कृष्ण जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, प्रतिनिधित्व का मामला हाईकोर्ट भेजने की संभावना

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर महत्वपूर्ण संकेत सामने आए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मौखिक तौर पर संकेत दिया कि भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों की ओर से मुकदमा लड़ने की प्रतिनिधि क्षमता से जुड़े प्रश्न को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया और मामले की सुनवाई करीब दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई।

इस घटनाक्रम को श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट का बुधवार का रुख फिलहाल प्रतिनिधित्व के प्रक्रियात्मक प्रश्न तक सीमित है। इससे मूल विवादित स्थल के स्वामित्व, धार्मिक अधिकार या अन्य मूल दावों पर किसी तरह का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

प्रतिनिधित्व के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति

हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की मुख्य आपत्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट के जुलाई 2025 के उस आदेश को लेकर रही, जिसमें सूट नंबर 17 के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में सूट नंबर 17 में दाखिल आवेदन को स्वीकार करते हुए वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की ओर से प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। यह आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता यानी CPC के Order 1 Rule 8 से जुड़ा था।

इसी आदेश को सूट नंबर एक के वादियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब हाईकोर्ट प्रतिनिधित्व के इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार कर रहा था, तब सूट नंबर एक के वादियों को स्पष्ट रूप से नोटिस दिया जाना चाहिए था।

पीठ की मौखिक टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि सूट नंबर 17 में दाखिल मूल आवेदन का विषय कुछ अलग था, जबकि हाईकोर्ट ने उससे आगे जाकर प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर फैसला किया। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह सवाल उठा कि क्या संबंधित पक्षों को पर्याप्त अवसर दिया गया था।

हाईकोर्ट वापस जा सकता है मामला

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद संभावना जताई जा रही है कि प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रक्रिया को दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष भेजा जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि हाईकोर्ट संबंधित पक्षों को नोटिस देकर उनकी दलीलें सुने और इसके बाद प्रतिनिधि क्षमता के प्रश्न पर कानून के अनुसार दोबारा निर्णय ले।

हालांकि, अभी यह केवल संभावित दिशा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस संबंध में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। इसलिए अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी और तभी स्पष्ट होगा कि शीर्ष अदालत स्वयं इस मुद्दे पर आगे निर्णय लेती है या प्रक्रिया पूरी करने के लिए मामले को हाईकोर्ट वापस भेजती है।

महेंद्र प्रताप सिंह बोले- मूल वाद पर जारी रहेगी कानूनी लड़ाई

हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने इस घटनाक्रम को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि प्रतिनिधित्व का प्रश्न मुकदमे की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ विषय है और इसे मूल विवाद से अलग करके देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि प्रतिनिधि क्षमता को लेकर कोई प्रक्रियात्मक कमी सामने आती है, तो उसे कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत दूर किया जा सकता है। उनके अनुसार, इससे श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मूल दावों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता।

महेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, मूल वाद में पक्षकारों के अधिकार, दावे और उनके समर्थन में प्रस्तुत किए जाने वाले कानूनी आधारों का परीक्षण न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा। इसलिए मौजूदा सुनवाई को केवल प्रतिनिधित्व के प्रश्न के संदर्भ में देखना उचित होगा।

विवाद से जुड़े 18 मुकदमे लंबित

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित कुल 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित बताए जाते हैं। इनमें से 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही है, जबकि कुछ अन्य मुकदमे अलग सूचीबद्ध हैं।

सूट नंबर 17 भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और अन्य की ओर से ‘नेक्स्ट फ्रेंड’ के माध्यम से दाखिल किया गया था। जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।

उस समय हाईकोर्ट के आदेश के बाद सूट नंबर 17 को प्रतिनिधि मुकदमे के तौर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आदेश में Order 1 Rule 8 CPC के तहत आवश्यक नोटिस की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया था।

इसके बाद प्रतिनिधित्व के इसी पहलू को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब शीर्ष अदालत की सुनवाई ने इस प्रश्न को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

समझौते की संभावना पर भी हुई चर्चा

पिछली सुनवाई में विवादित स्थल को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच संभावित समझौते पर बातचीत की बात अदालत के समक्ष रखे जाने की जानकारी सामने आई थी। बुधवार की सुनवाई में पीठ ने अन्य संबंधित पक्षों से भी इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते से जुड़ी बातचीत किस स्तर तक पहुंची है। ऐसे में इस विषय पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अगली न्यायिक कार्यवाही और पक्षकारों के रुख का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

बुधवार की सुनवाई के बाद अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। करीब दो सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस प्रक्रिया संबंधी विवाद का निपटारा करेगा या फिर संबंधित पक्षों को सुनने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाएगा।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर यह कहना उचित होगा कि अदालत ने प्रतिनिधित्व के तरीके और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए जाने से जुड़े पहलू पर सवाल उठाया है। यह किसी भी पक्ष के मूल दावे पर फैसला नहीं है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है और इससे जुड़े अलग-अलग मुकदमों में विभिन्न कानूनी प्रश्नों पर सुनवाई चल रही है। ऐसे में बुधवार की सुनवाई का महत्व मुख्य रूप से इस बात में है कि प्रतिनिधि क्षमता से जुड़े प्रश्न की प्रक्रिया आगे किस मंच पर तय होती है। अब अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा को स्पष्ट कर सकता है।

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