सीएम योगी की 49वीं पाती में दीपोत्सव का संदेश, बोले- सत्ता का अर्थ अधिकार नहीं, दायित्व है

45389f2f-dfdb-4f87-acb7-a5eee9f6ed6c

Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव-2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम अपनी 49वीं पाती लिखकर सभी को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस पत्र के माध्यम से अयोध्या के दसवें भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव में शामिल होने के लिए प्रदेशवासियों को आमंत्रित किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या पहुंचे और दीपोत्सव की अद्भुत छटा के साक्षी बनें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में दीपोत्सव को केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनर्जागरण, भारतीय सांस्कृतिक गौरव और जीवन मूल्यों से जुड़ा महापर्व बताया है। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव का संबंध हमारी धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ त्याग, मर्यादा, समर्पण और सामाजिक दायित्व जैसे आदर्शों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

दसवें दीपोत्सव के लिए तैयार अयोध्या, सीएम ने दिया निमंत्रण

मुख्यमंत्री ने अपनी 49वीं पाती में लिखा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ श्री अयोध्या धाम अपने दसवें भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव के स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या पहुंचकर इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें।

सीएम योगी के अनुसार, दीपोत्सव अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और आस्था से विकास की यात्रा का प्रतीक है। यह पर्व भारत की सनातन चेतना के पुनर्जागरण और सांस्कृतिक गौरव को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी बन रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा यह पर्व भारतीय समाज की आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भरत जी के त्याग का उदाहरण देकर दिया बड़ा संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए भरत जी के त्याग और समर्पण को याद किया। उन्होंने बताया कि जब प्रभु श्रीराम वनवास गए थे, तब भरत जी ने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया और सिंहासन पर प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाएं स्थापित कर राज्य का संचालन किया।

इस प्रसंग के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सत्ता और जिम्मेदारी का अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार प्राप्त करना नहीं, बल्कि दायित्वों का निर्वहन करना है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, भरत जी का जीवन त्याग, मर्यादा, निष्ठा और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। दीपोत्सव भी इन्हीं जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्व कर्तव्य, सेवा और समर्पण को दिया गया है।

सरयू तट और राम की पैड़ी पर जगमगाएंगे लाखों दीप

मुख्यमंत्री ने अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि मां सरयू के तट पर सजी दीपमाला और राम की पैड़ी पर जगमगाते लाखों दीप अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेंगे। ऐसा प्रतीत होगा, मानो आकाशगंगा धरती पर उतर आई हो।

उन्होंने बताया कि दीपोत्सव में दीपों की रोशनी के साथ ड्रोन के माध्यम से आकाशीय प्रस्तुतियां और कलाकारों की सांस्कृतिक सहभागिता आयोजन की भव्यता को और बढ़ाएगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामूहिक जनभागीदारी का भी प्रतीक बन चुका है।

दीपोत्सव से कुम्हारों और व्यापारियों को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में दीपोत्सव के आर्थिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

दीपोत्सव के माध्यम से कुम्हारों, मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगरों, पुष्प विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिलता है। इसके अलावा होटल और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ पहुंचता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था और जनभागीदारी विकास की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उत्तर प्रदेश ने उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है।

उन्होंने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्रोत्साहित करने की भावना पर भी जोर दिया। इससे स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलने के साथ पारंपरिक कला और शिल्प को भी संरक्षण मिलेगा।

जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा और सुरक्षा से निवेश का रास्ता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में प्रकाश, सुरक्षा, निवेश और विकास के बीच संबंध को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा का वास है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर बढ़ते हैं। निवेश से विकास होता है और विकास से रोजगार तथा सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं।

मुख्यमंत्री के इस संदेश में प्रदेश के विकास और आर्थिक गतिविधियों को सामाजिक उत्सवों से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। उन्होंने आस्था और जनभागीदारी को उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया।

वंचित परिवारों की दीपावली रोशन करने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद और वंचित परिवारों की दीपावली भी रोशन करने का प्रयास करना चाहिए।

इसके लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद परिवारों को मिट्टी के दीपक, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, दूसरों के जीवन में खुशियों का प्रकाश पहुंचाना ही दीपोत्सव की वास्तविक भावना है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 49वीं पाती में दीपोत्सव को धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास से जोड़ने का संदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से परिवार सहित अयोध्या पहुंचने और दीपोत्सव की दिव्य छटा का आनंद लेने की अपील करते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की है।

You may have missed