बेहटा में मिठाई निर्माण इकाई पर खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, 85 किलो खराब चमचम नष्ट
रिपोर्ट – आशीष कुमार
गोण्डा, 31 अक्टूबर। त्योहारों और बदलते मौसम के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावट और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में विभाग की टीम ने गोण्डा जिले के बेहटा क्षेत्र में मिठाई निर्माण इकाई पर छापेमारी कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। इस दौरान मौके पर 85 किलोग्राम खराब चमचम और पांच किलोग्राम पनीर पाया गया, जिसे विक्रेता ने स्वयं नष्ट करा दिया।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार के नेतृत्व में बेहटा, झिलाही के निकट स्थित मिठाई निर्माण इकाई का निरीक्षण किया। टीम ने निर्माण परिसर में तैयार की जा रही मिठाइयों और उनमें इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कुछ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत हुई। इसके बाद टीम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित किए। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बाजार में उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो।
चमचम और पनीर समेत तीन नमूने संग्रहित
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चमचम, उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ और पनीर के कुल तीन नमूने एकत्र किए। अधिकारियों के मुताबिक, इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
इसके साथ ही विभागीय टीम ने निर्माण इकाई में रखे खाद्य पदार्थों की स्थिति का भी निरीक्षण किया। गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सामग्री को अलग कराया गया, ताकि उसका इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए न हो सके।
85 किलो खराब चमचम और पांच किलो पनीर कराया गया नष्ट
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान मौके पर 85 किलोग्राम खराब चमचम पाया गया। इसकी अनुमानित कीमत 11,900 रुपये बताई गई। इसके अलावा पांच किलोग्राम पनीर भी मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 1,750 रुपये आंकी गई।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, दोनों खाद्य पदार्थों की स्थिति को देखते हुए विक्रेता ने उन्हें स्वयं नष्ट करा दिया। इस प्रकार कुल 90 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट कराया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 13,650 रुपये है।
इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल नमूने एकत्र करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निरीक्षण के दौरान संदिग्ध और खराब खाद्य सामग्री को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से रोकने के लिए भी कदम उठा रहा है।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, संग्रहित किए गए तीनों नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित विक्रेता या प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, फिलहाल नमूनों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट मिलने के बाद ही सामने आएगा।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विभाग की नजर
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिलावट और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके तहत मिठाई निर्माण इकाइयों, दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार नमूने भी संग्रहित किए जाएंगे।
दरअसल, मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ी होती है। ऐसे में निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित मानकों का पालन करें तथा स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।

