मेरठ में भरत मिलाप के पारंपरिक स्थल में बदलाव पर विवाद, हिंदू महासभा ने की पुरानी जगह बहाल करने की मांग

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रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: ऐतिहासिक शहर मेरठ में श्री भरत मिलाप शोभायात्रा के पारंपरिक आयोजन स्थल में बदलाव को लेकर विवाद सामने आया है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने रामलीला कमेटी और स्थानीय प्रशासन के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए पूर्व निर्धारित स्थल पर ही आयोजन कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि भरत मिलाप मेरठ की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा आयोजन है। इसलिए इसके पारंपरिक स्थल में बदलाव करने से पहले सभी पक्षों के विचारों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे को लेकर शारदा रोड स्थित हिंदू महासभा कार्यालय परिसर में एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने आयोजन स्थल में बदलाव के निर्णय का विरोध किया। वहीं, रामलीला कमेटी ने स्पष्ट किया कि शोभायात्रा के मार्ग और आयोजन स्थलों में बदलाव सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

पारंपरिक स्थल पर आयोजन कराने की मांग

अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि घंटाघर इमामबाड़े के आगे दशकों से परंपरा के अनुसार श्री भरत मिलाप का आयोजन होता आया है। संगठन का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों से आयोजन स्थल में बदलाव किए जाने से परंपरा प्रभावित हुई है।

हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं धाम के संस्थापक पंडित अशोक शर्मा के निर्देश पर हुई बैठक में पदाधिकारियों ने मांग की कि भरत मिलाप शोभायात्रा को उसके पूर्व निर्धारित स्थल पर ही आयोजित कराया जाए। संगठन का मानना है कि धार्मिक आयोजनों से जुड़े पारंपरिक स्थानों का ऐतिहासिक महत्व होता है और उनकी पहचान को बनाए रखना जरूरी है।

इसके साथ ही महासभा ने प्रशासन और रामलीला कमेटी से आग्रह किया कि वे इस मामले पर दोबारा विचार करें। संगठन ने कहा कि आयोजन स्थल को लेकर निर्णय लेते समय मेरठ की पुरानी परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

ऐतिहासिक घटनाओं का दिया हवाला

बैठक में पंडित अशोक शर्मा ने भरत मिलाप आयोजन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1939 में वीर सावरकर को भी इस क्षेत्र में तनावपूर्ण परिस्थितियों के दौरान आना पड़ा था। इसके अलावा, उनके अनुसार, वर्ष 1969 और 1978 में भी भरत मिलाप के आयोजन को लेकर दो समुदायों के बीच स्थिति संवेदनशील हुई थी।

हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भरत मिलाप का पारंपरिक स्थल शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है। संगठन का कहना है कि इस स्थान के महत्व को समझते हुए आयोजन की व्यवस्था तय की जानी चाहिए।

हालांकि, इन ऐतिहासिक घटनाओं और आयोजन स्थल से जुड़े दावों के संबंध में स्वतंत्र ऐतिहासिक दस्तावेजों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए इन बातों को संगठन की ओर से रखे गए पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।

काला बैनर लगाकर जताया सांकेतिक विरोध

आयोजन स्थल में बदलाव के विरोध में हिंदू महासभा ने शोभायात्रा मार्ग पर महापुरुषों की स्मृति में एक काला बैनर लगाया। संगठन ने इसे श्रद्धांजलि और सांकेतिक विरोध का माध्यम बताया।

पंडित अशोक शर्मा ने कहा कि भरत मिलाप केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के प्रति भरत के समर्पण, भाईचारे और त्याग की भावना का प्रतीक भी है। उनके अनुसार, इस आयोजन से मेरठ की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का जुड़ाव है।

उन्होंने कहा कि जब तक पारंपरिक स्थल को लेकर संगठन की मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हिंदू महासभा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी। संगठन ने इस मामले में प्रशासन और रामलीला कमेटी से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपेक्षा भी जताई।

बैठक में जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष भरत राजपूत, कार्यालय मंत्री दीपक शर्मा, नगर मंत्री शेखर पंडित, नगर मंत्री प्रथम दीक्षित, शानू गोयल और सावन कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रामलीला कमेटी ने सुरक्षा और व्यवस्था को बताया प्राथमिकता

दूसरी ओर, मेरठ शहर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने आयोजन स्थल और शोभायात्रा के मार्ग में किए जाने वाले बदलावों के पीछे सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने कहा कि श्री सनातन धर्म रक्षिणी सभा और मेरठ शहर रामलीला कमेटी का उद्देश्य रामलीला तथा भरत मिलाप का भव्य आयोजन कर शहर में शांति, आपसी सौहार्द और सुव्यवस्था बनाए रखना है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के अनुसार शोभायात्रा के मार्ग तथा आयोजन स्थलों में व्यावहारिक समन्वय किया जाता है।

मनोज गुप्ता के मुताबिक, इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा से बचाना और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराना है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला कमेटी सभी वर्गों को साथ लेकर भगवान श्रीराम के प्रेम और भरत के समर्पण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना चाहती है।

इस तरह, एक ओर हिंदू महासभा पारंपरिक स्थल को बहाल करने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर रामलीला कमेटी सुरक्षा और प्रशासनिक आवश्यकताओं को महत्वपूर्ण बता रही है।

संवाद से समाधान निकलने की उम्मीद

मेरठ में भरत मिलाप के आयोजन स्थल को लेकर सामने आए इस विवाद में दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग हैं। हिंदू महासभा ऐतिहासिक परंपरा और धार्मिक आस्था के आधार पर पुराने स्थल पर आयोजन कराने की मांग कर रही है। वहीं, रामलीला कमेटी का कहना है कि आयोजन की व्यवस्था सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर तय की जाती है।

ऐसे में प्रशासन, रामलीला कमेटी और संबंधित संगठनों के बीच संवाद इस मामले के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। सभी पक्षों की चिंताओं पर विचार करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और शहर में आपसी सौहार्द भी बना रहे।

फिलहाल, हिंदू महासभा ने अपनी मांग दोहराते हुए प्रशासन और रामलीला कमेटी से आयोजन स्थल के संबंध में पुनर्विचार करने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ते हैं और पारंपरिक स्थल को लेकर उठे विवाद का समाधान कैसे निकाला जाता है।

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