सुल्तानपुर में 24 घंटे में करंट से दो बच्चों की मौत, 64 अवैध झटका मशीनें हटाईं, DM ने दिए सख्त निर्देश
Digital UP News Desk
सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में खेतों के आसपास लगाई जा रही अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग यानी झटका मशीनें गंभीर खतरे का कारण बनती जा रही हैं। महज 24 घंटे के भीतर अलग-अलग घटनाओं में दो बच्चों की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। लगातार सामने आए इन हादसों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है।
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खेतों और उनके आसपास लगाई गई अवैध झटका मशीनों को तत्काल हटाया जाए। इसके बाद रविवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने जिले के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए 64 स्थानों से अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग और विद्युत उपकरण हटाकर सीज किए।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को ऐसी व्यवस्था लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे आम लोगों और बच्चों की जान को खतरा पैदा हो।
हलियापुर में 17 वर्षीय आर्यन की मौत
सुल्तानपुर में ताजा मामला हलियापुर थाना क्षेत्र के लोके का पुरवा, मेगमऊ गांव का है। जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह करीब 10 बजे 17 वर्षीय आर्यन तिवारी खेत की ओर गया था। इसी दौरान वह खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए विद्युत तार के संपर्क में आ गया।
बताया गया कि तार में करंट प्रवाहित हो रहा था। करंट की चपेट में आने से आर्यन की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
सीओ बल्दीराय आशुतोष कुमार के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खेत की सुरक्षा के लिए विद्युत फेंसिंग किस तरह लगाई गई थी।
इस घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई। प्रशासन ने ऐसे सभी स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जहां अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल कर फेंसिंग की गई है।
एक दिन पहले 4 साल की साजिया की गई जान
इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार को लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के घरवासपुर में भी इसी तरह का हादसा हुआ था। यहां चार वर्षीय साजिया खेलते-खेलते पड़ोसी के खेत के पास पहुंच गई थी।
खेत के आसपास फसलों को पशुओं से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई थी। बच्ची अनजाने में इसके संपर्क में आ गई। करंट लगने के बाद परिवार के लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
एक के बाद एक सामने आए इन दोनों मामलों ने खेतों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से लगाई जा रही इलेक्ट्रिक फेंसिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर गांवों में खेतों के आसपास रहने वाले बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अब सख्ती बढ़ा दी है।
क्यों खतरनाक हो सकती है अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग?
किसानों की ओर से आमतौर पर फसलों को आवारा पशुओं, नीलगाय और जंगली जानवरों से बचाने के लिए फेंसिंग का इस्तेमाल किया जाता है। नियंत्रित इलेक्ट्रिक फेंसिंग में सीमित अवधि के विद्युत पल्स का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, जब इसका इस्तेमाल नियमों के विपरीत किया जाता है तो यह लोगों और पशुओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खतरा उस समय और बढ़ जाता है जब इलेक्ट्रिक फेंसिंग को घरेलू या कृषि बिजली लाइन से सीधे जोड़ दिया जाता है। इसके अलावा खराब गुणवत्ता वाले उपकरण, गलत वायरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
बारिश और नमी के दौरान खेतों में विद्युत फेंसिंग से जुड़ा जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे में खेत के आसपास से गुजरने वाले ग्रामीणों, बच्चों और पशुओं के लिए खतरा पैदा हो जाता है।
इसलिए प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की जा रही है कि वे फसल सुरक्षा के लिए किसी भी ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल न करें, जिससे लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो।
64 स्थानों पर प्रशासन की कार्रवाई
दो घटनाओं के बाद जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने जिले में अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी फेंसिंग की पहचान कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए।
निर्देश मिलने के बाद रविवार को पुलिस और प्रशासन की टीमों ने गांव-गांव अभियान चलाया। इस दौरान जिले में 64 स्थानों पर अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग और झटका मशीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने मौके पर लगे विद्युत उपकरणों को हटाने के साथ उन्हें सीज भी किया। प्रशासन का उद्देश्य केवल मौजूदा फेंसिंग को हटाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में दोबारा ऐसी व्यवस्था लगाए जाने पर भी रोक लगाना है।
अपर पुलिस अधीक्षक बृज नारायण सिंह के अनुसार, अभियान के दौरान 64 स्थानों पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि अवैध झटका मशीनों की बिक्री करने वाले लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गांव-गांव होगी निगरानी
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग की निगरानी बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी फेंसिंग की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें।
इसके साथ ही ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है कि खेतों के आसपास लगे किसी भी संदिग्ध विद्युत तार या झटका मशीन को स्वयं छूने के बजाय संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।
विशेष रूप से बच्चों को खेतों के आसपास जाने से रोकने और अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। खेत मालिकों से भी कहा गया है कि फसल बचाने के लिए ऐसी व्यवस्था न अपनाएं, जिससे राहगीरों या आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़े।
अवैध झटका मशीन बेचने वालों पर भी नजर
प्रशासन ने अब उन लोगों की पहचान शुरू कर दी है, जो कथित तौर पर अवैध झटका मशीनों की बिक्री या स्थापना में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी विक्रेता या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग की समस्या को केवल खेतों तक सीमित न रखकर उसके पूरे नेटवर्क पर रोक लगाना है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऐसे उपकरण आसानी से उपलब्ध न हों और उनका गलत इस्तेमाल न किया जा सके।
प्रशासन की सख्ती से ग्रामीणों को राहत की उम्मीद
सुल्तानपुर में लगातार दो हादसों के बाद प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उम्मीद बढ़ी है। 64 स्थानों पर कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग दोबारा न लगाई जाए।
फिलहाल प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने और अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की गई है।
दरअसल, फसल सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले किसी भी उपाय का उद्देश्य नुकसान रोकना होना चाहिए, न कि लोगों की सुरक्षा के लिए नया खतरा पैदा करना। इसलिए नियमों के विपरीत लगाई गई इलेक्ट्रिक फेंसिंग को लेकर प्रशासन की सख्ती को ग्रामीण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
64 स्थानों पर कार्रवाई
सुल्तानपुर में 24 घंटे के भीतर दो बच्चों की करंट की चपेट में आने से हुई मौत के बाद जिला प्रशासन ने अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। रविवार को 64 स्थानों पर कार्रवाई कर झटका मशीनों और संबंधित विद्युत उपकरणों को सीज किया गया। साथ ही, इनके विक्रेताओं की पहचान भी की जा रही है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि अभियान को लगातार जारी रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि खेतों के आसपास दोबारा ऐसी अवैध फेंसिंग न लगाई जाए। इसके लिए पुलिस, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वय बेहद जरूरी होगा।

