इटावा में सपा नेता का सदर विधायक पर आरोप, धमकी और फर्जी मुकदमे का दावा; सोशल मीडिया पर लगाई न्याय की गुहार
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा में समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के जिला प्रमुख रेशु चौधरी ने भाजपा की सदर विधायक सरिता भदौरिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा नेता का दावा है कि उनके गांव पृथ्वीपुर में विधायक के लंबे कार्यकाल के दौरान विकास कार्य नहीं कराए गए। वहीं, भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग को लेकर विधायक से मुलाकात करने पहुंचे रेशु चौधरी ने कथित तौर पर उन्हें धमकाए जाने का आरोप लगाया है।
रेशु चौधरी के आरोपों के मुताबिक, इसके बाद उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराने और देर रात घर पर पुलिस की दबिश दिलवाने जैसी कार्रवाई की गई। सपा नेता का कहना है कि लगातार पुलिस कार्रवाई के डर के कारण वह अपने परिवार के साथ गांव से बाहर चले गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर पूरे मामले में न्याय की गुहार लगाई है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विधायक सरिता भदौरिया या पुलिस प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
गांव में विकास कार्य नहीं होने का दावा
पृथ्वीपुर गांव के निवासी सपा नेता रेशु चौधरी ने आरोप लगाया कि सदर विधायक सरिता भदौरिया के करीब साढ़े नौ साल के कार्यकाल में उनके गांव में एक रुपये का भी विकास कार्य नहीं कराया गया। उनका कहना है कि गांव की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।
रेशु चौधरी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में सड़क, नाली, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार उठते रहे हैं। ऐसे में उन्होंने गांव के लोगों की मांगों को जनप्रतिनिधि तक पहुंचाने का प्रयास किया।
सपा नेता के मुताबिक, इसी क्रम में उन्होंने गांव में भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग भी रखी। उनका दावा है कि इसी मांग को लेकर वह भाजपा विधायक से मिलने पहुंचे थे।
भगवान परशुराम की प्रतिमा की मांग को लेकर विवाद का आरोप
रेशु चौधरी ने आरोप लगाया कि भगवान परशुराम की प्रतिमा लगवाने की मांग को लेकर विधायक से मुलाकात के दौरान उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। सपा नेता के अनुसार, वह अपनी मांग को लेकर जनप्रतिनिधि के सामने बात रखना चाहते थे, लेकिन बातचीत के बाद मामला विवाद की स्थिति तक पहुंच गया।
हालांकि, मुलाकात के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इस संबंध में विधायक पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का लगाया आरोप
सपा नेता रेशु चौधरी ने आरोप लगाया कि विधायक से विवाद के बाद उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि देर रात पुलिस उनके घर पहुंची और दबिश दी गई।
रेशु चौधरी का कहना है कि लगातार पुलिस कार्रवाई के कारण उनके परिवार में डर का माहौल बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के चलते उन्हें परेशान किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस की ओर से नहीं की गई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में पुलिस की ओर से क्या आधार बताया गया है।
परिवार के साथ गांव से बाहर जाने का दावा
सपा नेता ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई से परेशान होकर उन्हें अपने परिवार के साथ गांव से बाहर जाना पड़ा। उनका कहना है कि वह अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसी वजह से फिलहाल गांव में नहीं रह रहे हैं।
रेशु चौधरी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए पूरे मामले की जानकारी साझा की। वीडियो में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें न्याय दिलाने की अपील की है।
उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक मतभेद को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि यदि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोष साबित होने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस और विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
मामला सामने आने के बाद अब पुलिस प्रशासन और भाजपा विधायक सरिता भदौरिया के पक्ष से आने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि पुलिस के पास सपा नेता के खिलाफ दर्ज मुकदमों या कार्रवाई से संबंधित कोई तथ्य हैं, तो उनकी जानकारी सामने आने से विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वहीं, विधायक पक्ष यदि सपा नेता के आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखता है तो दोनों पक्षों के दावों की तुलना करना संभव होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से सपा नेता रेशु चौधरी की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
राजनीतिक आरोपों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग
इटावा की इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी को भी चर्चा में ला दिया है। एक ओर सपा नेता ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए आधिकारिक दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयान अहम होंगे।
ऐसे मामलों में आरोपों को अंतिम तथ्य मानने के बजाय निष्पक्ष जांच के आधार पर निष्कर्ष निकालना जरूरी होता है। यदि सपा नेता के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्तर पर कार्रवाई की मांग उठ सकती है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो जांच के आधार पर स्थिति साफ हो जाएगी।
फिलहाल रेशु चौधरी ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए अपनी बात जनता और प्रशासन तक पहुंचाई है। उन्होंने न्याय और सुरक्षा की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की जांच को लेकर क्या कदम उठाता है और भाजपा विधायक की ओर से इस मामले में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

