कानपुर में पुस्तक समीक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला, राजेंद्र राव ने छात्राओं को बताए समीक्षा लेखन के टिप्स
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर। मैकरॉबर्टगंज स्थित दयानन्द वूमेन्स ट्रेनिंग कॉलेज के सभागार में पुस्तक समीक्षा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में दैनिक जागरण के साहित्य संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र राव मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पुस्तक समीक्षा के उद्देश्य, उसकी उपयोगिता और समीक्षा लेखन के दौरान वस्तुनिष्ठता बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यशाला में महाविद्यालय की बीएड छात्राओं, शिक्षकों और अन्य उपस्थित प्रतिभागियों ने साहित्य से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तक समीक्षा की प्रक्रिया से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें साहित्यिक अध्ययन और विश्लेषण की क्षमता को विकसित करना रहा।
पुष्पांजलि के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता राजेंद्र राव और महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रत्ना गुप्ता द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करके किया गया। इसके बाद बीएड छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। छात्राओं की प्रस्तुति के बाद कार्यक्रम में साहित्यिक एवं शैक्षणिक वातावरण और अधिक प्रभावी हुआ।
इसके पश्चात बीएड छात्राओं ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य वक्ता और अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत गीत के माध्यम से छात्राओं ने कार्यक्रम में आए अतिथियों के प्रति सम्मान और अभिनंदन व्यक्त किया।
वरिष्ठ प्रवक्ता ने कराया मुख्य वक्ता का परिचय
कार्यक्रम की अगली कड़ी में महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. विभा दुबे ने मुख्य वक्ता राजेंद्र राव का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने उनके साहित्यिक अनुभव और लेखन क्षेत्र में योगदान से प्रतिभागियों को परिचित कराया।
इसके बाद महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रत्ना गुप्ता ने मुख्य वक्ता राजेंद्र राव का शॉल भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की ओर से उनका स्वागत करते हुए कार्यशाला के आयोजन की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया।
राजेंद्र राव ने बताया वस्तुनिष्ठ समीक्षा का महत्व
मुख्य वक्ता राजेंद्र राव ने अपने संबोधन में पुस्तक समीक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समीक्षा वस्तुनिष्ठ होनी चाहिए। उनके अनुसार किसी पुस्तक की समीक्षा करते समय लेखक या रचना के प्रति व्यक्तिगत पसंद अथवा नापसंद को समीक्षा पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
उन्होंने प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया कि एक अच्छी समीक्षा केवल पुस्तक की कहानी या विषय-वस्तु का संक्षिप्त विवरण नहीं होती, बल्कि उसमें रचना के विभिन्न पक्षों का संतुलित अध्ययन और विश्लेषण भी शामिल होता है। समीक्षा लिखते समय पुस्तक की भाषा, विषय, प्रस्तुति, लेखकीय दृष्टिकोण और पाठकों पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे पहलुओं को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक समीक्षा के माध्यम से पाठकों को किसी रचना के बारे में उपयोगी जानकारी मिलती है। इसलिए समीक्षा लिखने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह अपनी बात स्पष्ट, संतुलित और तथ्यपरक तरीके से रखे।
छात्राओं के लिए उपयोगी रहा कार्यशाला का आयोजन
एक दिवसीय कार्यशाला में बीएड छात्राओं को पुस्तक पढ़ने और उसके विभिन्न पक्षों को समझने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिली। साथ ही, साहित्यिक रचनाओं को केवल पढ़ने के बजाय उनके विषय और विचारों का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उन्हें पाठ्यक्रम से अलग विषयों पर विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर मिलता है। इसके अलावा, विद्यार्थियों में पढ़ने, लिखने और अपने विचारों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता को भी बढ़ावा मिलता है।
कार्यशाला के दौरान साहित्य और शिक्षा के बीच संबंध को लेकर भी प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। पुस्तक समीक्षा जैसे विषय के माध्यम से छात्राओं को भाषा की समझ विकसित करने के साथ-साथ तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाने का अवसर मिला।
प्राचार्या ने किया संबोधन, संध्या मिश्रा ने जताया आभार
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रत्ना गुप्ता ने अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ साहित्यिक और रचनात्मक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को नए विषयों को समझने और विशेषज्ञों से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्रवक्ता संध्या मिश्रा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों और छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यशाला को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।
इसके बाद कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय का सभागार साहित्य, शिक्षा और रचनात्मक विचारों से जुड़े संवाद का केंद्र बना रहा। एक दिवसीय कार्यशाला ने छात्राओं को पुस्तक समीक्षा के साथ-साथ वस्तुनिष्ठ लेखन और साहित्यिक विश्लेषण की बारीकियों को समझने का अवसर दिया।

