हरिद्वार से कांवड़ लेकर इटावा पहुंचीं दो सगी बहनें, केदारेश्वर महादेव और मुलायम सिंह यादव की समाधि पर चढ़ाया गंगाजल

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रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान 

इटावा। सावन के पावन महीने में धार्मिक आस्था और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा एक अनोखा दृश्य इटावा में देखने को मिला। हरिद्वार से कांवड़ लेकर दो सगी बहनें इटावा पहुंचीं। दोनों बहनों ने अपनी कांवड़ में लाए गंगाजल को सैफई में स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव को अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने सैफई में ही स्थित समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की समाधि पर भी गंगाजल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सैफई और मुलायम सिंह यादव से जुड़ी भावनात्मक यादों को भी सामने ला दिया। कांवड़ लेकर पहुंचीं बहनों के इस कदम की चर्चा स्थानीय स्तर पर हो रही है। उनके भाई नीतीश राजपूत ने बताया कि दोनों बहनों ने हरिद्वार से गंगाजल लेकर इटावा पहुंचने का संकल्प लिया था। यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने पहले केदारेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया और फिर मुलायम सिंह यादव की समाधि पर गंगाजल अर्पित किया।

हरिद्वार से शुरू हुई कांवड़ यात्रा

सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचते हैं। इसके बाद वे स्थानीय शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत दोनों सगी बहनों ने भी हरिद्वार से कांवड़ उठाई और इटावा तक की यात्रा पूरी की।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के बीच आस्था, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति भक्ति का भाव देखने को मिलता है। दोनों बहनों ने भी इसी भावना के साथ अपनी यात्रा पूरी की। इटावा पहुंचने के बाद उन्होंने सैफई के केदारेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर गंगाजल चढ़ाया।

केदारेश्वर महादेव मंदिर का सैफई से विशेष जुड़ाव माना जाता है। मंदिर से जुड़े धार्मिक आयोजनों में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रहती है। ऐसे में हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचीं दोनों बहनों का यहां जलाभिषेक करना उनके लिए विशेष धार्मिक अवसर रहा।

मुलायम सिंह यादव की समाधि पर भी चढ़ाया गंगाजल

धार्मिक अनुष्ठान के बाद दोनों बहनें सैफई स्थित मुलायम सिंह यादव की समाधि पर पहुंचीं। वहां उन्होंने गंगाजल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके भाई नीतीश राजपूत ने मुलायम सिंह यादव को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

नीतीश राजपूत ने कहा कि उनके लिए नेता जी पिछड़ों के भगवान हैं। उनके इसी भाव के कारण परिवार ने कांवड़ यात्रा के दौरान मुलायम सिंह यादव की समाधि पर भी गंगाजल चढ़ाने का निर्णय लिया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘पिछड़ों के भगवान’ नीतीश राजपूत की व्यक्तिगत श्रद्धा और भावना से जुड़ा कथन है। मुलायम सिंह यादव को उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े वर्गों के प्रमुख नेताओं में गिना जाता रहा है और उनके समर्थक उन्हें सम्मान के साथ ‘नेता जी’ कहकर संबोधित करते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ जुड़ी राजनीतिक विरासत

सैफई लंबे समय से मुलायम सिंह यादव और समाजवादी आंदोलन से जुड़ा प्रमुख स्थान रहा है। मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ देश के रक्षा मंत्री भी रहे। उनके राजनीतिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति से जुड़ा रहा।

इसी वजह से सैफई में उनकी समाधि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। समय-समय पर पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक यहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

ऐसे में हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचीं दोनों बहनों का समाधि स्थल पर गंगाजल अर्पित करना धार्मिक यात्रा के साथ उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का भी प्रतीक माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सैफई की धार्मिक और राजनीतिक पहचान को चर्चा में ला दिया है।

भाई ने बताई बहनों की यात्रा की वजह

कांवड़ लेकर आने वाली दोनों बहनों के भाई नीतीश राजपूत ने बताया कि यह यात्रा उनके परिवार के लिए खास रही। उन्होंने कहा कि बहनों ने हरिद्वार से गंगाजल लेकर इटावा पहुंचने का संकल्प लिया था। यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार केदारेश्वर महादेव मंदिर में जल अर्पित किया।

इसके बाद परिवार ने मुलायम सिंह यादव की समाधि पर जाकर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी। नीतीश के अनुसार, मुलायम सिंह यादव के प्रति उनके परिवार में विशेष सम्मान की भावना है। इसलिए कांवड़ यात्रा के दौरान समाधि स्थल पर गंगाजल अर्पित करना उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा।

सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान देशभर में श्रद्धालु शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालु पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर लंबी दूरी तय करते हैं और सावन के दौरान शिवालयों में जल अर्पित करते हैं।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सावन के दौरान कांवड़ यात्राएं निकलती हैं। इन यात्राओं में युवा, महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य भी भाग लेते हैं। हरिद्वार से गंगाजल लाकर अपने स्थानीय मंदिर में अर्पित करने की परंपरा श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है।

इटावा पहुंचीं दोनों बहनों की यात्रा भी इसी आस्था से जुड़ी रही। हालांकि, उनकी यात्रा की खास बात यह रही कि धार्मिक अनुष्ठान के बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव की समाधि पर भी गंगाजल चढ़ाया।

सैफई में चर्चा का विषय बनी यात्रा

दोनों सगी बहनों के कांवड़ लेकर सैफई पहुंचने और केदारेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद मुलायम सिंह यादव की समाधि पर गंगाजल अर्पित करने की घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस यात्रा में धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत श्रद्धा दोनों का मेल देखने को मिला। एक ओर बहनों ने हरिद्वार से लाए गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने मुलायम सिंह यादव की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।

कुल मिलाकर, इटावा की यह कांवड़ यात्रा धार्मिक परंपरा के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कहानी भी सामने लाती है। हरिद्वार से इटावा तक की यात्रा पूरी करने वाली दोनों बहनों ने सावन की आस्था के बीच केदारेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया और फिर सैफई में मुलायम सिंह यादव की समाधि पर गंगाजल चढ़ाया। उनके भाई नीतीश राजपूत द्वारा व्यक्त की गई भावनाएं इस यात्रा को और अधिक चर्चा में ले आई हैं।

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