कानपुर देहात: अकबरपुर महाविद्यालय में ‘रश्मिरथी’ का भव्य मंचन, कर्ण की वीरता और स्वाभिमान ने जीता दिल
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात। अकबरपुर महाविद्यालय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी साहित्यिक कृति ‘रश्मिरथी’ का भव्य नाट्य मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय, ओजपूर्ण संवाद और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, वीरता, दानशीलता और स्वाभिमान को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद दर्शक कलाकारों की प्रस्तुति से प्रभावित नजर आए। इस सांस्कृतिक आयोजन ने भारतीय साहित्य और रंगमंच की समृद्ध परंपरा को करीब से समझने का अवसर प्रदान किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा तथा उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन भारतेंदु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश और जिला प्रशासन कानपुर देहात के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को भारतीय साहित्य, नाट्य कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना तथा नई पीढ़ी में साहित्य और रंगमंच के प्रति रुचि विकसित करना रहा।
‘रश्मिरथी’ के मंचन में दिखा कर्ण का संघर्ष और स्वाभिमान
रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिनी जाती है। इस महाकाव्य में महाभारत के प्रमुख पात्र कर्ण के जीवन, व्यक्तित्व, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। कर्ण का जीवन अनेक ऐसी परिस्थितियों से भरा रहा, जिनमें उसे अपनी पहचान, सम्मान और कर्तव्य के बीच कठिन निर्णय लेने पड़े।
नाट्य मंचन के दौरान कलाकारों ने कर्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। उनके अभिनय में कर्ण की वीरता, दानशीलता, आत्मसम्मान और मित्रता के प्रति निष्ठा जैसे गुण स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। इसके साथ ही सामाजिक परिस्थितियों से जूझते हुए अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले कर्ण के व्यक्तित्व को भी प्रभावी ढंग से उकेरा गया।
कलाकारों की संवाद अदायगी और मंच पर भावों की अभिव्यक्ति ने प्रस्तुति को विशेष बना दिया। वहीं, ओजपूर्ण संवादों ने दर्शकों को महाकाव्य की साहित्यिक गरिमा और उसके विचारों से जोड़ने का काम किया। परिणामस्वरूप, यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दर्शकों को जीवन मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर विचार करने का अवसर भी मिला।
सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का दिया संदेश
‘रश्मिरथी’ की विशेषता यह है कि यह कर्ण के माध्यम से समाज में सम्मान, समानता, योग्यता और आत्मसम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाती है। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति की पहचान केवल उसकी सामाजिक परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके कर्म, साहस, विचार और आचरण से भी बनती है।
इसके अतिरिक्त, विपरीत परिस्थितियों में अपने सिद्धांतों पर कायम रहने, कर्तव्य के प्रति निष्ठावान बने रहने और मानवीय मूल्यों को महत्व देने की प्रेरणा भी प्रस्तुति में दिखाई दी। कलाकारों ने इन प्रसंगों को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक महाकाव्य की मूल भावना से जुड़ सके।
आज के समय में भी ऐसी साहित्यिक प्रस्तुतियां प्रासंगिक हैं, क्योंकि इनके माध्यम से नई पीढ़ी भारतीय साहित्य के महान पात्रों और उनके जीवन से जुड़े नैतिक प्रश्नों को समझ सकती है। इसी दृष्टि से अकबरपुर महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला और जिलाधिकारी कपिल सिंह ने की सराहना
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला तथा कानपुर देहात के जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट कपिल सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल, अपर जिलाधिकारी न्यायिक दिग्विजय सिंह सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
उपस्थित अतिथियों ने नाट्य मंचन का अवलोकन किया और कलाकारों की अभिनय क्षमता, अनुशासन, संवाद अदायगी तथा प्रभावशाली मंच प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के महत्व को भी रेखांकित किया। ऐसे आयोजन स्थानीय स्तर पर कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ लोगों को अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में सहायक होते हैं।
मिथिलेश कुमार सिंह के निर्देशन में हुआ मंचन
‘रश्मिरथी’ के नाट्य मंचन का निर्देशन मिथिलेश कुमार सिंह ने किया। उनके निर्देशन में कलाकारों ने महाकाव्य के विभिन्न प्रसंगों को नाटकीय प्रभाव और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया। मंच पर अभिनय, संवाद और पात्रों की अभिव्यक्ति के समन्वय ने प्रस्तुति को आकर्षक बनाया।
कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रभारी जिला पर्यटन अधिकारी, महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। विद्यार्थियों के लिए यह आयोजन साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे मंच पर जीवंत रूप में देखने और समझने का अवसर बना।
भारतीय साहित्य और रंगमंच को बढ़ावा देने की पहल
अकबरपुर महाविद्यालय में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने कानपुर देहात में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। भारतीय महाकाव्यों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को देश की सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपराओं और ऐतिहासिक पात्रों के विचारों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके साथ ही, रंगमंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और दर्शकों तक साहित्य के संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अवसर देता है। ‘रश्मिरथी’ जैसे महाकाव्य का मंचन इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसकी कथा में वीरता, स्वाभिमान, दानशीलता, मित्रता और मानवीय संवेदनाओं जैसे अनेक विषय समाहित हैं।

