लखीमपुर खीरी: चाऊपुर गो आश्रय स्थल में कमजोर मिले गोवंश, डीएम ने एक माह में सुधार का दिया अल्टीमेटम

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी। गोवंश संरक्षण के साथ उनकी सेहत और समुचित देखभाल सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने तहसील सदर के नकहा ब्लॉक स्थित चाऊपुर गो आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गोवंश कमजोर अवस्था में मिले। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक माह के भीतर गोवंश के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वह स्वयं दोबारा निरीक्षण करेंगे और व्यवस्थाओं में हुए सुधार की समीक्षा करेंगे।

जिलाधिकारी ने गो आश्रय स्थल में पशुओं की देखभाल, चारे की उपलब्धता, स्वास्थ्य परीक्षण और प्रबंधन व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा उन्होंने संबंधित अभिलेखों और पंजिकाओं का भी अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सचान सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

चाऊपुर गो आश्रय स्थल में 530 गोवंश संरक्षित

निरीक्षण के दौरान चाऊपुर गो आश्रय स्थल में कुल 530 गोवंश संरक्षित पाए गए। इनमें 297 नर और 233 मादा गोवंश शामिल हैं। जिलाधिकारी ने आश्रय स्थल में उपलब्ध संसाधनों और पशुओं को दिए जा रहे चारे की स्थिति का भी आकलन किया।

प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के समय गो आश्रय स्थल में 131 कुंतल भूसा और 12 कुंतल दाना मौजूद था। इसके साथ ही पशुओं की देखभाल के लिए कर्मचारियों की तैनाती की स्थिति भी देखी गई। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दिन की ड्यूटी के लिए 10 केयरटेकर तथा रात्रि में चार केयरटेकर कार्यरत हैं।

हालांकि, चारे और कर्मचारियों की उपलब्धता के बावजूद कुछ गोवंश का कमजोर मिलना पशुओं को दिए जा रहे पोषण और उनकी नियमित देखभाल की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। इसी वजह से जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार करने और गोवंश के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

कमजोर गोवंश के स्वास्थ्य सुधार पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान कमजोर गोवंश मिलने पर जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोवंश की देखभाल केवल उनकी संख्या दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक पशु को पर्याप्त पोषण और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

इसके लिए पशुओं की नियमित निगरानी, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और उनकी शारीरिक स्थिति के अनुरूप पोषण की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही, कमजोर गोवंश की पहचान कर उनकी विशेष देखभाल सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार हो सके।

गो आश्रय स्थलों में पशुओं की स्थिति बेहतर बनाए रखने के लिए चारे की उपलब्धता के साथ उसके उचित वितरण की भी अहम भूमिका होती है। इसलिए संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी गोवंश को आवश्यकता के अनुसार भोजन मिले और किसी भी पशु की देखभाल में लापरवाही न हो।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को एक माह का समय देते हुए निर्देश दिया कि इस अवधि में स्वास्थ्य सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। इसके बाद वह स्वयं आश्रय स्थल का दोबारा निरीक्षण करेंगे। इस दौरान गोवंश की सेहत, भोजन की व्यवस्था और प्रबंधन में हुए सुधार को परखा जाएगा।

लापरवाही पर कार्रवाई, ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ निर्देश

गो आश्रय स्थल की निगरानी और पर्यवेक्षण में शिथिलता सामने आने पर जिलाधिकारी ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव मेहुल कुमार के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा। वहीं, नकहा की खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) संगीता यादव का वेतन रोकने के निर्देश भी दिए।

इस कार्रवाई के माध्यम से जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गोवंश संरक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे आश्रय स्थलों की नियमित निगरानी करें और वहां संरक्षित पशुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं।

दरअसल, गो आश्रय स्थलों के संचालन में ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों, विकास विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इन विभागों के बीच समन्वय और नियमित निरीक्षण से ही व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित किया जा सकता है। यदि कहीं कमी मिलती है, तो उसे समय रहते दूर करना भी जरूरी है।

एक माह बाद होगा दोबारा निरीक्षण

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि चाऊपुर गो आश्रय स्थल में सुधार के लिए दिए गए निर्देशों की समीक्षा एक माह बाद की जाएगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि कमजोर गोवंश के स्वास्थ्य में कितना सुधार हुआ है और पशुओं के पोषण तथा देखभाल की व्यवस्था कितनी प्रभावी बनी है।

इसके अलावा आश्रय स्थल में उपलब्ध भूसा-दाना, कर्मचारियों की तैनाती और नियमित निगरानी व्यवस्था की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहेगी। निर्धारित समय में अपेक्षित सुधार लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष कुमार सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

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