यूपी में बाढ़ का खतरा बढ़ा, गंगा-यमुना समेत 10 नदियां उफान पर; 16 जिलों में चेतावनी
Digital UP News Desk
लखनऊ: पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही तेज बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। गंगा, यमुना और शारदा समेत प्रदेश की कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते नदी किनारे बसे जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वाराणसी से लेकर उन्नाव, फर्रुखाबाद, बिजनौर, मथुरा और आगरा तक कई इलाकों में नदी का पानी तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं, मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालिया मौसम अपडेट के अनुसार उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
वाराणसी में गंगा का बढ़ा जलस्तर
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर स्थिति बदल गई है। नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। शहर के 84 घाटों को जोड़ने वाले कई रास्ते भी पानी में डूब गए हैं। इसके अलावा, घाटों के आसपास स्थित कई छोटे मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं।
मणिकर्णिका घाट स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी बढ़ते जलस्तर की वजह से पानी में डूब गया है। करीब 50 फुट ऊंचे इस मंदिर का आधे से अधिक हिस्सा पानी में समा चुका है और फिलहाल ऊपर का गुंबद ही दिखाई दे रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों का पारंपरिक स्वरूप भी प्रभावित हुआ है।
हरिश्चंद्र घाट पर भी नदी का पानी शवदाह स्थल तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
उन्नाव में खतरे के निशान के करीब गंगा
उन्नाव में भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने से तटीय इलाकों में चिंता बढ़ गई है। कई कॉलोनियों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने की वजह से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ प्रभावित इलाकों में गलियों के भीतर पानी भरने से नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
फर्रुखाबाद और बिजनौर के गांवों में बाढ़ का असर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर फर्रुखाबाद और बिजनौर में भी दिखाई दे रहा है। दोनों जिलों के कई गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। नदी के पानी के बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, खेती और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 31 घर गंगा नदी के कटाव की वजह से नदी में समा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित आवास और दैनिक जरूरतों की चुनौती खड़ी हो गई है।
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चिंता तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर रहती है। इसलिए प्रशासन को राहत और बचाव व्यवस्था के साथ-साथ प्रभावित गांवों में जरूरी सामग्री पहुंचाने पर भी ध्यान देना पड़ रहा है।
मथुरा-आगरा में यमुना का जलस्तर बढ़ा
गंगा के साथ-साथ यमुना नदी भी कई इलाकों में उफान पर है। मथुरा और आगरा में यमुना का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। इससे नदी किनारे के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी असर पड़ा है।
वृंदावन में केशीघाट का परिक्रमा मार्ग जलमग्न हो गया है। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। नदी के आसपास पानी बढ़ने के कारण लोगों से अनावश्यक रूप से घाटों की ओर नहीं जाने की अपील की जा रही है।
इस बीच, प्रशासन की ओर से जलस्तर की निगरानी की जा रही है। हालांकि, बारिश का दौर जारी रहने पर स्थिति में और बदलाव हो सकता है। इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
सहारनपुर में पुल के ऊपर से बह रहा पानी
सहारनपुर में शाहपुर गाड़ा नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल भी पानी की चपेट में आ गया है। तेज बहाव के बावजूद कुछ लोग नदी पार करने का प्रयास करते दिखाई दिए। ऐसे हालात में नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
बारिश के दौरान नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जाती है कि तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचें और किसी भी परिस्थिति में पानी के बीच से वाहन या पैदल निकलने का प्रयास न करें।
28 जिलों में बारिश का अलर्ट
बुधवार सुबह लखनऊ और बाराबंकी समेत प्रदेश के करीब 15 शहरों में बादल छाए रहे। हालांकि, दिन बढ़ने के साथ कुछ इलाकों में धूप निकल आई। इसके बावजूद मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।
विशेष रूप से सोनभद्र में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रदेश के 28 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट बताया गया है। इसके अलावा 16 जिलों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमानों में भी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।
मंगलवार को कई शहरों में हुई तेज बारिश
इससे पहले मंगलवार को मेरठ, संभल, बिजनौर और मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों में तेज बारिश हुई। बारिश के कारण मेरठ और संभल की गलियों तथा कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर घरों और दुकानों में भी पानी पहुंच गया।
बिजनौर में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भरने की सूचना है। वहीं, मुजफ्फरनगर में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
बारिश और जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। हालांकि, प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखने और जलनिकासी की व्यवस्था को बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इन 16 जिलों में बाढ़ की चेतावनी
मौसम विभाग ने हापुड़, बदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, बलरामपुर, बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, कौशांबी, औरैया, मथुरा और वाराणसी में बाढ़ की चेतावनी जारी की है।
इन जिलों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। साथ ही, नदी, नहर और तेज बहाव वाले जलस्रोतों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
बाढ़ और भारी बारिश की स्थिति में सबसे जरूरी है कि लोग प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को मौसम और नदी के जलस्तर की जानकारी लेते रहना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों को तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से रोकना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान जलस्तर में अचानक बदलाव हो सकता है। इसलिए केवल वर्तमान स्थिति देखकर खतरे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश मिलने पर लोगों को बिना देरी किए उनका पालन करना चाहिए।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है। गंगा और यमुना के तटीय क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव तय करेगा कि बाढ़ का असर कितना बढ़ता या घटता है। इसलिए नदी किनारे बसे जिलों में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

