कानपुर में कला कुंज के डांडिया-गरबा महोत्सव में 200 महिलाओं ने बिखेरे रंग, संस्कृति और प्रतिभा का दिखा संगम
रिपोर्ट – अनुग्रह देवी
कानपुर: शहर में कला, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कला कुंज संस्था की ओर से भव्य डांडिया एवं गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। संस्था की फाउंडर डॉ. राखी बाजपेई के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 200 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को रंगीन और आकर्षक बना दिया। संगीत की धुनों पर थिरकते कदमों और डांडिया की खनक के बीच भारतीय लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।
इस महोत्सव में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। वहीं, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए लगाए गए स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।
विशिष्ट अतिथि ने किया महोत्सव का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि एवं सुप्रसिद्ध फूड ब्लॉगर नलिनी जी ने किया। इसके पश्चात कला कुंज संस्था की फाउंडर डॉ. राखी बाजपेई और को-फाउंडर डॉ. विजयलक्ष्मी ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान उपस्थित अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए महिलाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
इसके अलावा, सुप्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती भारती त्रिपाठी ने वरिष्ठ नागरिक के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम के सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाया। उनकी उपस्थिति से आयोजन में अनुभव, कला और परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
पारंपरिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
डांडिया-गरबा महोत्सव के दौरान नृत्य और संगीत से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नटराज ग्रुप की संस्थापिका शीला सिंह के कलाकारों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कलाकारों की प्रस्तुति में पारंपरिक नृत्य शैली, लय और भावों का सुंदर संयोजन देखने को मिला।
वहीं, श्रीमती अर्चना त्रिपाठी, श्रीमती पूनम गुप्ता, डॉ. सोहिनी स्नेहा, पूजा, अनामिका और प्रज्ञा सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को प्रभावित किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ डांडिया और गरबा की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के उत्साह ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ नए लोगों से जुड़ने और आपसी सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए स्टॉल
महोत्सव की एक प्रमुख विशेषता हस्तनिर्मित उत्पादों और महिला उद्यमिता से जुड़े स्टॉल रहे। इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को अपने हुनर, रचनात्मक विचारों और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। हस्तनिर्मित वस्तुओं के जरिए महिला प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक क्षमता और उद्यमशीलता का परिचय दिया।
इसके साथ ही, इस पहल ने महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। ऐसे मंच महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने, संभावित ग्राहकों तक पहुंचने और अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
आज के समय में महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल सामाजिक भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और अपनी प्रतिभा के आधार पर पहचान बनाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दृष्टि से कला कुंज संस्था की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ महिला उद्यमिता को स्थान देना आयोजन का एक सराहनीय पक्ष रहा।
महिलाओं और बच्चों की प्रतिभा को मंच देना उद्देश्य: डॉ. राखी बाजपेई
कला कुंज संस्था की फाउंडर डॉ. राखी बाजपेई ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की प्रतिभाओं को पहचान दिलाना तथा उन्हें अपनी कला और रचनात्मकता प्रदर्शित करने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और प्रतिभागियों के आत्मविश्वास को मजबूत बनाने में भी सहायक होते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था भविष्य में कला, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण को समर्पित कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी। उनका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां महिलाएं और बच्चे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
डॉ. राखी बाजपेई के अनुसार, जब महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलते हैं, तो वे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आगे बढ़ती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी योगदान देती हैं। इस प्रकार, कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम बन सकते हैं।
सहयोगियों के प्रयासों से सफल हुआ आयोजन
महोत्सव को सफल बनाने में आयोजन से जुड़े सदस्यों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में श्रीमती निधि ने व्यवस्थापक के रूप में अहम जिम्मेदारी निभाई। वहीं, खुशबू दुबे, सलोनी और उर्वशी ने आयोजन की विभिन्न गतिविधियों में सहयोग किया।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. राखी बाजपेई ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, कलाकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में भाग लेने वाली महिलाओं के उत्साह और सहयोग की सराहना की।
कुल मिलाकर, करीब 200 महिलाओं की सहभागिता वाला कला कुंज का डांडिया-गरबा महोत्सव सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, महिला प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया। संगीत, नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी ने कार्यक्रम को विशेष बनाया। साथ ही, इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जब महिलाओं को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए उचित मंच मिलता है, तो उनकी प्रतिभा को नई पहचान और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस तरह कला कुंज संस्था का यह प्रयास कानपुर में सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के विचार को आगे बढ़ाने वाला आयोजन रहा।

