इटावा अस्पताल में मरीजों का स्ट्रेचर ढो रहा लकड़ियां, वीडियो हुआ वायरल; जानिए क्या बोल रहे सीएमएस,,,
रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान
इटावा: सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसका एक मामला इटावा के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल से सामने आया है। यहां मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला स्ट्रेचर लकड़ियां ढोने के काम आता दिखाई दिया। बुधवार शाम करीब छह बजे मोतीझील चौराहे के पास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
वीडियो में अस्पताल के कर्मचारी स्ट्रेचर पर लकड़ियां रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि इससे पहले इसी स्ट्रेचर का इस्तेमाल पानी की मोटर ले जाने के लिए भी किया गया था। मामला सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा है कि मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए उपकरणों का उपयोग इस तरह किया जाना कितना उचित है।
स्ट्रेचर पर लकड़ियां ले जाते दिखे अस्पताल कर्मचारी
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब छह बजे मोतीझील चौराहे के पास कुछ अस्पताल कर्मचारी स्ट्रेचर पर लकड़ियां रखकर ले जा रहे थे। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उनका वीडियो बना लिया। वीडियो में कर्मचारी अस्पताल के स्ट्रेचर पर लकड़ियां ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने जब कर्मचारियों से सवाल किया कि मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेचर पर सामान क्यों ढोया जा रहा है, तो कर्मचारियों ने अस्पताल के दूसरे कर्मचारी आनंद कुमार का नाम लिया।
इस दौरान बातचीत में आनंद कुमार ने बताया कि वह स्ट्रेचर पर पानी की मोटर लेकर गए थे और वहां से जलाने के लिए लकड़ियां लेकर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में सीएमएस को जानकारी है और उनके आदेश पर ही मोटर ले जाने के बाद लकड़ियां लाई जा रही हैं।
हालांकि, कर्मचारी की ओर से किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल के सीएमएस ने भी मामले की जानकारी होने से इनकार किया है।
वीडियो में कर्मचारी ने कही ये बात
सामने आए वीडियो में वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कर्मचारियों से स्ट्रेचर के इस्तेमाल को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। इस पर कर्मचारी अपनी बात रखते हैं और बताते हैं कि स्ट्रेचर पर पहले मोटर ले जाई गई थी तथा अब लकड़ियां लाई जा रही हैं।
पूछताछ के दौरान कर्मचारी की ओर से यह भी कहा गया कि सीएमएस साहब को इसकी जानकारी है। वहीं, वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के सवालों पर कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा कि जो वीडियो बनाना है, बना लो, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल के संसाधनों के इस्तेमाल और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
गंभीर मरीजों के लिए जरूरी होता है स्ट्रेचर
अस्पताल में स्ट्रेचर एक महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण है। इसका इस्तेमाल ऐसे मरीजों को इमरजेंसी वार्ड या अन्य चिकित्सा कक्षों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है, जो गंभीर स्थिति में हों या अपने पैरों से चलने में असमर्थ हों।
विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों में स्ट्रेचर की उपलब्धता मरीजों को समय पर उपचार दिलाने में मदद करती है। ऐसे में यदि अस्पताल के इस संसाधन का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया जाता है, तो उसकी उपयोगिता और उपलब्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी वजह से इटावा जिला अस्पताल से जुड़ा यह वीडियो चर्चा में है। लोगों का सवाल है कि मरीजों के लिए उपलब्ध कराए गए उपकरणों का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार ही होना चाहिए, ताकि जरूरत के समय मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सीएमएस डॉ. पारितोष शुक्ला ने जानकारी से किया इनकार
मामले को लेकर जब डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. पारितोष शुक्ला से संपर्क किया गया, तो उन्होंने घटना की जानकारी होने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। यदि इस तरह की कोई बात सामने आती है, तो इसकी जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया कि सीएमएस दिन में कोर्ट संबंधी कार्य में व्यस्त थे। बाद में फोन पर उनसे संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने जांच के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही।
किसके आदेश पर हुआ इस्तेमाल, जांच के बाद होगा स्पष्ट
फिलहाल, इस पूरे मामले में दो अलग-अलग बातें सामने आई हैं। एक ओर वीडियो में कर्मचारी की तरफ से सीएमएस के आदेश की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर सीएमएस ने घटना की जानकारी होने से इनकार किया है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि स्ट्रेचर पर पानी की मोटर और लकड़ियां ले जाने का निर्णय किसने लिया था और क्या इसके लिए अस्पताल प्रशासन से अनुमति ली गई थी।
अब मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी। साथ ही, यह भी स्पष्ट होगा कि अस्पताल के संसाधनों का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और किसके निर्देश पर किया गया।
इटावा के इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों के उचित उपयोग और उनकी निगरानी की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है। मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध संसाधन सुरक्षित और जरूरत के समय उपलब्ध रहें, यह सुनिश्चित करना अस्पताल प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

