यूपी में 10 नदियां उफान पर, 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में, काशी-कानपुर में बढ़ी मुश्किल
Digital UP News Desk
वाराणसी: पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में गंगा, यमुना और शारदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 10 नदियां उफान पर हैं और 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। इनमें फर्रुखाबाद सबसे अधिक प्रभावित जिलों में है, जहां करीब 49 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की बात सामने आई है।
वहीं, वाराणसी में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। कई छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, कानपुर में गंगा चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने से नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ गई है। उन्नाव में भी गंगा का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की खबर है।
हालांकि, प्रदेश के कई शहरों में फिलहाल धूप भी निकल रही है, लेकिन नदियों के बढ़ते जलस्तर और पहाड़ों में हो रही बारिश के कारण प्रशासन की निगाहें जलस्तर पर बनी हुई हैं। हाल के दिनों में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति सामने आई है।
फर्रुखाबाद में सबसे ज्यादा गांव प्रभावित
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर फर्रुखाबाद जिले में दिखाई दे रहा है। यहां करीब 49 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी किनारे कटान का खतरा भी बढ़ता है। हाल की रिपोर्टों में फर्रुखाबाद में गंगा के कटान से मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
ऐसे में ग्रामीणों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
काशी में घाटों तक पहुंचा गंगा का पानी
वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर ऐतिहासिक घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंचने के कारण लोगों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई छोटे मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।
हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। पानी शवदाह स्थल तक पहुंचने के कारण ऊपरी सीढ़ियों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इससे लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग रहा है।
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के दौरान वाराणसी के घाटों पर ऐसी स्थिति पहले भी सामने आती रही है। वर्ष 2025 में भी गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण घाटों और शवदाह स्थलों पर व्यवस्थाएं प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
कानपुर में चेतावनी बिंदु के करीब गंगा
कानपुर में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में चिंता बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पांच से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कुछ इलाकों में बच्चों को नाव के जरिए स्कूल जाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा सैकड़ों बीघा कृषि भूमि के जलमग्न होने की बात सामने आई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि लंबे समय तक पानी खेतों में जमा रहने पर फसलों को नुकसान हो सकता है।
कानपुर में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण पहले भी कई मोहल्लों और गांवों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है। ऐसे समय में स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाती है।
उन्नाव में कॉलोनियों तक पहुंचा पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर उन्नाव के निचले इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। कई कॉलोनियों में पानी पहुंचने की बात सामने आई है। कुछ स्थानों पर लोगों को घरों की छतों पर रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
गलियों में पानी भरने के कारण आवागमन प्रभावित है और नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन, भोजन, पीने के पानी और जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करना होती है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
लखीमपुर-खीरी में शारदा नदी का कटान
लखीमपुर-खीरी में शारदा नदी का जलस्तर और कटान भी चिंता का विषय बना हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नदी के कटान की वजह से अब तक करीब 70 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है।
नदी का कटान केवल खेतों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि लंबे समय में नदी किनारे बसे गांवों और बुनियादी ढांचे के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में जलस्तर के साथ-साथ कटान की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
रायबरेली में घर में घुसा लंबा सांप
बाढ़ और जलभराव के बीच रायबरेली से एक अलग घटना भी सामने आई है। यहां एक घर में करीब पांच फीट लंबा सांप घुस गया। बारिश और जलभराव के दौरान सांप तथा अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की आशंका बढ़ जाती है।
ऐसे में ग्रामीणों और शहर के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी सांप या अन्य वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे खुद पकड़ने के बजाय संबंधित विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना बेहतर होता है।
48 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रदेश के 48 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस समय उत्तर प्रदेश के कई शहरों में धूप भी निकली हुई है। यही वजह है कि मौसम और नदियों की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नजर आ रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने के बाद उसका असर मैदानी इलाकों की नदियों में जलस्तर बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है। रायबरेली में भी अगस्त की शुरुआत में पहाड़ों पर भारी बारिश के बाद गंगा के तेजी से बढ़ने और चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसलिए केवल किसी शहर में धूप निकलने से बाढ़ का खतरा समाप्त नहीं माना जा सकता। नदी का जलस्तर, बैराजों से छोड़ा गया पानी और ऊपरी क्षेत्रों में बारिश जैसे कई कारक मिलकर स्थिति को प्रभावित करते हैं।
प्रशासन की निगरानी जरूरी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ-साथ लोगों को सुरक्षित रखने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। खासतौर पर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
इसके अलावा बच्चों को तेज बहाव वाले पानी और नदी के आसपास जाने से रोकना जरूरी है। जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के तारों और खुले मैनहोल से भी सावधानी बरतनी चाहिए।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा, यमुना और शारदा समेत 10 नदियों के उफान पर होने और 80 से अधिक गांवों के प्रभावित होने की स्थिति में आने वाले दिनों में जलस्तर पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, फर्रुखाबाद, वाराणसी, कानपुर, उन्नाव और लखीमपुर-खीरी समेत कई जिलों में बाढ़ और जलस्तर बढ़ने का असर दिखाई दे रहा है। वहीं, 48 जिलों में बारिश के अलर्ट के बीच प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम साफ होने के बावजूद नदियों में पानी बढ़ने का सिलसिला जारी रह सकता है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी बदलाव पर प्रशासन की नजर बनी रहना जरूरी है।

