चमोली में बादल फटने से बढ़ा बाढ़ का खतरा, गंगा का जलस्तर बढ़ा; कानपुर बैराज के सभी 30 गेट खोले गए
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने और भारी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर अब गंगा के मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए कानपुर जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग सतर्क हो गए हैं। स्थिति को ध्यान में रखते हुए गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं, गंगा किनारे बसे गांवों में भी प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है।
चमोली क्षेत्र में हालिया फ्लैश फ्लड के कारण स्थानीय स्तर पर नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति सामने आई है। चमोली जिले में तमक नाले के उफान से एक पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर भी सामने आई थी। ऐसे में उत्तराखंड से आने वाले अतिरिक्त जल को लेकर उत्तर प्रदेश के गंगा तटवर्ती जिलों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोले गए
कानपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बैराज पर पानी के दबाव को नियंत्रित करना और उपलब्ध जल को सुरक्षित तरीके से आगे की ओर प्रवाहित करना है। प्रशासन की ओर से गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार गंगा बैराज के अप स्ट्रीम में जलस्तर 113.490 मीटर और डाउन स्ट्रीम में 113.340 मीटर दर्ज किया गया है। यहां चेतावनी बिंदु 114 मीटर और खतरे का बिंदु 115 मीटर निर्धारित है।
इस लिहाज से बैराज का जलस्तर फिलहाल चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि बैराज के सभी गेट खोलने के साथ-साथ तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
चमोली से आने वाले पानी को लेकर सतर्कता
सिंचाई विभाग के अनुसार चमोली क्षेत्र से आने वाले अतिरिक्त गंगाजल को कानपुर क्षेत्र तक पहुंचने में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इसलिए वर्तमान जलस्तर के साथ-साथ आने वाले दिनों में संभावित बढ़ोतरी पर भी नजर रखी जा रही है।
दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद नदियों में पानी बढ़ने का प्रभाव कुछ समय बाद मैदानी इलाकों में दिखाई देता है। ऐसे में प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तटवर्ती गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
उत्तर प्रदेश के फ्लड हेजर्ड एटलस में भी गंगा के कई स्थानों को बाढ़ पूर्वानुमान और निगरानी व्यवस्था के तहत शामिल किया गया है। इनमें कानपुर समेत गंगा के कई प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।
शुक्लागंज में भी जलस्तर पर नजर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर शुक्लागंज क्षेत्र में भी निगरानी का विषय बना हुआ है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 111.110 मीटर दर्ज किया गया है।
यहां चेतावनी बिंदु 113 मीटर और खतरे का बिंदु 114 मीटर है। यानी फिलहाल जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे है। हालांकि, उत्तराखंड से अतिरिक्त पानी आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गंगा किनारे के गांवों में रहने वाले लोगों से नदी के नजदीक नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। विशेष रूप से किसानों और पशुपालकों को नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बैराजों से छोड़े गए पानी के आंकड़े
जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार विभिन्न बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। आंकड़ों के मुताबिक—
- गंगा बैराज: 5,44,373 क्यूसेक
- हरिद्वार बैराज: 1,00,460 क्यूसेक
- नरौरा बैराज: 1,24,173 क्यूसेक
इन आंकड़ों के चलते गंगा के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, बैराजों से पानी छोड़े जाने और किसी स्थान पर जलस्तर बढ़ने के बीच स्थानीय परिस्थितियों, नदी की धारा और दूरी जैसे कई कारक प्रभाव डालते हैं। इसलिए प्रशासन अलग-अलग निगरानी बिंदुओं से स्थिति का आकलन कर रहा है।
केंद्र सरकार के दस्तावेजों में भी कानपुर बैराज समेत गंगा बेसिन के विभिन्न बैराजों के डाउनस्ट्रीम जल प्रवाह और मानसून अवधि में जल प्रबंधन से जुड़े प्रावधान दर्ज हैं।
खतरे के निशान से अभी नीचे है गंगा
मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो गंगा बैराज और शुक्लागंज दोनों स्थानों पर जलस्तर संबंधित खतरे के निशान से नीचे है। गंगा बैराज पर जलस्तर 113.490 मीटर है, जबकि खतरे का बिंदु 115 मीटर है। इसी तरह शुक्लागंज में जलस्तर 111.110 मीटर है और खतरे का बिंदु 114 मीटर निर्धारित है।
इसलिए फिलहाल उपलब्ध आंकड़े सीधे तौर पर खतरे के निशान को पार करने की स्थिति नहीं दर्शाते। फिर भी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश और फ्लैश फ्लड की घटनाओं को देखते हुए आने वाले दिनों में जलस्तर में बदलाव महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रशासन की सतर्कता का मुख्य उद्देश्य यही है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी भी संभावित समस्या से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील
गंगा किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और बच्चों को भी नदी के आसपास न जाने दें। इसके अलावा पशुओं को नदी के निचले हिस्सों या संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में न बांधने की सलाह दी गई है।
वहीं, किसानों को भी अपनी फसलों और खेतों की स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा गया है। यदि जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सूचना को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही बैराज से पानी के प्रवाह और गंगा के अलग-अलग हिस्सों में जलस्तर के बदलाव को भी देखा जा रहा है।
अगले तीन दिन अहम
सिंचाई विभाग के अनुसार चमोली क्षेत्र से आने वाले अतिरिक्त पानी को कानपुर तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लग सकते हैं। ऐसे में आने वाले तीन दिन गंगा के जलस्तर की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के अनुसार गंगा बैराज और शुक्लागंज में पानी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। सभी 30 गेट खोलना भी इसी जल प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा है।
कुल मिलाकर चमोली में बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद गंगा के जलस्तर को लेकर मैदानी क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के आधार पर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पहाड़ों से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण आने वाले दिनों में जलस्तर में और बदलाव हो सकता है। इसलिए गंगा किनारे रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की सूचनाओं पर नजर रखना और सावधानी बरतना सबसे महत्वपूर्ण है।

