यूपी के इस जिले की वोटर लिस्ट गड़बड़ी में हुई बड़ी कार्रवाई, दो SDM सस्पेंड, चुनाव आयोग ने लिया है बड़ा एक्शन, अब पूरे यूपी में जांच के आदेश
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और चुनावी मोड़ ले लिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने तत्कालीन एसडीएम एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दोनों अधिकारियों और वीआरसी (वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर) के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने को कहा गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र जांच के लिए आयोग को भेजे जाएं। इतना ही नहीं, आयोग की पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों की बहाली भी नहीं की जा सकेगी। इस कार्रवाई के बाद पीलीभीत की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
भारत समाचार की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई पर उठे थे सवाल
पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई थी। दोनों अधिकारियों को पीलीभीत से हटाकर लखनऊ में तैनाती दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
मीडिया में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। भारत समाचार ने भी सवाल किया था कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी अनियमितता सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अब निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद दोनों अधिकारियों के निलंबन की प्रक्रिया और विभागीय जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
13,779 फॉर्म की जांच में सामने आईं अनियमितताएं
इस पूरे मामले की शुरुआत पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों से हुई। जांच में 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाताओं के विवरण में संशोधन के लिए 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए जाने का मामला सामने आया।
जांच के मुताबिक, इनमें 10,470 आवेदन स्वीकार किए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त किए गए थे। हालांकि, इन आवेदनों से संबंधित आवश्यक भौतिक फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाए गए।
इससे मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और उसके सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। निर्वाचन नियमों के अनुसार, मतदाता के विवरण में संशोधन के लिए निर्धारित आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
मामले की जांच के बाद सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की शिकायत पर 22 अक्टूबर को कोतवाली नगर में तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
एफआईआर में BNS की धारा 198 जोड़ने के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने के निर्देश दिए हैं। यह धारा लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना से संबंधित है।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि मामले की न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जाए, ताकि जांच और कानूनी कार्रवाई अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके।
इसके अलावा, दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार किए जाने वाले आरोपपत्र आयोग को परीक्षण के लिए भेजने होंगे। आयोग की पूर्व अनुमति के बिना उनकी बहाली नहीं की जा सकेगी।
पांच AERO की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में अब पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। निर्वाचन आयोग ने इन अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान किन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और कहां नियमों का पालन नहीं किया गया।
वहीं, वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी निर्धारित समयसीमा में मांगी गई है।
पीलीभीत की चारों विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की होगी जांच
निर्वाचन आयोग ने केवल सदर विधानसभा क्षेत्र तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। आयोग ने पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट आयोग को भेजनी होगी। रिपोर्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की टिप्पणी भी मांगी गई है।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले की अन्य विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में भी किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई है।
पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों की दोबारा होगी जांच
पीलीभीत प्रकरण के बाद निर्वाचन आयोग ने पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को अपने-अपने क्षेत्र की मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण करने को कहा है।
विशेष रूप से फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और व्यक्तिगत विवरण में संशोधन की प्रक्रिया की दोबारा जांच की जाएगी।
इसमें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और संबंधित दस्तावेजों का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी प्रकार के अनधिकृत बदलाव की संभावना को रोकना है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पीलीभीत मतदाता सूची प्रकरण में निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बाद अब प्रशासनिक और विभागीय जांच की अगली रिपोर्ट का इंतजार है। तीन दिनों में पांच AERO की भूमिका और एक सप्ताह में जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच रिपोर्ट सामने आनी है।
इसके साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6, 7 और 8 से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, पीलीभीत का यह मामला अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तक सीमित नहीं रह गया है। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और आगे किन अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाती है।

