अयोध्या: 1 नवंबर से बदलेगी रामलला के दर्शन की समय-सारणी, सुबह 4 बजे खुलेंगे मंदिर के पट

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रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ऋतु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए 1 नवंबर से रामलला की पूजा, आरती, भोग और दर्शन की समय-सारणी में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था के अनुसार, मंदिर के पट सुबह 3:45 बजे के बजाय सुबह 4 बजे खुलेंगे, जबकि रात 10 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। वर्तमान में मंदिर के पट रात 10:30 बजे बंद होते हैं।

नई समय-सारणी लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पहुंचने से पहले आरती और भोग के समय का ध्यान रखना होगा। इसके अलावा, दिन में कुछ निर्धारित समय पर भोग और विश्राम के लिए दर्शन अस्थायी रूप से बंद रहेंगे। ऐसे में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की नई दिनचर्या की जानकारी रखना उपयोगी होगा।

1 नवंबर से लागू होगी रामलला के दर्शन की नई व्यवस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था को ऋतु के अनुसार व्यवस्थित किया जा रहा है। इसी क्रम में मंदिर प्रशासन की ओर से 1 नवंबर से नई समय-सारणी लागू किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके तहत सुबह मंदिर के पट खुलने से लेकर रात में शयन आरती तक की दिनचर्या में बदलाव किया जाएगा।

नई व्यवस्था में मंदिर के पट सुबह 4 बजे खुलेंगे। इसके बाद सुबह 4:30 बजे मंगला आरती होगी। मंगला आरती के बाद रामलला की पूजा-अर्चना की अगली प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। वहीं, सुबह 6:30 बजे श्रृंगार आरती निर्धारित की गई है। इसके बाद सुबह 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होंगे।

इस प्रकार, सुबह जल्दी अयोध्या पहुंचने वाले भक्तों को दर्शन की शुरुआत के समय का ध्यान रखना होगा। विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना नई समय-सारणी के अनुसार बना सकते हैं।

सुबह बालभोग के लिए कुछ देर बंद रहेंगे पट

रामलला की दैनिक पूजा-पद्धति में भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। नई समय-सारणी के अनुसार, सुबह 8 बजे से 8:10 बजे तक बालभोग के लिए मंदिर के पट बंद रहेंगे। इस दौरान भगवान को भोग अर्पित करने की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन फिर से जारी रहने की व्यवस्था रहेगी। हालांकि, दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा और भोग के निर्धारित समय पर मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था में अस्थायी बदलाव हो सकता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान को दिन के अलग-अलग समय पर भोग अर्पित किया जाता है। इसलिए मंदिर की दैनिक दिनचर्या में इन प्रक्रियाओं के लिए समय निर्धारित किया जाता है। रामलला के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन समयों की जानकारी रखना सुविधाजनक रहेगा।

दोपहर में राजभोग और विश्राम के लिए निर्धारित समय

सुबह के दर्शन के बाद दोपहर में भी रामलला की पूजा और भोग की प्रक्रिया निर्धारित समय पर होगी। नई व्यवस्था के अनुसार, सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राजभोग का समय रहेगा। इस दौरान भगवान को राजभोग अर्पित किया जाएगा।

इसके बाद दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक रामलला के विश्राम का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में दर्शन व्यवस्था प्रभावित रहेगी। इसलिए दोपहर के समय मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अपनी योजना इस प्रकार बनानी चाहिए कि उन्हें दर्शन के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

दोपहर की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद 1:35 बजे से दर्शन फिर शुरू होंगे। इससे भक्तों को दिन के दूसरे पहर में भी रामलला के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, अयोध्या में विशेष पर्व, धार्मिक आयोजन या अन्य परिस्थितियों के दौरान व्यवस्था में अतिरिक्त बदलाव संभव हो सकते हैं। इसलिए यात्रा से पहले मंदिर प्रशासन की ओर से जारी ताजा जानकारी प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।

शाम 7 बजे संध्या आरती, रात 9:30 बजे शयन आरती

रामलला की दैनिक पूजा-अर्चना में सुबह की आरती के साथ-साथ शाम की आरती का भी विशेष महत्व है। नई समय-सारणी के अनुसार, शाम 7 बजे संध्या आरती होगी। इस दौरान मंदिर में नियमित धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

इसके बाद रात में शयन आरती का समय निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, रात 9:30 बजे शयन आरती होगी। शयन आरती के बाद रात 10 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।

वर्तमान व्यवस्था में मंदिर के पट रात 10:30 बजे बंद होते हैं। ऐसे में नई समय-सारणी लागू होने के बाद मंदिर बंद होने का समय 30 मिनट पहले हो जाएगा। इसलिए शाम और रात के समय दर्शन करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को विशेष रूप से इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु रखें इन बातों का ध्यान

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन की समय-सारणी में होने वाले बदलाव की जानकारी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है।

श्रद्धालुओं को सुबह दर्शन के लिए पहुंचने से पहले मंगला आरती, श्रृंगार आरती और दर्शन शुरू होने के समय का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, दोपहर में राजभोग और विश्राम की अवधि को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

इसी तरह, शाम को दर्शन करने वाले भक्तों को संध्या आरती और रात में मंदिर बंद होने के समय की जानकारी रखना जरूरी होगा। खासकर वे श्रद्धालु जो परिवार के साथ या दूसरे शहरों से अयोध्या पहुंच रहे हैं, उन्हें समय-सारणी के अनुसार यात्रा का कार्यक्रम बनाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में प्रवेश, सुरक्षा जांच और श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण लगने वाले समय को भी ध्यान में रखना उपयोगी होगा।

ऋतु परिवर्तन के अनुसार बदलेगी मंदिर की दिनचर्या

धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना और दर्शन की दिनचर्या कई बार मौसम तथा ऋतु परिवर्तन के अनुसार निर्धारित की जाती है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी 1 नवंबर से रामलला की पूजा, आरती, भोग और दर्शन के समय में बदलाव की जानकारी दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने से लेकर रात 10 बजे बंद होने तक की दिनचर्या निर्धारित रहेगी। मंगला आरती, श्रृंगार आरती, बालभोग, राजभोग, विश्राम, संध्या आरती और शयन आरती के समय के अनुसार मंदिर में धार्मिक गतिविधियां संचालित होंगी।

कुल मिलाकर, 1 नवंबर से लागू होने वाली नई समय-सारणी रामलला के दर्शन की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अयोध्या यात्रा से पहले मंदिर प्रशासन की आधिकारिक सूचना के अनुसार समय की पुष्टि कर लें, ताकि उन्हें दर्शन के दौरान किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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