वाराणसी में अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- काशी से मिला डबल जीरो, EVM के खिलाफ रहेगी सपा
रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी दौरे के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एमएलसी चुनाव, ईवीएम, कथित वोट चोरी, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले किए। इसके साथ ही उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयानों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की और उनके कार्यक्रमों को रद्द किए जाने की बात कही।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि एमएलसी चुनाव में भाजपा की चंडीगढ़ वाली रणनीति सफल नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि काशी में भाजपा को डबल जीरो मिला है। उनके इस बयान को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और चुनावी नतीजों के संदर्भ में भाजपा पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने अपने बयान में चुनावी आंकड़ों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया।
भाजपा पर अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
सपा प्रमुख ने भाजपा को अराजकता फैलाने वाली पार्टी बताते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति में अराजकता दिखाई देती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं और कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की अराजकता के खिलाफ पदयात्रा की बात करने से पहले यह समझना जरूरी है कि भाजपा खुद अराजकता का प्रतीक बन चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ठीक नहीं है और आम लोगों को सरकारी व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वोट चोरी के आरोपों के जरिए उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
EVM के मुद्दे पर सपा प्रमुख का बड़ा बयान
अखिलेश यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ईवीएम के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सभी सीटों पर जीत हासिल कर ले, तब भी उसका ईवीएम के प्रति विरोध जारी रहेगा।
उनके इस बयान से साफ है कि सपा प्रमुख चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर अपनी आपत्ति बरकरार रखना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी का विरोध केवल चुनावी नतीजों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक नीतिगत और लोकतांत्रिक सवाल है।
धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर जताई नाराजगी
वाराणसी में बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेन्द्र शास्त्री ने सनातन धर्म का अपमान करने का काम किया है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि उनके सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए जाने चाहिए।
इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने बयान में उन विशेष टिप्पणियों या घटनाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया, जिनके आधार पर उन्होंने यह आरोप लगाया।
ओपी राजभर पर भी अखिलेश यादव ने कसा तंज
सपा अध्यक्ष ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओपी राजभर मुख्यमंत्री की कैबिनेट में नहीं जाते, वरना उन्हें उनसे भी बड़े गुंडे देखने को मिलते।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और भाजपा गठबंधन के नेताओं पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है। ओपी राजभर को लेकर दिया गया यह बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
वाराणसी से भाजपा को घेरने की कोशिश
कुल मिलाकर वाराणसी में अखिलेश यादव ने कई मुद्दों को उठाकर भाजपा और प्रदेश सरकार को घेरने की कोशिश की। एमएलसी चुनाव से लेकर ईवीएम, स्वास्थ्य विभाग, कथित वोट चोरी और कानून-व्यवस्था तक उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े किए। इसके अलावा धार्मिक मुद्दों और ओपी राजभर पर की गई टिप्पणी ने उनके बयान को और अधिक राजनीतिक चर्चा में ला दिया।
अखिलेश यादव के इन बयानों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में भाजपा को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपना रही है। वहीं, उनके आरोपों और दावों पर भाजपा तथा संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद इस राजनीतिक बहस की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

