मथुरा में गीता आश्रम ट्रस्ट की संपत्ति हड़पने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर 5 लोगों पर मुकदमा
रिपोर्ट: योगेश भारद्वाज
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में गीता आश्रम ट्रस्ट की संपत्ति को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेचने और कब्जा करने के प्रयास का मामला सामने आया है। इस मामले में न्यायालय के आदेश के बाद थाना गोविंद नगर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और धमकी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
दर्ज एफआईआर के अनुसार, मुकदमा 29 सितंबर 2026 को न्यायालय के आदेश पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 351(2) के तहत कार्रवाई की गई है। विवेचना की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक आजाद सिंह को सौंपी गई है।
56 वर्षों से दुकान और कमरे पर कब्जे का दावा
शिकायतकर्ता राजवीर सिंह पुत्र विपती सिंह, निवासी महावीर नगर, गोवर्धन रोड, भूतेश्वर कृष्णानगर, मथुरा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक वृंदावन रोड स्थित मसानी क्षेत्र में दुर्गा सिंह इलेक्ट्रिक वर्क्स के नाम से उनकी दुकान और कमरा है। उनका दावा है कि वह पिछले करीब 56 वर्षों से इस संपत्ति पर काबिज हैं और यहां इलेक्ट्रिक वर्क्स का काम करते हुए अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित संपत्ति गीता आश्रम की है और वर्ष 1970 से पहले से उन्हें किराए पर मिली हुई है। उनके अनुसार यह संपत्ति गीता आश्रम एडीशनल ट्रस्ट मथुरा का हिस्सा है। ऐसे में संपत्ति पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा स्वामित्व या बिक्री का अधिकार जताए जाने को लेकर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई।
ट्रस्ट की संपत्ति बेचने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य की कथित तौर पर नीयत खराब होने के बाद पुनीत वैजल, निवासी नोएडा और दीपक मल्होत्रा, निवासी नई दिल्ली ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत ट्रस्ट की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों ने करीब 40 वर्ष पहले ट्रस्ट को समाप्त दिखाते हुए कथित तौर पर एक अलग गीता आश्रम सोसायटी का गठन कर लिया। इसके बाद 11 मई 2026 को एक बैठक दिखाकर सर्वसम्मति से संपत्तियों की बिक्री का प्रस्ताव पारित किए जाने का दावा किया गया।
आरोप के मुताबिक इसी प्रक्रिया के तहत ट्रस्ट की संपत्तियों के कुल नौ बैनामे कर दिए गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि पुनीत वैजल और दीपक मल्होत्रा ट्रस्ट के अध्यक्ष अथवा सचिव नहीं हैं और इसके बावजूद उन्होंने संपत्ति की बिक्री से संबंधित कार्रवाई की।
42 लाख रुपये में संपत्ति बेचने का आरोप
मामले में शिकायतकर्ता ने अपनी कब्जे वाली संपत्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार 8 जुलाई 2026 को संबंधित संपत्ति को हितेश कुमार, निवासी डैम्पियर नगर, मथुरा के पक्ष में करीब 42 लाख रुपये में बेच दिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खरीदार को संपत्ति के ट्रस्ट की होने और कथित विक्रेताओं के पास वैध अधिकार नहीं होने की जानकारी थी। इसके बावजूद संपत्ति की खरीद की गई। इसी क्रम में सुशील यादव, निवासी सदर बाजार और संजय, निवासी गीता एन्क्लेव, कृष्णानगर पर भी दोनों कथित विक्रेताओं के साथ मिलकर फर्जी तरीके से बैनामा कराने में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले में दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच शुरू कर दी है।
विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने संपत्ति के विवाद के साथ धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने संबंधित लोगों से संपत्ति की बिक्री को लेकर शिकायत की तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर दबाव में लेने का प्रयास किया गया कि संपत्ति बेच दी गई है और उन्हें वहां से हटा दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें काम में बाधा डालने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से करने का प्रयास किया।
एसएसपी से शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचे
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 28 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत भेजी थी। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के आदेश के बाद थाना गोविंद नगर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान कथित ट्रस्ट, सोसायटी के गठन, संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, बैठक के रिकॉर्ड, बैनामों और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जाएगी।
दस्तावेजों की जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामला संपत्ति के स्वामित्व और कथित दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण जांच में राजस्व एवं रजिस्ट्री से संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस द्वारा यह भी देखा जाएगा कि जिस संपत्ति की बिक्री की गई, उसके वास्तविक स्वामित्व संबंधी दस्तावेज किसके नाम दर्ज हैं और बिक्री करने वाले व्यक्तियों के पास ऐसा करने का वैधानिक अधिकार था या नहीं।
इसके अलावा कथित गीता आश्रम सोसायटी के गठन और पुराने ट्रस्ट की स्थिति से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। इसी आधार पर पुलिस आरोपों की सत्यता और प्रत्येक नामजद व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण करेगी।
फिलहाल थाना गोविंद नगर में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। मथुरा गीता आश्रम ट्रस्ट संपत्ति धोखाधड़ी मामले में पुलिस की विवेचना पूरी होने और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संपत्ति के अधिकार से जुड़ी वास्तविक स्थिति क्या है।

