मथुरा में कांग्रेस की प्रेस वार्ता: आबिद कश्मीरी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा इस्तीफा, SIR पर उठाए सवाल
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा, 25 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मथुरा में जिला कांग्रेस कमेटी के सेठबाड़ा स्थित कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में कथित विसंगतियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मथुरा पर्यवेक्षक आबिद कश्मीरी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर, पूर्व मंत्री पंडित श्याम सुंदर शर्मा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यामिनी रमन आचार्य समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान नेताओं ने कहा कि मताधिकार की सुरक्षा केवल राजनीतिक दलों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक पात्र नागरिक के संवैधानिक अधिकार और लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा विषय है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
आबिद कश्मीरी ने कहा कि कांग्रेस लगातार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, कथित फर्जी और डुप्लीकेट प्रविष्टियों तथा चुनावी आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने वीवीपैट की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग के कामकाज पर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
उन्होंने कहा कि इन सवालों का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी या आरोपों को खारिज करने से नहीं हो सकता। इसके लिए तथ्यों, सत्यापन योग्य आंकड़ों और संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को ऐसे आंकड़े उपलब्ध कराने चाहिए, जिनकी स्वतंत्र रूप से जांच की जा सके।
कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम नागरिक भी चुनावी प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
राहुल गांधी के विश्लेषण का दिया हवाला
प्रेस वार्ता के दौरान आबिद कश्मीरी ने राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत किए गए चुनावी आंकड़ों और विश्लेषणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 39 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जबकि इससे पहले के पांच वर्षों में 32 लाख मतदाता जुड़े थे।
कांग्रेस की ओर से इन आंकड़ों की पारदर्शी जांच की मांग की गई। कश्मीरी ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित आंकड़े मशीन-पठनीय और उपयोग योग्य डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि राजनीतिक दल और नागरिक अपने स्तर पर उनका विश्लेषण कर सकें।
उन्होंने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा इलाके का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को प्रस्तुत अपने विश्लेषण में डुप्लीकेट प्रविष्टियों और फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग से 1,00,250 वोट प्रभावित होने का आरोप लगाया था।
हालांकि, प्रेस वार्ता में उठाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के पक्ष का परीक्षण आवश्यक है।
हरियाणा और कर्नाटक में भी अनियमितताओं का आरोप
आबिद कश्मीरी ने कहा कि कांग्रेस ने हरियाणा और कर्नाटक के आलंद क्षेत्र में भी मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित प्रयासों को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
उन्होंने मांग की कि आयोग इस संबंध में विस्तृत जानकारी डिजिटल प्रारूप में सार्वजनिक करे। साथ ही, मतदाता सूची में किए गए प्रमुख बदलावों का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे किसी भी संभावित विसंगति की जांच की जा सके।
कश्मीरी ने सितंबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आंतरिक आपत्तियों को भी सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर पारदर्शिता रहने से जनता का भरोसा मजबूत होगा। इन दावों और रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
SIR प्रक्रिया पर जताई चिंता
प्रेस वार्ता में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। आबिद कश्मीरी ने दावा किया कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को प्रशासनिक जटिलताओं के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस नेता के अनुसार, मतदाता सूची में नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट लिखित सूचना दी जानी चाहिए। इसके अलावा, प्रभावित नागरिकों को अपना पक्ष रखने और नाम दोबारा जुड़वाने के लिए निष्पक्ष अपील का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल होना लोकतांत्रिक भागीदारी की बुनियादी शर्त है। इसलिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया में निष्पक्षता, स्पष्ट नियम और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने रखीं आठ प्रमुख मांगें
आबिद कश्मीरी ने प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की ओर से आठ प्रमुख मांगें सामने रखीं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग।
- SIR प्रक्रिया को तत्काल स्थगित करने की मांग।
- हटाए गए 13.3 करोड़ नामों को मतदाता सूची में बहाल करने की मांग।
- मतदाता सूची की विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच।
- मतदाता सूचियों में किए गए सभी प्रमुख बदलावों का पूर्ण खुलासा।
- राजनीतिक दलों को डिजिटल और उपयोग योग्य प्रारूप में आंकड़े उपलब्ध कराना।
- किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे स्पष्ट लिखित सूचना देना।
- प्रभावित नागरिकों को नाम बहाली के लिए निष्पक्ष अपील का अवसर प्रदान करना।
कांग्रेस ने कहा कि इन मांगों का उद्देश्य मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। पार्टी ने इस मुद्दे को अपने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान से जोड़ते हुए नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
जिला कांग्रेस के पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रेस वार्ता का संचालन जिला महासचिव मनोज गौड़ ने किया। इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विक्रम वाल्मीकि, राजन पाठक, जिला उपाध्यक्ष आदित्य तिवारी, केके गौतम, बालवीर प्रधान, पुनीत बघेल, रवि वाल्मीकि, रमेश कश्यप, प्रवीण ठाकुर, गीता दिवाकर, ठाकुर भगवान सिंह, दीपक सिंह, निशू यादव, अंशु श्रीवास्तव, डॉ. अशोक सैनी, गजानंद चतुर्वेदी, अनिल खरे, अशोक वाल्मीकि, विक्रम सिंह, करण वाल्मीकि, सुरेश शर्मा और राजेश कुमार सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
अंत में आबिद कश्मीरी ने कहा कि वोट केवल मतदाता सूची में दर्ज एक प्रविष्टि नहीं, बल्कि नागरिक की आवाज और लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।

