मेरठ में MDA की कार्रवाई का महिलाओं ने भजन से किया विरोध, मंदिर पर बुलडोजर कार्रवाई रुकी
रिपोर्ट – मनीष पाराशर
मेरठ। परतापुर क्षेत्र स्थित एयरपोर्ट एंक्लेव में निर्माणाधीन मंदिर को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। बताया गया कि प्राधिकरण की टीम बुलडोजर लेकर निर्माणाधीन मंदिर परिसर में कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं मंदिर के सामने बैठ गईं और ढोलक-मंजीरों के साथ भजन गाकर विरोध दर्ज कराया। विरोध बढ़ने के बाद MDA की टीम बिना ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए वापस लौट गई।
घटना के दौरान मौके पर स्थानीय लोगों, मंदिर समिति के सदस्यों और कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। इसके चलते कुछ समय के लिए इलाके में स्थिति संवेदनशील हो गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौके पर किसी प्रकार की हिंसक घटना की सूचना नहीं है।
मंदिर के सामने बैठकर महिलाओं ने किया विरोध
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब MDA की टीम निर्माणाधीन मंदिर परिसर में पहुंची तो महिलाओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। महिलाएं मंदिर के सामने बैठ गईं और ढोलक-मंजीरे बजाते हुए भजन गाने लगीं। इस तरह उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध किया।
धीरे-धीरे आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद मंदिर समिति से जुड़े सदस्य और स्थानीय कार्यकर्ता भी वहां मौजूद हो गए। महिलाओं द्वारा किए गए इस विरोध को स्थानीय लोगों ने ‘भजन सत्याग्रह’ का नाम दिया।
विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि धार्मिक स्थल से संबंधित किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष से बातचीत और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि MDA की टीम पर्याप्त पुलिस बल के बिना मौके पर पहुंची थी।
बिना कार्रवाई लौट गई MDA की टीम
मौके पर लोगों की बढ़ती भीड़ और विरोध के बीच MDA की टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। इसके बाद अधिकारी अपने वाहनों से वापस लौट गए। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर MDA की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि प्राधिकरण की ओर से किसी निर्माण के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित थी, तो उसके लिए पहले से पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था क्यों नहीं की गई। वहीं, धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में स्थानीय लोगों के साथ संवाद की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, इस संबंध में MDA का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए कार्रवाई के कारणों और पूर्व सूचना से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आकाश काशी ने MDA की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मौके पर मौजूद पार्षद पुत्र आकाश काशी ने MDA की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़े मामले में प्राधिकरण को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए और किसी भी विवाद की स्थिति में पहले बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
आकाश काशी के अनुसार, स्थानीय लोग मंदिर को लेकर एकजुट हैं और निर्माणाधीन मंदिर के संबंध में किसी भी कार्रवाई का विरोध करेंगे। उन्होंने प्राधिकरण से संवाद के माध्यम से मामले का समाधान निकालने की मांग की।
उनका आरोप है कि MDA के अधिकारी बिना पर्याप्त तैयारी और पुलिस बल के मौके पर पहुंचे। हालांकि, इन आरोपों पर प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
कार्रवाई की तैयारी को लेकर उठे प्रशासनिक सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। किसी निर्माण को गिराने की कार्रवाई सामान्य तौर पर प्रशासनिक प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों के समन्वय के साथ की जाती है। ऐसे में स्थानीय पुलिस बल की मौजूदगी और कार्रवाई से पहले की गई तैयारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विशेष रूप से धार्मिक स्थल से जुड़े मामलों में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की चुनौती रहती है। ऐसे मामलों में किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित दस्तावेजों, अनुमति, भूमि की स्थिति और निर्माण की वैधता जैसे पहलुओं की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होती है।
वर्तमान मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर विरोध किया। वहीं, MDA की ओर से कार्रवाई का वास्तविक आधार और प्रक्रिया क्या थी, इसका स्पष्ट विवरण आधिकारिक बयान के बाद ही सामने आ सकेगा।
शांतिपूर्ण विरोध के बाद फिलहाल टली कार्रवाई
फिलहाल महिलाओं के भजन और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद निर्माणाधीन मंदिर पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं हो सकी। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग जहां मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं प्राधिकरण की कार्रवाई से जुड़े नियम-कायदों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आगे इस मामले में MDA की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और निर्माणाधीन मंदिर से संबंधित दस्तावेजों तथा भूमि की स्थिति पर क्या जानकारी सामने आती है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि प्राधिकरण की ओर से कोई नई कार्रवाई की जाती है, तो स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और संवाद की भूमिका भी अहम रहेगी।
फिलहाल इस घटना का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि स्थानीय महिलाओं ने बिना किसी हिंसक टकराव के ढोलक और मंजीरों के साथ भजन गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद MDA की टीम कार्रवाई किए बिना वापस लौट गई। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्राधिकरण और स्थानीय पक्ष के बीच आगे बातचीत के जरिए इस मामले का क्या समाधान निकलता है।

