कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD शून्य, सोयाबीन-पाम तेल पर शुल्क 5%; उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

4

Digital UP News Desk

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरेलू खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रमुख कच्चे खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) में कटौती की है। सरकार के इस फैसले के तहत कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर BCD को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

सरकार के अनुसार, यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में हुई वृद्धि और उसके असर से घरेलू बाजार में बढ़ी लागत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आयात शुल्क खाद्य तेलों की आयातित लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए शुल्क में कमी से आयातित कच्चे खाद्य तेल की लागत कम होने और इसका लाभ घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं तक पहुंचने की उम्मीद है।

सूरजमुखी तेल पर BCD हुआ शून्य

नई शुल्क व्यवस्था में सबसे प्रमुख बदलाव कच्चे सूरजमुखी तेल को लेकर किया गया है। पहले इस पर 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क लागू था, जिसे अब घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसके साथ ही कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर भी शुल्क में 5 प्रतिशत की कमी की गई है।

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता और आयात लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के दौर में आयात शुल्क कम होने से घरेलू बाजार में लागत संबंधी दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

कच्चे और रिफाइंड तेल के बीच शुल्क अंतर बरकरार

हालांकि सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर शुल्क कम किया है, लेकिन घरेलू तेल शोधन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कच्चे और परिष्कृत खाद्य तेलों के बीच 19.25 प्रतिशत का आयात शुल्क अंतर बरकरार रखा गया है।

इसका उद्देश्य घरेलू रिफाइनरियों को प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराना और परिष्कृत खाद्य तेलों के अत्यधिक आयात को हतोत्साहित करना है। सरकार के अनुसार, शुल्क संरचना में यह अंतर बनाए रखने से देश के भीतर खाद्य तेलों के शोधन और मूल्यवर्धन की प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिलेगा।

दरअसल, भारत में खाद्य तेलों की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है। ऐसे में कच्चे तेल के आयात और घरेलू स्तर पर उसके शोधन के बीच संतुलन बनाए रखना नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से सरकार ने कच्चे तेल पर शुल्क घटाने के साथ-साथ परिष्कृत तेल के मुकाबले शुल्क अंतर को बनाए रखा है।

उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए उद्योग को सलाह

आयात शुल्क में कटौती के साथ केंद्र सरकार ने खाद्य तेल संघों और उद्योग से जुड़े हितधारकों को एक सलाह भी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शुल्क में कमी का लाभ केवल आयातकों या उद्योग तक सीमित न रहे, बल्कि इसका फायदा अंतिम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचना चाहिए।

इसके लिए उद्योग से लागत में कमी के अनुरूप प्राइस टू डिस्ट्रीब्यूटर (PTD) और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में तत्काल आवश्यक संशोधन करने का अनुरोध किया गया है। खाद्य तेल संघों से भी कहा गया है कि वे अपने सदस्यों को संबंधित कीमतों में कमी को बिना किसी देरी के लागू करने की सलाह दें।

इस कदम का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयात लागत में कमी का असर खुदरा बाजार में दिखाई दे। हालांकि वास्तविक खुदरा कीमतों में कमी कितनी होगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों, विनिमय दर, परिवहन लागत और अन्य बाजार परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

महंगाई के दबाव को कम करने की कोशिश

खाद्य तेल आम उपभोक्ताओं की दैनिक जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी कीमतों में होने वाला बदलाव घरेलू बजट के साथ-साथ खाद्य मुद्रास्फीति पर भी असर डाल सकता है। सरकार ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार में कीमतों में वृद्धि के कारण घरेलू बाजार में भी लागत और खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ा था।

ऐसे में आयात शुल्क में यह युक्तिकरण उपभोक्ताओं को राहत देने और खाद्य कीमतों पर दबाव कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा, कच्चे खाद्य तेल की लागत घटने से घरेलू शोधन इकाइयों को भी आयातित कच्चे माल की लागत में राहत मिल सकती है।

घरेलू खाद्य तेल उद्योग पर भी ध्यान

सरकार ने शुल्क में कटौती करते समय उपभोक्ताओं के साथ-साथ घरेलू खाद्य तेल उद्योग के हितों को भी ध्यान में रखा है। कच्चे और परिष्कृत तेल के बीच 19.25 प्रतिशत का अंतर बनाए रखने का एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू शोधन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

इससे देश में कच्चे खाद्य तेल को आयात कर घरेलू स्तर पर उसका शोधन करने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। परिणामस्वरूप, खाद्य तेल क्षेत्र में घरेलू मूल्यवर्धन को प्रोत्साहन मिल सकता है और परिष्कृत तेल के आयात पर निर्भरता को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार पर सरकार की नजर

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार और घरेलू कीमतों में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखेगी। यदि परिस्थितियों में आगे कोई महत्वपूर्ण बदलाव आता है, तो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और किसानों तथा घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए संतुलित नीतिगत माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

You may have missed