UPTET 2026: OMR गड़बड़ी से 60 हजार अभ्यर्थियों का रिजल्ट रिजेक्ट, MLC ने CM से की सुधार की मांग

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रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET)-2026 के परिणाम को लेकर एक बार फिर अभ्यर्थियों की चिंता सामने आई है। परीक्षा में OMR शीट भरने के दौरान हुई कथित मानवीय गलतियों के कारण करीब 50 से 60 हजार अभ्यर्थियों के परिणाम ‘रिजेक्ट’ किए जाने का मामला अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने की मांग की है।

MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने 29 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित UPTET परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से OMR शीट में अनुक्रमांक, सेंटर कोड, विषय कोड अथवा बुकलेट नंबर भरने में मानवीय भूल हुई। इन छोटी-छोटी प्रविष्टिगत गलतियों के चलते उनके परिणाम को अस्वीकृत कर दिया गया। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता प्रभावित होने की चिंता है।

OMR की छोटी गलती बनी बड़ी परेशानी

UPTET 2026 का परिणाम 26 अगस्त को घोषित किया गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने OMR रिजेक्शन, नॉर्मलाइजेशन और प्राप्त अंकों को लेकर आयोग के समक्ष प्रत्यावेदन दिए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 19.95 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे और करीब 60 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम विभिन्न कारणों से ‘रिजेक्ट’ श्रेणी में आया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि OMR शीट में कई मामलों में गलती केवल निर्धारित गोले को गलत ढंग से भरने या संबंधित विवरण की प्रविष्टि में हुई। वहीं, उनके द्वारा आधिकारिक उत्तर कुंजी से अपने उत्तरों का मिलान किए जाने पर उन्हें अपेक्षित अंकों के आधार पर सफल होने की संभावना दिखाई देती है। इसी आधार पर प्रभावित अभ्यर्थी चाहते हैं कि ऐसे मामलों में उनकी OMR शीट और उपलब्ध विवरण का मानवीय स्तर पर दोबारा परीक्षण किया जाए।

MLC ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप

विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र में इस पूरे मामले को अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि मानवीय भूल के कारण रिजेक्ट हुए अभ्यर्थियों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कराया जाए।

MLC के मुताबिक, यदि किसी अभ्यर्थी की पहचान और परीक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी अन्य माध्यम से स्पष्ट रूप से उपलब्ध है और उत्तर कुंजी के आधार पर उसके अंक पात्रता स्तर को पूरा करते हैं, तो ऐसे मामलों की दोबारा जांच पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जिनका परिणाम केवल OMR में हुई प्रविष्टिगत गलती के कारण प्रभावित हुआ है।

आयोग पहले ही दे चुका है अपना फैसला

हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने 16 सितंबर 2026 को UPTET परिणाम से जुड़े प्रत्यावेदनों पर अपना निर्णय जारी कर दिया था। आयोग ने OMR में रोल नंबर या प्रश्न पुस्तिका संख्या आदि गलत भरने से संबंधित मांगों को स्वीकार नहीं किया। आयोग के अनुसार परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को OMR भरने के संबंध में निर्देश दिए गए थे और मूल्यांकन की प्रक्रिया स्वचालित थी।

आयोग ने नॉर्मलाइजेशन और उत्तर कुंजी के आधार पर अंकों में बदलाव से संबंधित मांगों को भी स्वीकार नहीं किया। वहीं, सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में नाम, माता-पिता या पति का नाम, जन्मतिथि और श्रेणी जैसी कुछ प्रविष्टियों में सुधार के लिए ऑनलाइन सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

ऐसे में MLC का मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र अब इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर पुनर्विचार और हस्तक्षेप की मांग के तौर पर देखा जा रहा है।

आगामी शिक्षक भर्ती से जुड़ी चिंता

देवेंद्र प्रताप सिंह ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि शिक्षक भर्ती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आगामी परीक्षा और चयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों का UPTET परिणाम OMR संबंधी कारणों से रिजेक्ट हुआ है, वे किसी भी आगामी भर्ती प्रक्रिया में पात्रता संबंधी अवसर से वंचित न हों, इसके लिए जल्द निर्णय की आवश्यकता है।

अभ्यर्थियों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि UPTET प्रमाणपत्र शिक्षक भर्ती के लिए महत्वपूर्ण पात्रता आधारों में से एक है। यदि किसी अभ्यर्थी को परीक्षा में प्राप्त वास्तविक प्रदर्शन के बावजूद केवल OMR प्रविष्टि की तकनीकी त्रुटि के कारण परिणाम नहीं मिलता है, तो वह आगे की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर असमंजस में पड़ सकता है।

अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर नजर

फिलहाल प्रभावित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की नजर मुख्यमंत्री कार्यालय तथा संबंधित परीक्षा प्राधिकरण की ओर है। MLC की मांग पर सरकार या आयोग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

वहीं, अभ्यर्थियों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी नए निर्णय या राहत की उम्मीद के साथ केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। आयोग की ओर से जारी नोटिस में OMR संबंधी प्रत्यावेदनों पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका है। इसलिए आगे किसी भी बदलाव की स्थिति में आधिकारिक आदेश ही अंतिम आधार माना जाएगा।

कुल मिलाकर, UPTET 2026 में OMR से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। एक तरफ आयोग अपनी निर्धारित परीक्षा प्रक्रिया और निर्देशों के आधार पर निर्णय ले चुका है, जबकि दूसरी तरफ प्रभावित अभ्यर्थियों के पक्ष में MLC ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और क्या OMR संबंधी मामलों में किसी नए स्तर पर समीक्षा की संभावना बनती है।

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