बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे का अंडरपास बना भैंसों का तालाब, ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित
रिपोर्ट: वीपिन यादव
बदायूं। गंगा एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 161 से जुड़े एक अंडरपास में कई फीट पानी भर जाने से आसपास के दर्जनभर गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है। राहगीरों के लिए बनाए गए इस अंडरपास की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि यहां लोगों के आवागमन के बजाय भैंसें पानी में आराम और स्नान करती नजर आ रही हैं। जलभराव के कारण अंडरपास से होकर निकलना मुश्किल हो गया है और ग्रामीणों को दूसरे रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह अंडरपास आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। रोजाना ग्रामीण इसी मार्ग से खेतों, बाजार और अन्य जरूरी स्थानों तक आते-जाते हैं। लेकिन अंडरपास में पानी भरने के बाद लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिन्हें रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
कई फीट पानी से आवागमन प्रभावित
गंगा एक्सप्रेसवे के नीचे बने इस अंडरपास में पानी जमा होने से सड़क पूरी तरह जलमग्न दिखाई दे रही है। पानी की अधिक मात्रा के कारण राहगीरों के लिए यहां से गुजरना संभव नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरी में वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंडरपास बंद होने के कारण उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। खासकर किसानों के लिए यह समस्या अधिक परेशानी वाली है, क्योंकि उन्हें खेतों से फसल लाने और ले जाने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
किसानों से लेकर स्कूल बसों तक पर असर
अंडरपास में जलभराव का असर केवल पैदल राहगीरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, फसल लेकर आने-जाने वाले किसानों के वाहनों का आवागमन भी प्रभावित हुआ है। इसके अलावा स्कूल बसों और अन्य वाहनों को भी इस रास्ते से निकलने में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ आपातकालीन आवागमन के लिहाज से भी उपयोगी है। अंडरपास में पानी भरा होने के कारण एंबुलेंस जैसे जरूरी वाहनों को भी दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे आपात स्थिति में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।
राहगीरों की जगह भैंसों का ठिकाना बना अंडरपास
अंडरपास में पानी भरने के बाद इसकी तस्वीरें स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जिस स्थान से ग्रामीणों और राहगीरों को आवागमन करना चाहिए, वहां अब भैंसें पानी में उतरती और आराम करती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अंडरपास की यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े इस अंडरपास का उपयोग लोगों के आवागमन के लिए होना चाहिए, लेकिन जलभराव के कारण यह रास्ता फिलहाल उपयोग के लायक नहीं रह गया है।
यूपीडा के अधिकारियों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने अंडरपास में पानी भरने की समस्या को लेकर यूपीडा के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समस्या के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस दिशा में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर अंडरपास की स्थिति का निरीक्षण करें और पानी की निकासी की व्यवस्था कराएं। साथ ही भविष्य में दोबारा जलभराव न हो, इसके लिए स्थायी समाधान किया जाए।
कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा
अंडरपास से रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों को दूसरे मार्गों से होकर जाना पड़ रहा है। इससे उनकी दूरी के साथ-साथ समय भी बढ़ गया है। किसानों के अलावा स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य ग्रामीणों को रोजाना इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अंडरपास से जल्द पानी नहीं निकाला गया तो परेशानी और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग को प्राथमिकता के आधार पर मौके का निरीक्षण कर जलनिकासी की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों का सामान्य आवागमन दोबारा शुरू हो सके।
जिम्मेदार विभाग से समाधान की उम्मीद
गंगा एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 161 से जुड़े इस अंडरपास की स्थिति को लेकर ग्रामीण अब संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि अंडरपास में जमा पानी को हटाकर रास्ते को आवागमन के लिए बहाल किया जाए।
फिलहाल, अंडरपास में कई फीट पानी जमा होने के कारण दर्जनभर गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों के लिए बनाया गया यह रास्ता पानी भरने के कारण भैंसों के लिए तालाब जैसा नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाता है।

