मथुरा के राया में दो दोस्तों ने रक्तदान कर बचाई मां और नवजात की जान, पेश की इंसानियत की मिसाल

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

राया (मथुरा): कहते हैं कि रक्तदान महादान है, क्योंकि किसी जरूरतमंद को समय पर मिला रक्त उसके जीवन की रक्षा कर सकता है। मथुरा के राया कस्बे में दो युवाओं ने अपने इसी मानवीय जज्बे से एक प्रसूता मां और उसके नवजात शिशु की मदद कर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। आपातकालीन स्थिति में रक्त की आवश्यकता पड़ने पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक पाराशर और सभासद सरवन अहमद ने बिना देर किए रक्तदान किया। उनके इस प्रयास से अस्पताल में उपचार कर रही चिकित्सकीय टीम को समय पर आवश्यक रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिली।

इस घटना के बाद दोनों युवाओं की क्षेत्र में सराहना हो रही है। वहीं, प्रसूता के परिजनों ने भी उनके प्रति आभार व्यक्त किया और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कार्य बताया।

आपातकालीन स्थिति में पड़ी रक्त की जरूरत

मिली जानकारी के अनुसार, राया क्षेत्र में एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया था। प्रसव के दौरान मां और नवजात शिशु की स्थिति गंभीर बताई गई। ऐसे में चिकित्सकों ने आपातकालीन स्थिति को देखते हुए रक्त की आवश्यकता जताई।

परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती तत्काल रक्त की व्यवस्था करने की थी। समय पर रक्त उपलब्ध होना उपचार के लिए बेहद जरूरी था। इसी दौरान जब दोनों युवाओं को इस जरूरत की जानकारी मिली तो उन्होंने मदद के लिए आगे आने का फैसला किया।

सूचना मिलते ही ब्लड बैंक पहुंचे दोनों दोस्त

रक्त की आवश्यकता की जानकारी मिलने के बाद अभिषेक पाराशर और सरवन अहमद बिना देरी किए बृजवासी चेरिटेबल ब्लड बैंक पहुंचे। वहां उन्होंने स्वेच्छा से रक्तदान किया। उनके इस सहयोग से जरूरत के समय रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिली।

बताया गया कि चिकित्सकों को उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए रक्त की आवश्यकता थी। ऐसे में दोनों युवाओं की तत्परता से परिजनों को राहत मिली। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में चिकित्सकीय टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही, जिसने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर मां और नवजात के उपचार की प्रक्रिया संभाली।

अभिषेक पाराशर ने लोगों से की रक्तदान की अपील

रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक पाराशर ने रक्तदान को समाज के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए। इससे जरूरतमंद मरीजों की मदद की जा सकती है और आपातकालीन परिस्थितियों में किसी परिवार को बड़ी राहत मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि रक्तदान को लेकर लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं। ऐसे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक स्वस्थ और पात्र लोग स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आएं।

सरवन अहमद बोले- रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं

सभासद सरवन अहमद ने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पात्रता और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्त की जरूरत किसी को भी कभी भी पड़ सकती है। ऐसे में समाज के लोगों को एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

उनके अनुसार, रक्तदान केवल एक व्यक्ति की मदद करना नहीं है, बल्कि जरूरत के समय किसी पूरे परिवार के लिए उम्मीद बनना है। इसलिए लोगों को इस नेक कार्य के प्रति जागरूक होना चाहिए।

परिजनों ने जताया आभार, युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

प्रसूता के परिजनों ने अभिषेक पाराशर और सरवन अहमद के इस सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में दोनों युवाओं ने आगे आकर जिस तरह मदद की, वह सराहनीय है। जरूरत के समय रक्त उपलब्ध कराने से परिवार को बड़ी राहत मिली।

स्थानीय लोगों ने भी दोनों दोस्तों के इस प्रयास को मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया। उनका मानना है कि समाज में ऐसे कार्यों से दूसरे लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरणा मिलती है।

रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

रक्तदान चिकित्सा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्घटना, प्रसव, ऑपरेशन और कई गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ सकती है। चूंकि रक्त का कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, रक्तदान करने से पहले व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जांच की जाती है और चिकित्सकीय मानकों के आधार पर ही रक्त लिया जाता है। इसलिए लोगों को किसी भी प्रकार की गलत धारणा से बचते हुए अधिकृत ब्लड बैंक में चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रक्तदान करना चाहिए।

मथुरा के राया में अभिषेक पाराशर और सरवन अहमद की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया है कि समय पर की गई छोटी-सी मदद भी किसी जरूरतमंद के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों युवाओं ने रक्तदान कर न केवल एक परिवार की सहायता की, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि मानवता और सहयोग की भावना ही सामाजिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।

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