दोमुंहे सांप तस्करी मामले में आठ पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार का केस, QR कोड से 2 लाख लेने का आरोप
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। जिले के मैगलगंज थाना क्षेत्र में दोमुंहे सांप यानी रेड सैंड बोआ की कथित तस्करी से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले की जांच के बाद पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के निर्देश पर मैगलगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसके साथ ही कथित तौर पर रकम मंगाने के लिए इस्तेमाल किए गए क्यूआर कोड से जुड़े खाते के धारक को भी रिपोर्ट में आरोपी बनाया गया है।
मामला उस समय चर्चा में आया था, जब मैगलगंज पुलिस ने दोमुंहे सांप की तस्करी के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से दो जीवित रेड सैंड बोआ सांप, मोबाइल फोन और एक वाहन बरामद किया गया था। वहीं, तीन अन्य संदिग्धों के फरार होने की बात सामने आई थी। बाद में गिरफ्तार युवकों के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए।
आठ पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई रिपोर्ट
जांच के बाद दर्ज रिपोर्ट में मैगलगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर संजीव कुमार सिंह, दरोगा शुभम कुमार, मुख्य आरक्षी देवेंद्र सिंह यादव तथा आरक्षी देवेंद्र सिसोदिया, राहुल कुमार, रोहित, विश्वास सिंह और अमित कुमार यादव के नाम शामिल हैं। ये सभी पुलिसकर्मी इस प्रकरण में पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब नामजद पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित तौर पर युवकों को हिरासत में लेने, उनसे पूछताछ करने और बाद में कुछ लोगों को छोड़ने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस पुलिसकर्मी की क्या भूमिका थी।
तीन युवकों की गिरफ्तारी के बाद उठे सवाल
प्रकरण की शुरुआत मैगलगंज पुलिस की ओर से तीन युवकों की गिरफ्तारी से हुई थी। पुलिस ने दावा किया था कि तीनों युवक दोमुंहे सांप की कथित तस्करी से जुड़े थे और उनके पास से दो रेड सैंड बोआ बरामद किए गए। इसके अलावा मोबाइल फोन और वाहन भी पुलिस कार्रवाई का हिस्सा बताए गए थे।
हालांकि, गिरफ्तारी के बाद युवकों के परिजनों ने पुलिस पर अलग-अलग आरोप लगाए। उनका कहना था कि युवकों को कथित रूप से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से अलग एक निजी मकान में रखा गया और परिवार के सदस्यों से संपर्क कर रकम की मांग की गई।
इसी शिकायत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी। जांच के दौरान कथित रकम के लेनदेन और उसके लिए इस्तेमाल किए गए क्यूआर कोड से संबंधित जानकारी भी सामने आई।
QR कोड के जरिए करीब दो लाख रुपये मंगाने का आरोप
परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, युवकों के परिवार से करीब दो लाख रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। आरोप है कि यह रकम क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाई गई थी। यही कारण है कि अब इस कथित लेनदेन को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट में उस बैंक खाते के धारक को भी आरोपी बनाया गया है, जिसके माध्यम से कथित तौर पर रकम प्राप्त की गई। इससे जांच का दायरा पुलिसकर्मियों की भूमिका के साथ-साथ आर्थिक लेनदेन तक भी पहुंच गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि रकम किसके कहने पर भेजी गई, किस खाते में पहुंची और उसके बाद उसका इस्तेमाल किस प्रकार हुआ। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि इस लेनदेन में नामजद पुलिसकर्मियों अथवा अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं पुलिसकर्मी
मामले में सामने आए आरोपों के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। अब जांच के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज होने से प्रकरण में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ गई है।
हालांकि, रिपोर्ट दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। इसलिए मामले में पुलिसकर्मियों और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
गिरफ्तार और छोड़े गए युवकों का मामला भी जांच में शामिल
इस पूरे प्रकरण में केवल कथित रकम के लेनदेन की ही जांच नहीं की जा रही है, बल्कि उन तीन युवकों से जुड़े तथ्यों को भी जांच में शामिल किया गया है, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। साथ ही उन तीन लोगों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें कथित तौर पर बाद में छोड़ दिया गया था।
जांच में यह देखा जा रहा है कि गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं। इसके अलावा बरामद किए गए कथित रेड सैंड बोआ, मोबाइल फोन और वाहन से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
दोमुंहे सांप की कथित तस्करी का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई सामान्य रूप से जांच का विषय थी, लेकिन युवकों के परिजनों की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रकरण को अलग दिशा दे दी। अब पुलिसकर्मियों पर दर्ज रिपोर्ट के बाद जांच का केंद्र उनकी कथित भूमिका और आर्थिक लेनदेन बन गया है।
एसपी डॉ. ख्याति गर्ग की कार्रवाई के बाद मामले में विभागीय और कानूनी स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि कथित रूप से दो लाख रुपये के लेनदेन में किन लोगों की भूमिका थी और गिरफ्तार युवकों से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल, इस मामले में नामजद पुलिसकर्मियों और क्यूआर कोड से जुड़े खाते के धारक की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों के स्तर से जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

