अमेठी: पेड़ में उतरे करंट की चपेट में आने से 50 वर्षीय गौरी शंकर की मौत, गांव में मचा कोहराम

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रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा

अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बिजली के तारों से जुड़ी लापरवाही का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के हारीमऊ गांव में पेड़ में उतरे करंट की चपेट में आने से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है। वहीं, मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तारों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पेड़ के पास पहुंचते ही करंट की चपेट में आए गौरी शंकर

जानकारी के मुताबिक, हारीमऊ गांव निवासी 50 वर्षीय गौरी शंकर शनिवार को किसी जरूरी काम से घर के पास स्थित एक पेड़ के नजदीक गए थे। बताया जा रहा है कि पेड़ की डालियों के संपर्क में बिजली का तार आ गया था, जिसके कारण पूरे पेड़ में करंट फैल गया था। इस खतरनाक स्थिति से अनजान गौरी शंकर जैसे ही पेड़ के संपर्क में आए, उन्हें बिजली का तेज झटका लगा।

करंट का प्रभाव इतना गंभीर था कि वह बुरी तरह झुलस गए। हादसे के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में गांव के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। हालांकि, तब तक गौरी शंकर की जान जा चुकी थी।

हादसे के बाद परिवार में पसरा मातम

गौरी शंकर की असमय मौत की खबर जैसे ही उनके परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस व्यक्ति के साथ परिवार ने भविष्य के कई सपने संजोए थे, उसकी अचानक मौत ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया।

वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्र हो गए। गांव में हर तरफ इसी हादसे की चर्चा होने लगी। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन से उचित सहायता दिलाने की मांग की है।

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बिजली के जर्जर तारों और उनकी उचित देखरेख की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई स्थानों पर बिजली के तार पेड़ों की डालियों के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली के तारों की समय-समय पर जांच और मरम्मत की जाती, तो संभवतः इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र की समस्याओं के बारे में पहले भी जानकारी दी गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

हालांकि, बिजली विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। ऐसे में हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित विभागीय जिम्मेदारी की जांच जरूरी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा को लेकर चिंता

हारीमऊ गांव में हुई यह घटना ग्रामीण इलाकों में बिजली सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को फिर से सामने लाती है। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों के आसपास से गुजरने वाले बिजली के तार, पुराने खंभे और क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनें कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली के तारों का पेड़ों की डालियों से संपर्क होने पर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग को तत्काल विद्युत आपूर्ति बंद कराकर तारों और पेड़ों के बीच सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करनी चाहिए।

इसके अलावा, ग्रामीणों को भी ऐसे पेड़ों या स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है, जहां बिजली के तार संपर्क में दिखाई दें। यदि किसी पेड़ या अन्य वस्तु में करंट होने की आशंका हो, तो उसे सीधे छूने के बजाय बिजली विभाग और प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।

पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा

घटना की सूचना मिलने पर जगदीशपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए गौरी शंकर के शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अब ग्रामीणों की मांग है कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि बिजली विभाग की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षेत्र में जर्जर बिजली तारों की जांच कराकर उन्हें दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

हारीमऊ गांव में गौरी शंकर की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और बिजली विभाग इस घटना से सबक लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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