लखीमपुर खीरी में ऐतिहासिक दशहरा मेले का शुभारंभ, रामायण की नृत्य-नाटिका ने मोहा मन

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रिपोर्ट – शरद अवस्थी 

लखीमपुर खीरी: शहर की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक ऐतिहासिक दशहरा मेले का शुक्रवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन, पूजन-अर्चन और रामायण के प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच मेले का आगाज हुआ। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने नगर पालिकाध्यक्ष डॉ. ईरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार और मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत ‘डब्बू’ के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने दशहरा मेले को सामाजिक एकता, अखंडता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला आयोजन बताया। वहीं, लखनऊ से आए कलाकारों की रामायण आधारित नृत्य-नाटिका ने दर्शकों का मन मोह लिया। सीता स्वयंवर से लेकर श्रीराम के राजतिलक तक के प्रसंगों को कलाकारों ने मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

डीएम और एसएसपी ने किया मेले का शुभारंभ

नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित मेला दशहरा-2026 का उद्घाटन पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले की शुरुआत की। इस दौरान नगर पालिकाध्यक्ष डॉ. ईरा श्रीवास्तव, ईओ संजय कुमार और मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत ‘डब्बू’ भी मौजूद रहे।

नगर पालिकाध्यक्ष डॉ. ईरा श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य में जिला प्रशासन, अतिथियों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अतिथियों का सम्मान करते हुए आयोजन में सहभागिता के लिए सभी का धन्यवाद किया। उद्घाटन समारोह का संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राम मोहन गुप्त ने किया।

मेले के शुभारंभ के साथ ही शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का सिलसिला शुरू हो गया। आयोजन में लोगों की भागीदारी ने नगर की पुरानी परंपरा के प्रति जुड़ाव को भी दर्शाया।

पांच पीढ़ियों के सहयोग से समृद्ध हुई परंपरा

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक दशहरा मेला और रामलीला किसी एक व्यक्ति या प्रशासन के प्रयासों का परिणाम नहीं हैं। बल्कि, नगरवासियों के निरंतर सहयोग, समर्पण और सहभागिता ने इस परंपरा को वर्षों से आगे बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि पांच पीढ़ियों ने अपने योगदान से इस आयोजन को समृद्ध किया है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। साथ ही, लोगों को एक-दूसरे के करीब लाकर सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं।

डीएम ने नगरवासियों को मेले के शुभारंभ की बधाई देते हुए इसके सफल और शांतिपूर्ण आयोजन की कामना की। उन्होंने कहा कि दशहरा मेला और रामलीला जैसे कार्यक्रम समाज में एकता और अखंडता की भावना को मजबूत करते हैं। इसलिए इन परंपराओं को आगे बढ़ाने में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है।

नवरात्र से दीपावली तक उत्सव और समरसता का संदेश

जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि अक्टूबर और नवंबर के महीने धार्मिक आस्था, भक्ति और उल्लास से जुड़े रहते हैं। नवरात्र, दुर्गा पूजा, रामलीला, रावण दहन और दीपावली जैसे पर्व लोगों को उत्सव के साथ सामाजिक समरसता, आनंद और शांति का संदेश देते हैं।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है। जब नगरवासी मिलकर किसी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, तो उसका महत्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन जाता है।

इस क्रम में उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार जताया और मेले की परंपरा को इसी तरह आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

रामचरितमानस की चौपाई से दिया विनम्रता का संदेश

अपने संबोधन के दौरान डीएम अंजनी कुमार सिंह ने श्रीरामचरितमानस की चौपाई ‘सो सब तव प्रताप रघुराई, नाथ न कछू मोर प्रभुताई’ का उल्लेख किया। उन्होंने इसके माध्यम से विनम्रता और सामूहिक सहयोग का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छे कार्य की सफलता का श्रेय केवल एक व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए। इसके पीछे ईश्वर की कृपा, लोगों का सहयोग और सभी की सहभागिता महत्वपूर्ण होती है। यह भावना सामाजिक जीवन में परस्पर सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करती है।

दशहरा मेले जैसे आयोजन में भी आयोजकों, प्रशासन, कलाकारों और नगरवासियों की साझा भूमिका होती है। ऐसे में सभी के सहयोग से ही परंपरा को निरंतरता मिलती है और आयोजन सफल बनता है।

रामायण की नृत्य-नाटिका ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

मेले के पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहा। नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में लखनऊ के नित्यांजलि फाउंडेशन के कलाकारों ने रामायण पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। रागिनी श्रीवास्तव के निर्देशन में कलाकारों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों को नृत्य और अभिनय के माध्यम से मंच पर उतारा।

प्रस्तुति में सीता स्वयंवर, श्रीराम का वनगमन, रावण वध और श्रीराम के राजतिलक जैसे प्रसंग शामिल रहे। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को धार्मिक कथा से जोड़ा और सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया।

रामायण के इन प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, धैर्य और धर्म जैसे मूल्यों को भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

गणमान्य लोगों का हुआ सम्मान

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान राजकुमार त्रिवेदी एडवोकेट, पूर्व सभासद शिवकांत मिश्रा और आचार्य अजय शास्त्री को शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े लोगों ने अतिथियों और सम्मानित व्यक्तियों की उपस्थिति में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम में सीओ सिटी महक शर्मा, मेलाधिकारी समरा सईद, सभासदों, नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, लखीमपुर खीरी के ऐतिहासिक दशहरा मेले का शुभारंभ धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ। पांच पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाने में नगरवासियों की सहभागिता महत्वपूर्ण रही। वहीं, रामायण की नृत्य-नाटिका ने पहले दिन के आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

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