ब्रजरज उत्सव का आगाज कल से, हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका और सूफी गायकी बनेंगे आकर्षण
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन में ब्रजरज उत्सव का उल्लास छाने जा रहा है। इस सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत 23 अक्टूबर को वृंदावन स्थित नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में सिने अभिनेत्री एवं सांसद हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ के मंचन से होगी। वहीं, उत्सव का औपचारिक शुभारंभ 24 अक्टूबर को मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर किया जाएगा। इस अवसर पर प्रख्यात कलाकार ईशान मिश्रा अपनी सूफी गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
ब्रजरज उत्सव में इस बार कला, संगीत, भक्ति, हस्तशिल्प और ब्रज की पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। आयोजन के दौरान मथुरा के साथ वृंदावन में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका से होगा सांस्कृतिक आगाज
ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियां 23 अक्टूबर से शुरू होंगी। पहले दिन वृंदावन के स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ का मंचन किया जाएगा। यह प्रस्तुति उत्सव के शुरुआती आकर्षणों में शामिल है। इसके माध्यम से दर्शकों को नृत्य और नाट्य कला का अनुभव मिलेगा।
इसके अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में उत्सव का औपचारिक शुभारंभ होगा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लक्ष्मी नागप्पन के अनुसार, आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शुभारंभ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण शामिल होंगे। साथ ही, ईशान मिश्रा सूफी गायन की प्रस्तुति देंगे।
इस प्रकार, ब्रजरज उत्सव की शुरुआत से ही दर्शकों को अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का प्रयास है कि कार्यक्रमों के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच प्रदान किया जाए।
स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
ब्रजरज उत्सव की खास बात यह है कि इसमें प्रसिद्ध कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सीईओ लक्ष्मी नागप्पन के मुताबिक, प्रतिदिन कार्यक्रमों की समय-सारिणी इस तरह रखी गई है कि स्कूली बच्चों और क्षेत्रीय कलाकारों को अपनी प्रस्तुतियां देने का अवसर मिल सके।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 12 बजे से दो बजे तक स्कूली बच्चे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसके बाद दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। शाम के कार्यक्रमों में अतिथि कलाकार प्रस्तुति देंगे।
इस व्यवस्था से युवा प्रतिभाओं को मंच मिलने के साथ-साथ ब्रज क्षेत्र की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। वहीं, दर्शकों को एक ही आयोजन में संगीत, नृत्य, भजन और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।
130 दुकानों पर मिलेगा खानपान और हस्तशिल्प का अनुभव
धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर आयोजित होने वाले मेले को भी खास अंदाज में तैयार किया जा रहा है। यहां खरीदारी, खानपान, हस्तशिल्प और मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मेले में कुल 130 दुकानें बनाई जा रही हैं, जिन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।
इनमें 30 दुकानें फूड कोर्ट के लिए निर्धारित हैं। इसके अलावा 20 दुकानें हुनर हाट, 20 हस्तशिल्प, 20 एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) और 20 ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों के लिए रखी गई हैं। वहीं, 20 दुकानें विभिन्न सरकारी विभागों के लिए निर्धारित की गई हैं। इन दुकानों के माध्यम से विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएंगे।
इस तरह मेले में आने वाले लोगों को स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और खानपान का अनुभव मिलेगा। साथ ही, स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर भी प्राप्त होगा।
आगंतुकों के मनोरंजन के लिए झूलों की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अतिरिक्त, मेला स्थल के सामने मैदान में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि लोगों को वाहन खड़े करने में परेशानी न हो।
गोकुल गांव में दिखेगी ब्रज की पुरानी ग्रामीण संस्कृति
इस बार ब्रजरज उत्सव में ‘गोकुल गांव’ विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। इसके लिए एक विशेष स्थल विकसित किया जा रहा है, जहां ब्रज के पारंपरिक ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई जाएगी।
इस थीम आधारित स्थल पर प्राचीन शैली के घरों, गायों और ग्रामीण परिवेश के माध्यम से पारंपरिक गांव का स्वरूप प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य आगंतुकों को ब्रज की लोक संस्कृति, परंपराओं और पुरानी जीवनशैली से परिचित कराना है।
आज के आधुनिक परिवेश में पारंपरिक ग्रामीण जीवन की झलक लोगों के लिए अलग अनुभव हो सकती है। खासकर बच्चों और युवाओं को इससे ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार गोकुल गांव उत्सव के मनोरंजन के साथ सांस्कृतिक और पारंपरिक पक्ष को भी मजबूत करेगा।
23 अक्टूबर से 2 नवंबर तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
ब्रजरज उत्सव के अंतर्गत 23 अक्टूबर से 2 नवंबर तक विभिन्न कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। निर्धारित सूची के अनुसार, 23 अक्टूबर को हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका वृंदावन में होगी। 24 अक्टूबर को धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर ईशान मिश्रा सूफी गायन प्रस्तुत करेंगे।
25 अक्टूबर को वृंदावन में सौरभ राज जैन की प्रस्तुति ‘मेरे कृष्ण’ और रेलवे ग्राउंड पर रसिक वैष्णव का ‘ब्रज रस’ भजन कॉन्सर्ट आयोजित होगा। 26 अक्टूबर को स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में रासलीला-गीता शोध संस्थान का कार्यक्रम तथा रेलवे ग्राउंड पर सुदेश भोसले की म्यूजिकल इवनिंग प्रस्तावित है।
इसके बाद 27 अक्टूबर को नादात्म बैंड की संगीत प्रस्तुति और वृंदावन में शिवानी मिश्रा का ‘कलर्स ऑफ यूपी’ कार्यक्रम होगा। 28 अक्टूबर को ईशिता विश्वकर्मा भजन प्रस्तुत करेंगी, जबकि 29 अक्टूबर को लखबीर सिंह लक्खा की भजन प्रस्तुति होगी। 30 अक्टूबर को अतुल पंडित सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे और 31 अक्टूबर को पद्मश्री रामदयाल की नौटंकी आयोजित होगी।
नवंबर में भी कार्यक्रम जारी रहेंगे। एक नवंबर को मधुरम डिवोशनल म्यूजिकल बैंड और दो नवंबर को बैक स्टेज सिवलिंग की संगीत प्रस्तुति प्रस्तावित है। कार्यक्रमों की अंतिम समय-सारिणी और प्रवेश संबंधी जानकारी के लिए आगंतुक आयोजन से जुड़ी आधिकारिक सूचना देख सकते हैं।
ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच
ब्रजरज उत्सव केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ब्रज की धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं को भी सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देना, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग उत्पादों को बढ़ावा देना तथा गोकुल गांव के जरिए पारंपरिक जीवनशैली दिखाना इस आयोजन को विविधता प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, मथुरा और वृंदावन में आयोजित होने वाला ब्रजरज उत्सव कला, भक्ति, संगीत, खरीदारी और ग्रामीण संस्कृति का साझा मंच बनने जा रहा है। 23 अक्टूबर को हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका से शुरू होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों के बाद 24 अक्टूबर को धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर औपचारिक शुभारंभ होगा। ऐसे में स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले दर्शकों को कई दिनों तक विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।

