बागपत के बड़ौत में अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार; 22 बाइक-स्कूटी बरामद

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रिपोर्ट – हैदर अली 

बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे और निशानदेही पर चोरी की 22 बाइक और स्कूटी बरामद करने का दावा किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।

पुलिस की इस कार्रवाई को वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह के खुलासे से वाहन चोरी की एक दर्जन से अधिक वारदातों का पता चला है। वहीं, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य चोरी के वाहनों को किन लोगों के माध्यम से बेचते थे और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।

पांच आरोपी गिरफ्तार, 22 दोपहिया वाहन बरामद

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान संदीप, आसिफ, देव, नूर और फरमान के रूप में हुई है। इन सभी पर अलग-अलग क्षेत्रों में बाइक और स्कूटी चोरी करने में शामिल होने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य सुनियोजित तरीके से वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।

जांच के दौरान पुलिस को चोरी के 22 दोपहिया वाहन बरामद हुए हैं। इनमें बाइक और स्कूटी शामिल हैं। बरामद वाहनों के संबंध में पुलिस उनके वास्तविक मालिकों और चोरी की शिकायतों का मिलान कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-सा वाहन किस क्षेत्र से चोरी किया गया था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य वाहन चोरी करने के बाद उन्हें ठिकाने लगाने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाते थे। इस दौरान चोरी के वाहनों की पहचान छिपाने और उन्हें आसानी से बेचने की कोशिश की जाती थी।

चेसिस नंबर बदलकर बेचते थे चोरी की बाइक

पुलिस की जांच में गिरोह के काम करने का एक तरीका भी सामने आया है। आरोप है कि वाहन चोरी करने के बाद आरोपी उनकी पहचान बदलने के लिए चेसिस नंबर में छेड़छाड़ करते थे। इसके बाद इन वाहनों को दूसरे स्थानों पर बेचने की कोशिश की जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की बाइक बेचने में बागपत और हरियाणा के पानीपत के कुछ मिस्त्री कथित तौर पर आरोपियों की मदद करते थे। पुलिस के अनुसार, ये लोग वाहनों के चेसिस नंबर बदलने और उनकी पहचान छिपाने में भूमिका निभाते थे। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

इस तरह चोरी के वाहन केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि उन्हें दूसरे क्षेत्रों में ले जाकर बेचने की कोशिश की जाती थी। यही वजह है कि पुलिस इस मामले को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही है।

दिल्ली-एनसीआर और कई जिलों में सक्रिय था गिरोह

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी बागपत और शामली के अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई जिलों में वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। चोरी के बाद वाहनों को दूसरे स्थानों पर पहुंचाकर उनकी बिक्री की जाती थी, जिससे मूल स्थान पर हुई चोरी और वाहन की बिक्री के बीच संबंध तलाशना चुनौतीपूर्ण हो जाता था।

पुलिस ने गिरोह के खुलासे के साथ वाहन चोरी की एक दर्जन से अधिक घटनाओं का पता लगाने का दावा किया है। हालांकि, किन-किन जिलों में कितनी घटनाओं का खुलासा हुआ है, इसका विस्तृत ब्योरा जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकता है।

इसके अलावा, पुलिस बरामद वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर और चेसिस नंबर की जांच कर रही है। इस प्रक्रिया से चोरी के वाहनों के वास्तविक मालिकों तक पहुंचने और संबंधित मामलों का मिलान करने में मदद मिलेगी।

एडिशनल एसपी ने प्रेसवार्ता में किया खुलासा

पूरे मामले का खुलासा बागपत के एडिशनल एसपी ने प्रेसवार्ता के दौरान किया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और बरामद वाहनों के संबंध में जानकारी दी। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों की तलाश कर रही है।

इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने वाहन चोरी किए और उनमें से कितने वाहनों को बेच दिया गया। बागपत, शामली, पानीपत और दिल्ली-एनसीआर के बीच वाहन चोरी तथा बिक्री के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है।

वाहन खरीदते समय बरतें सावधानी

इस मामले के सामने आने के बाद पुराने दोपहिया वाहन खरीदने वालों के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। सेकेंड हैंड बाइक या स्कूटी खरीदते समय वाहन के दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, इंजन नंबर और चेसिस नंबर का मिलान जरूर करना चाहिए। साथ ही, विक्रेता की पहचान और वाहन के स्वामित्व से जुड़े कागजात की जांच करनी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उचित दस्तावेज या संदिग्ध रूप से कम कीमत पर वाहन खरीदने से बचना चाहिए। किसी भी वाहन की खरीद से पहले उसके रिकॉर्ड की जांच करना खरीदार को कानूनी परेशानी से बचा सकता है।

फिलहाल, बड़ौत पुलिस की कार्रवाई के बाद गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों का पता लगाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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