औरैया के देवकली मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर उमड़ी श्रद्धा, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा परिसर
रिपोर्ट – अंजुमन तिवारी
औरैया: सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर औरैया के प्रसिद्ध देवकली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। औरैया शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित इस धार्मिक स्थल पर दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव के दर्शन किए और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र एवं पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सावन के दूसरे सोमवार को लेकर शिव भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। इसके साथ ही पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव का जलाभिषेक करते नजर आए।
सुबह से लगी श्रद्धालुओं की कतार
देवकली मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना को लेकर सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर के बाहर और परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। भक्त अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव के जयकारे लगाते रहे।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े होकर शांतिपूर्वक दर्शन किए। वहीं, कई भक्त अपने साथ जल और पूजा सामग्री लेकर मंदिर पहुंचे। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं का कहना था कि देवकली मंदिर के प्रति उनकी गहरी आस्था है और वे समय-समय पर यहां भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। सावन के सोमवार को मंदिर में पूजा करने का विशेष महत्व मानते हुए बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
रात 3 बजे खुले मंदिर के कपाट
देवकली मंदिर के पुजारी शिव जी महाराज ने बताया कि सावन के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट रात करीब 3 बजे ही खोल दिए गए थे। इसके बाद से ही भक्तों के दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया।
उन्होंने बताया कि सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। मंदिर प्रबंधन की ओर से भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन और जलाभिषेक की व्यवस्था की गई।
पुजारी के अनुसार, सावन के सोमवार को देवकली मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहता है। इस दौरान आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
कांवड़ियों के लिए अलग रास्ते की व्यवस्था
सावन के दौरान कांवड़ यात्रा को देखते हुए मंदिर परिसर में कांवड़ लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। पुजारी ने बताया कि कांवड़ियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए उनके आवागमन के लिए अलग रास्ते की व्यवस्था की गई।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सामान्य श्रद्धालुओं और कांवड़ लेकर आने वाले भक्तों के आवागमन को व्यवस्थित बनाए रखना था। इसके कारण मंदिर में आने वाले अलग-अलग समूहों के श्रद्धालुओं को अपनी बारी के अनुसार दर्शन करने में सुविधा मिली।
प्रशासन और मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों ने भी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों का पालन करने और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।
मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
श्रावण के दूसरे सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते नजर आए। इसके अलावा, मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई।
प्रशासन की कोशिश रही कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के भगवान शिव के दर्शन कर सकें। इसके लिए मंदिर के आसपास भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम किए गए।
जयकारों से भक्तिमय हुआ वातावरण
सावन के दूसरे सोमवार को देवकली मंदिर में सुबह से ही धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे। मंदिर परिसर में लगातार गूंज रहे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय दिखाई दिया।
कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचे तो वहीं बड़ी संख्या में शिव भक्त समूहों में भी दर्शन करने आए। पूजा-अर्चना के दौरान भक्तों ने भगवान शिव को जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए।
श्रद्धालुओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसलिए इस महीने सोमवार के दिन मंदिर में पूजा करने और जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं।
मनोकामना पूरी होने की मान्यता
देवकली मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। यहां आने वाले कई भक्तों का मानना है कि भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से आराधना करने और जलाभिषेक करने से मन को शांति मिलती है और मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इसी आस्था के चलते सावन के सोमवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं।
हालांकि, धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं। देवकली मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी-अपनी मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना करते हैं।
प्रशासन की निगरानी में जारी रहा दर्शन-पूजन
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर में लगातार निगरानी की गई। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के आवागमन पर नजर बनाए रखी।
सीसीटीवी कैमरों की मदद से मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों की निगरानी की गई। इसके अलावा, मंदिर के आसपास भी पुलिस की मौजूदगी रही। कांवड़ियों के लिए अलग मार्ग की व्यवस्था होने से उनके आवागमन को भी व्यवस्थित रखने का प्रयास किया गया।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन किए और जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
सावन के दूसरे सोमवार पर दिखी विशेष आस्था
सावन के दूसरे सोमवार पर देवकली मंदिर में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना दिया। सुबह से शुरू हुआ दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला श्रद्धालुओं के पहुंचने के साथ लगातार बढ़ता रहा।
एक ओर मंदिर में भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए कतार में खड़े रहे, वहीं दूसरी ओर परिसर में लगातार भोलेनाथ के जयकारे सुनाई देते रहे। कांवड़ लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए अलग व्यवस्था किए जाने से उन्हें भी दर्शन में सुविधा मिली।
कुल मिलाकर, औरैया के देवकली मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। मंदिर के कपाट सुबह से पहले ही खोल दिए गए थे और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्तों ने शांतिपूर्वक दर्शन किए।

