोगों के बीच आपसी सहयोग और सहभागिता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जब समाज के लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेते हैं, तो आपसी संपर्क और सामूहिकता को भी बढ़ावा मिलता है।

दरअसल, भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अलग-अलग जातियों, समुदायों, भाषाओं और परंपराओं के लोग रहते हैं। ऐसे में सामाजिक समरसता और समान भागीदारी का विषय सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में इसी संदर्भ में जातीय विभाजन के बजाय साझा सांस्कृतिक पहचान पर जोर दिया।

2017 से पहले की सरकारों पर भी उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में रही सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाया गया और समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति की उपेक्षा की गई।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती हैं। इसलिए राजनीति और शासन व्यवस्था में समाज के बीच सहयोग तथा सहभागिता को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

हालांकि, वर्ष 2017 से पहले की सरकारों को लेकर मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी उनका राजनीतिक आकलन है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और सरकारों की नीतियों को लेकर उनके अपने दृष्टिकोण और दावे रहे हैं। ऐसे में इस विषय को राजनीतिक विमर्श के संदर्भ में देखना भी जरूरी है।

अयोध्या का दीपोत्सव बना साझा सहभागिता का उदाहरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव का उल्लेख करते हुए इसे जनभागीदारी से जुड़ा आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने दीपोत्सव को जन-जन का उत्सव बनाने का प्रयास किया है।

अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन भगवान श्रीराम की नगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग दीप प्रज्वलन और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भी भागीदारी रहती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस आयोजन का संदेश केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि यहां पहचान जाति से नहीं, बल्कि सहभागिता से होती है। अलग-अलग हाथों से जलाए गए दीप मिलकर एक व्यापक प्रकाश फैलाते हैं।

इस संदर्भ में दीपोत्सव को उन्होंने ऐसा सांस्कृतिक अवसर बताया, जिसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साझा उत्सव का हिस्सा बनते हैं।

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक सहभागिता पर जोर

मुख्यमंत्री के बयान का एक प्रमुख पक्ष सामाजिक एकता और सांस्कृतिक सहभागिता है। उनका कहना है कि समाज में आपसी जुड़ाव मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, जिनमें विभिन्न वर्गों के लोग साथ आते हैं।

इसके साथ ही जातीय पहचान और जाति आधारित राजनीति का विषय भी सार्वजनिक चर्चा में बना हुआ है। भारतीय लोकतंत्र में जाति का सवाल सामाजिक प्रतिनिधित्व, समान अवसर और राजनीतिक भागीदारी जैसे कई पहलुओं से जुड़ा रहा है। इसलिए इस विषय पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।

सामाजिक समरसता की चर्चा के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि समानता, सम्मान और अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। केवल सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में सभी वर्गों की समान भागीदारी भी सामाजिक एकता के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

बयान से जातीय राजनीति पर फिर चर्चा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद जातीय राजनीति, सामाजिक विभाजन और सांस्कृतिक एकता को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से जाति आधारित विभाजन के स्थान पर साझा आस्था और संस्कृति को समाज को जोड़ने वाला माध्यम बताया है।

वहीं, अयोध्या के दीपोत्सव का उदाहरण देकर उन्होंने जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, दीपोत्सव जैसे आयोजन समाज के विभिन्न लोगों को एक साथ आने का अवसर देते हैं।

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का संदेश जातीय विभाजन से ऊपर उठकर सामाजिक सहभागिता और साझा सांस्कृतिक पहचान को महत्व देने पर केंद्रित रहा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सामाजिक एकता और समान भागीदारी से जुड़े इन विचारों को शासन और सामाजिक स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।

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