मेरठ में धनतेरस पर निकली बजरंगबली की 48वीं भव्य शोभायात्रा, श्रीराम के जयकारों से गूंजा शहर

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रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: धनतेरस के पावन अवसर पर मेरठ में धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री बजरंगबली मित्र मंडल की ओर से हर वर्ष की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी भगवान हनुमान की 48वीं भव्य शोभायात्रा धूमधाम और उत्साह के साथ निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल आकर्षक झांकियों, बैंड-बाजों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने शहरवासियों का मन मोह लिया। वहीं, पूरे आयोजन के दौरान श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से पुराना शहर भक्तिमय नजर आया।

इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी शामिल हुए। शोभायात्रा के मार्ग पर जगह-जगह लोगों ने इसका स्वागत किया और धार्मिक झांकियों के दर्शन किए। खास बात यह रही कि इस बार शोभायात्रा में करीब 40 डोले शामिल किए गए, जिनमें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेशों से जुड़ी प्रस्तुतियां देखने को मिलीं।

48 वर्षों से धनतेरस पर निकाली जा रही शोभायात्रा

श्री बजरंगबली मित्र मंडल के संरक्षक नवीन अरोड़ा ने शोभायात्रा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन पिछले 48 वर्षों से लगातार धनतेरस के दिन किया जा रहा है। समय के साथ इस धार्मिक परंपरा का स्वरूप और भव्य होता गया है। प्रत्येक वर्ष शहर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

नवीन अरोड़ा के अनुसार, इस बार शोभायात्रा की 48वीं वर्षगांठ थी। इसके लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। आयोजन में लगभग 40 डोले, बैंड-बाजे, आकर्षक झांकियां और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल की गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास भी किया गया।

उन्होंने बताया कि शोभायात्रा का उद्देश्य वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा को जीवित रखना और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक विरासत से जोड़ना है।

खंदक बाजार से शुरू होकर पुराने शहर के प्रमुख बाजारों से गुजरी यात्रा

धनतेरस पर निकाली गई यह भव्य शोभायात्रा पुराने मेरठ शहर के खंदक बाजार से शुरू हुई। इसके बाद यात्रा सुभाष बाजार, कोतवाली, गुदरी बाजार, लाला का बाजार, सराफा बाजार और शीश महल सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।

इसके बाद शोभायात्रा वापस खंदक बाजार के मोड़ पर पहुंचकर संपन्न हुई। आयोजकों के मुताबिक, यह धार्मिक आयोजन देर रात तक चलता है और सुबह करीब चार बजे तक श्रद्धालु इसमें शामिल रहते हैं।

वहीं, यात्रा के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शोभायात्रा देखने पहुंचे। जगह-जगह भगवान के जयकारे लगाए गए और लोगों ने झांकियों का स्वागत किया।

श्रीराम दरबार से महाकाल तक दिखीं आकर्षक धार्मिक झांकियां

इस बार की शोभायात्रा में कई ऐसी झांकियां शामिल की गईं, जिन्होंने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इनमें श्रीराम दरबार की झांकी प्रमुख रही। इसके अलावा राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी ने भी लोगों को आकर्षित किया।

वहीं, महिषासुर वध की प्रस्तुति के माध्यम से देवी शक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। महाकाल की मनमोहक झांकी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही काली माता की झांकी और अन्य धार्मिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को भक्ति के रंग में रंग दिया।

झांकियों में कलाकारों ने अपने अभिनय और प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों को जीवंत करने का प्रयास किया। यही वजह रही कि शोभायात्रा देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सामाजिक संदेश देने वाली झांकियां भी बनीं आकर्षण

धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ इस बार शोभायात्रा में सामाजिक जागरूकता को भी विशेष स्थान दिया गया। आयोजकों ने ऐसी झांकियां शामिल कीं, जिनके माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया।

शराब के सेवन से होने वाले नुकसान पर आधारित विशेष झांकी के जरिए नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। इसके अलावा व्यंग्यात्मक प्रस्तुति के रूप में ‘नीला ड्रम’ भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा।

इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज को सोचने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी था। इस प्रकार शोभायात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपने आयोजन का हिस्सा बनाया।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

शहर के पुराने और व्यस्त बाजारों से गुजरने वाली इस शोभायात्रा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाएं की गईं। आयोजन के दौरान सुरक्षा और यातायात प्रबंधन का ध्यान रखा गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

इसके साथ ही हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद शोभायात्रा को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया। श्रद्धालुओं में भगवान हनुमान के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बने।

धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी शोभायात्रा

मेरठ में धनतेरस के अवसर पर निकलने वाली बजरंगबली की यह शोभायात्रा अब शहर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हो चुकी है। 48 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का संदेश देता है।

कुल मिलाकर, इस बार भी श्री बजरंगबली मित्र मंडल की शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भक्ति का वातावरण बनाया। आकर्षक झांकियों, धार्मिक जयकारों और सामाजिक संदेशों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर मेरठ की धार्मिक परंपरा को नई पहचान दी।

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