बांदा में बिजली कनेक्शन के नाम पर गरीबों से हजारों की वसूली का आरोप, डीएम से लगाई न्याय की गुहार
रिपोर्ट- शानू वर्मा
बांदा। जनपद के नरैनी थाना क्षेत्र में बिजली कनेक्शन और मीटर लगवाने के नाम पर गरीब ग्रामीणों से कथित तौर पर हजारों रुपये की वसूली का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पिपरहरी के मजरा चौहानन पुरवा के ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के दो लाइनमैनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि कर्मचारियों ने उनसे बिजली कनेक्शन दिलाने और मीटर लगवाने के नाम पर रकम वसूली, लेकिन न तो उन्हें वैध कनेक्शन उपलब्ध कराया गया और न ही मीटर लगाए गए। इसके उलट अब विद्युत चोरी के मामले में ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज हो गए हैं।
कनेक्शन और मीटर के नाम पर वसूली का आरोप
ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, गांव में बिजली की लाइन ठीक करने और अन्य विद्युत संबंधी कार्यों के लिए आने वाले विभागीय लाइनमैन अशरफ और कृपाली ने ग्रामीणों को बिजली कनेक्शन दिलाने का भरोसा दिया था। आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने कनेक्शन और मीटर लगवाने के नाम पर अलग-अलग परिवारों से एक हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक वसूल किए।
ग्रामीणों का कहना है कि रकम लेने के बाद कर्मचारियों ने बिजली के पोल से केबल जोड़कर उनके घरों तक बिजली की आपूर्ति शुरू करा दी। साथ ही उन्हें आश्वासन दिया गया कि विभाग में कनेक्शन का पैसा जमा कराया जा रहा है और मीटर उपलब्ध होते ही घरों में लगा दिए जाएंगे। इसी भरोसे में ग्रामीण बिजली का इस्तेमाल करते रहे।
हर महीने बिल के नाम पर भी वसूली का आरोप
पीड़ित ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर दोनों कर्मचारी हर महीने बिजली बिल के नाम पर 300 से 400 रुपये तक लेते रहे। हालांकि, ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि वे कर्मचारियों की बातों पर विश्वास करते रहे और उन्हें यही लगता रहा कि उनके बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर पूरी की जा रही है।
इस दौरान किसी भी ग्रामीण को यह जानकारी नहीं थी कि उनके घरों में बिजली की आपूर्ति वैध कनेक्शन के माध्यम से नहीं हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, वे आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे हैं। इसलिए विभागीय नियमों और कनेक्शन की औपचारिक प्रक्रिया की उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी।
विद्युत विभाग की छापेमारी के बाद खुला मामला
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक महीने पहले विद्युत विभाग की संयुक्त टीम ने गांव में छापेमारी की थी। इस दौरान बिजली इस्तेमाल से संबंधित अनियमितताएं मिलने पर गांव के कई लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के आरोप में मुकदमे दर्ज किए गए। इसके साथ ही ग्रामीणों को जुर्माने की रसीदें भी भेजी गईं।
जुर्माने की रसीद मिलने के बाद ग्रामीणों को पहली बार पता चला कि उनके घरों में चल रही बिजली की आपूर्ति को विभाग की ओर से वैध कनेक्शन के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। इससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई। उनका कहना है कि जिन कर्मचारियों को उन्होंने कनेक्शन और मीटर लगवाने के नाम पर पैसे दिए थे, उन्हीं की कथित लापरवाही और वसूली के कारण आज उन्हें कानूनी कार्रवाई तथा आर्थिक दंड का सामना करना पड़ रहा है।
मजदूरी कर परिवार चलाते हैं ग्रामीण
प्रार्थना पत्र में ग्रामीणों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि वे सभी मजदूरी करके अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। इनमें कई लोग अत्यंत गरीब और अशिक्षित हैं। ऐसे में उन पर लगाए गए जुर्माने की रकम जमा करना उनके लिए बेहद कठिन है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बिजली कनेक्शन पाने की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई कर्मचारियों को दी थी। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनका कनेक्शन नियमित कर दिया जाएगा। लेकिन अब स्थिति यह है कि उन्हें न केवल जुर्माने का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि बिजली चोरी के मुकदमों की वजह से भी चिंता बनी हुई है।
जिलाधिकारी से कार्रवाई और वैध कनेक्शन दिलाने की मांग
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर लाइनमैन अशरफ और कृपाली के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने तथा नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने अपने विरुद्ध दर्ज बिजली चोरी के मुकदमों को वापस लेने और आर्थिक स्थिति को देखते हुए कम शुल्क पर वैध बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि विभागीय कर्मचारियों ने वास्तव में कनेक्शन के नाम पर रकम वसूली है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों की तय की जानी चाहिए।
दर्जनों ग्रामीणों ने सौंपा प्रार्थना पत्र
जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देने वालों में जगमोहन, राजाराम, सरोज सिंह, रामप्यारी, गुड़िया, सुनेना, गिरधारी, भूरी, श्यामा और कमला सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और विद्युत विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं तथा प्रभावित परिवारों को राहत मिल पाती है या नहीं।

