आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं, 16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

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DigitalUPNews

उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल तत्काल राहत नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट को 16 नवंबर को इस मामले की सुनवाई करने के लिए कहा गया है। इस फैसले के बाद अब आजम खान की कानूनी लड़ाई की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने तत्काल राहत देने के बजाय याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को आदेश दिया गया कि मामले से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे जाएं, ताकि निर्धारित तारीख पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

ईडी की गिरफ्तारी को दी गई है चुनौती

दरअसल, आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। यह मामला एक विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की जमीन कथित तौर पर जबरन अधिग्रहित किए जाने से जुड़ा हुआ है। आरोपों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण से संबंधित कथित घटना वर्ष 2006 की है, जबकि इस संबंध में प्राथमिकी वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी।

इस मामले में आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि आजम खान के खिलाफ एक ईसीआईआर (ECIR) के अलावा 28 अन्य मामले भी दर्ज हैं। उनके मुताबिक, लगातार दर्ज हो रहे मामलों और की जा रही कानूनी कार्रवाई से उनके मुवक्किल को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

कपिल सिब्बल ने उठाए एफआईआर दर्ज होने में देरी के सवाल

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कथित घटना और प्राथमिकी दर्ज होने के बीच लंबे अंतराल का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिस घटना को लेकर मामला दर्ज किया गया है, वह वर्ष 2006 की बताई जा रही है, जबकि एफआईआर वर्ष 2019 में दर्ज की गई। इस तरह घटना और प्राथमिकी के बीच लगभग 13 वर्षों का अंतर है।

उन्होंने यह भी अदालत के समक्ष उल्लेख किया कि आजम खान की उम्र करीब 80 वर्ष है। ऐसे में उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई और मुकदमों की संख्या पर भी विचार किया जाना चाहिए। सिब्बल ने यह तर्क भी दिया कि जिस समय कथित घटना हुई थी, उस समय आजम खान सत्ता में नहीं थे। इसलिए उनके अनुसार, इस मामले में उनकी भूमिका और आरोपों की परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील का भी किया उल्लेख

वहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अभियोजन पक्ष की संभावित दलील की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी के लिए आजम खान के प्रभाव को जिम्मेदार ठहरा सकता है। यानी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने में देरी को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें हैं।

ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क किस तरह प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर आरोपों की अंतिम सत्यता या आजम खान की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

गाजियाबाद की विशेष अदालत ने भेजा था न्यायिक हिरासत में

गौरतलब है कि ईडी की गिरफ्तारी के बाद आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था। वहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल आजम खान दासना जेल में बंद हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में 16 नवंबर को प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को दो दिनों के भीतर संबंधित रिकॉर्ड भेजने का निर्देश भी दिया गया है। इससे हाईकोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

अब 16 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

आजम खान के लिए फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलना उनके कानूनी मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई का निर्देश देकर मामले को आगे बढ़ाने का रास्ता दिया है।

अब सभी की निगाहें 16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। इस दौरान आजम खान की ओर से गिरफ्तारी को चुनौती देने के आधार और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार किया जाएगा। हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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