स्वामी प्रसाद मौर्य से कांग्रेस प्रभारी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चा, अखिलेश यादव से रिश्तों पर उठे सवाल
Digital UP News
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और स्वामी प्रसाद मौर्य की दिल्ली में हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य पूर्व में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों और राजनीतिक फैसलों की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस प्रभारी की उनसे मुलाकात को उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
एक तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी विपक्षी राजनीति में गठबंधन के सहयोगी हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रभारी की अखिलेश यादव के आलोचक माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात ने नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे किसी गठबंधन या राजनीतिक रणनीति का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
दिल्ली में हुई मुलाकात, स्वामी प्रसाद मौर्य ने खुद दी जानकारी
2 नवंबर 2026 को स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी के कार्यालय में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, इस बातचीत में किन मुद्दों पर सहमति बनी और आगे की क्या रणनीति तय हुई, इसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए विभिन्न दलों और नेताओं से संपर्क कर रही है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कांग्रेस प्रभारी की बातचीत को आगामी चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच बढ़ी तल्खी
स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक मतभेद कोई नई बात नहीं हैं। मौर्य वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, लेकिन फरवरी 2024 में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई।
हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी फिर तेज हुई है। अखिलेश यादव से जब स्वामी प्रसाद मौर्य के INDIA गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस मामले में नजरअंदाज किया जाना चाहिए और सपा के सीट बंटवारे में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी।
इसके जवाब में स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत कांग्रेस नेतृत्व से हुई है और अखिलेश यादव उन्हें गठबंधन में शामिल होने या न होने का प्रमाणपत्र देने वाले कौन होते हैं। मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के हिस्से की सीटों से टिकट की मांग नहीं की है।
उन्होंने अखिलेश यादव पर आजम खान के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा और PDA की राजनीति पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी हो चुकी है बातचीत
स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात का सिलसिला केवल राजेंद्र पाल गौतम तक सीमित नहीं है। इससे पहले अक्टूबर 2026 की शुरुआत में उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की थी।
इस मुलाकात के बाद मौर्य ने अपनी पार्टी को INDIA गठबंधन के साथ जोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की कोई योजना नहीं है, बल्कि गठबंधन के साथ मिलकर काम करने को लेकर बातचीत हुई है। सीटों की संख्या और चुनावी रणनीति पर अंतिम निर्णय बाद में होना बताया गया था।
मौर्य ने यह भी कहा था कि उनकी बातचीत राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से हुई है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम के साथ उनकी ताजा मुलाकात को कांग्रेस के साथ राजनीतिक संवाद की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।
क्या सपा-कांग्रेस गठबंधन में बढ़ सकती है खींचतान?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों दल INDIA गठबंधन के सहयोगी हैं और आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत भी चर्चा में है।
ऐसे में कांग्रेस का स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं से संपर्क बढ़ाना राजनीतिक रूप से कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस की कोशिश विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की हो सकती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे में कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति को किस तरह रखेगी, यह भी चर्चा का विषय है।
अक्टूबर में आई रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से छोटे क्षेत्रीय दलों और नेताओं से संपर्क बढ़ाने की बात सामने आई थी। इन गतिविधियों को 2027 के चुनाव से पहले संगठनात्मक विस्तार और गठबंधन की बातचीत के संदर्भ में देखा गया। हालांकि, किसी विशेष नेता से मुलाकात को सीधे सीट बंटवारे की रणनीति से जोड़ना अभी उचित नहीं होगा।
क्या अखिलेश यादव पर दबाव बनाने की रणनीति है मुलाकात?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस स्वामी प्रसाद मौर्य से संवाद के जरिए समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है?
इस संभावना पर चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन फिलहाल कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें इस मुलाकात को अखिलेश यादव पर दबाव बनाने की रणनीति बताया गया हो।
कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच बातचीत का घोषित विषय 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति था। इसलिए इसके वास्तविक राजनीतिक मायने समझने के लिए आगे होने वाली बैठकों और दोनों पक्षों के बयानों पर नजर रखना जरूरी होगा।
अब कांग्रेस और सपा के अगले कदम पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच बनते-बिगड़ते समीकरण आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं। एक तरफ अखिलेश यादव ने मौर्य को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेतृत्व उनसे बातचीत कर रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी को INDIA गठबंधन में औपचारिक रूप से कोई जिम्मेदारी या चुनावी हिस्सेदारी मिलेगी? क्या कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की बातचीत पर इसका कोई असर पड़ेगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। इतना जरूर है कि राजेंद्र पाल गौतम और स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की 2027 की चुनावी राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

