दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड? वकीलों पर टिप्पणी के बाद 11 घंटे के प्रदर्शन से बढ़ा विवाद
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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ की वकीलों पर की गई कथित टिप्पणी भी चर्चा में है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कथित तौर पर वकीलों के लिए “काले कोट वाले गुंडे” शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया।
11 घंटे तक चला पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन
2 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों ने अपने दो अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में शुरुआत में करीब 100 पुलिसकर्मी शामिल हुए, जबकि बाद में मुख्यालय के बाहर और अंदर जुटे कर्मियों की संख्या बढ़कर लगभग 500 तक पहुंचने की खबर आई। प्रदर्शन का नेतृत्व ACP मनस्वी वशिष्ठ ने किया। पुलिसकर्मियों की मांग थी कि मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने और पुलिस-वकील विवाद से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग उठाई। इस बीच वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से अनुशासन बनाए रखने और अपनी शिकायतें विभागीय माध्यम से रखने की अपील भी की।
वकीलों से विवाद के बाद शुरू हुआ था पूरा मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई घटना से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच कहासुनी और झड़प हुई थी, जिसमें अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी। इसके बाद वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
वकीलों ने आरोप लगाया था कि ACP मनस्वी वशिष्ठ ने थाने में पहुंचे अधिवक्ताओं के सामने अपना रिवॉल्वर दिखाया और उन्हें धमकाया। हालांकि, इस मामले में ACP का पक्ष भी सामने आया था। विवाद बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ का गांधी नगर उपमंडल से विशेष पुलिस इकाई महिला एवं बाल (SPUWAC) में तबादला कर दिया गया। वहीं, शाहदरा थाने के इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में भेजा गया। तबादले के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी।
प्रदर्शन में वकीलों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों की समस्याओं को उठाया। उन्होंने पुलिस और वकीलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए स्पष्ट SOP बनाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने कहा कि कुछ लोग काले कोट की आड़ में पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उन्होंने वकीलों के लिए “काले कोट वाले गुंडे” जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। इस टिप्पणी को लेकर विवाद और बढ़ गया। हालांकि, पुलिसकर्मियों की ओर से उठाए गए मुद्दों में थानों और अदालत परिसरों में सुरक्षा, शिकायतों के समाधान की व्यवस्था और पुलिस-वकील संवाद के लिए तय प्रक्रिया बनाने की मांग भी शामिल थी।
3 नवंबर को मिला निलंबन का पत्र
इस घटनाक्रम के बीच 3 नवंबर 2026 को द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबन का पत्र मिल गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्र पुलिस मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन के अगले दिन मिला। हालांकि, रिपोर्ट में निलंबन के आदेश में दर्ज आधिकारिक कारण या विस्तृत विभागीय आरोपों का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए निलंबन को केवल वकीलों पर की गई टिप्पणी या प्रदर्शन से जोड़कर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस और वकीलों के बीच समन्वय की चुनौती
दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच सामने आया यह विवाद दोनों संस्थाओं के कामकाज और आपसी समन्वय से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बन गया है। एक ओर वकील अपने साथी अधिवक्ता को चोट पहुंचने की घटना में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों ने भी थानों और अदालत परिसरों में अपनी सुरक्षा तथा विभागीय समस्याओं को उठाया।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, विभागीय अनुशासन और दोनों पक्षों के बीच संवाद जरूरी है। साथ ही, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से सार्वजनिक मंच पर की गई टिप्पणी की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल, ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबन पत्र मिलने की खबर सामने आई है। अब इस मामले में विभागीय आदेश और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

