मेरठ में बिजली चोरी पर महाअभियान, 32% तक पहुंचा लाइन लॉस-दीपावली से पहले हाईलॉस फीडरों पर कार्रवाई

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर

मेरठ: पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अंतर्गत मेरठ शहर में बिजली चोरी और बढ़ता लाइन लॉस बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। शहर का औसत लाइन लॉस जहां करीब 15 प्रतिशत बताया जा रहा है, वहीं सदर क्षेत्र के भूसा मंडी फीडर में यह आंकड़ा करीब 32 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ऐसे में विभाग ने दीपावली से पहले हाईलॉस वाले फीडरों पर विशेष अभियान चलाने की तैयारी की है।

विभाग की ओर से चिह्नित संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली चोरी रोकने, संदिग्ध कनेक्शनों की जांच करने और लाइन लॉस कम करने के लिए एंटी-थेफ्ट चेकिंग ड्राइव चलाया जाएगा। इसके साथ ही रात्रि चेकिंग और ड्रोन निगरानी जैसे उपायों को भी अभियान में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य चिह्नित फीडरों के लाइन लॉस में प्रभावी कमी लाना है।

मेरठ साउथ क्षेत्र में सबसे अधिक लाइन लॉस

विभागीय आंकड़ों के अनुसार मेरठ साउथ क्षेत्र लाइन लॉस की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल है। शहर के टॉप-10 हाईलॉस फीडरों में लाइन लॉस करीब 24 से 32 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया है। इनमें कई ऐसे इलाके हैं जहां बिजली चोरी की शिकायतों और अनियमित कनेक्शनों की लगातार जांच की जा रही है।

चिह्नित फीडरों में सदर का भूसा मंडी क्षेत्र करीब 32 प्रतिशत, जाकिर कॉलोनी 30 से 32 प्रतिशत और मकबरा डिग्गी यानी रेलवे रोड फीडर में भी करीब 30 से 32 प्रतिशत लाइन लॉस दर्ज किया गया है। इसके अलावा विकासपुरी फीडर में करीब 30 प्रतिशत लाइन लॉस बताया गया है।

इसी तरह मलियाना के शुगर मिल क्षेत्र और खड़ौली के खटीकपुरा व जवाहरनगर इलाके में करीब 29 प्रतिशत लाइन लॉस है। नई बस्ती और शिवपुरम क्षेत्र में यह करीब 28 प्रतिशत, जबकि रंग महल की गली नंबर 4, 5, 6 और 7 में भी करीब 28 प्रतिशत लाइन लॉस दर्ज किया गया है।

कंकरखेड़ा के डबका फीडर में करीब 27 प्रतिशत और लिसाड़ीगेट की जाली वाली गली में करीब 24 प्रतिशत लाइन लॉस बताया गया है।

सामान्य लाइन लॉस से काफी अधिक आंकड़े

विद्युत वितरण व्यवस्था में तकनीकी कारणों से होने वाला कुछ लाइन लॉस सामान्य माना जाता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार करीब 8 प्रतिशत तक का तकनीकी लाइन लॉस सामान्य वितरण प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, चिह्नित हाईलॉस फीडरों में दर्ज आंकड़े इससे काफी अधिक हैं।

यही वजह है कि विभाग ने ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया है। बिजली चोरी और अन्य कारणों से होने वाले अतिरिक्त लाइन लॉस को कम करने के लिए अब केवल नियमित निरीक्षण के बजाय परिणाम आधारित कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।

दीपावली से पहले चलेगा विशेष अभियान

दीपावली से पहले बिजली की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए विभाग हाईलॉस फीडरों पर अभियान को तेज करने की तैयारी में है। इसके तहत संदिग्ध विद्युत कनेक्शनों की जांच, मीटरों की जांच, रात्रि चेकिंग और जरूरत के अनुसार ड्रोन से निगरानी की जाएगी।

विभाग का उद्देश्य बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके अलावा अभियान के दौरान नियमों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

MD ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

PVVNL के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने बिजली चोरी और लाइन लॉस को लेकर अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने पश्चिमांचल क्षेत्र के सभी 14 जिलों में हाईलॉस और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है।

अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि केवल चेकिंग और निरीक्षण की संख्या को कार्यप्रदर्शन का आधार नहीं बनाया जाएगा। इसके बजाय संबंधित फीडर के लाइन लॉस में वास्तविक कमी को कार्रवाई के परिणाम के तौर पर देखा जाएगा।

दीपावली से पहले चिह्नित रेड जोन फीडरों के लाइन लॉस को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विजिलेंस और विभागीय टीमों को बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

पहले के अभियानों से कुछ क्षेत्रों में सुधार

मेरठ क्षेत्र के चीफ इंजीनियर रजनीकांत मिश्रा के अनुसार, शहर के कई इलाकों में पहले चलाए गए अभियानों के बाद लाइन लॉस में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि ऐसे इलाकों में अब रणनीति के तहत अभियान चलाया जाएगा। विभाग का फोकस उन फीडरों पर रहेगा जहां लाइन लॉस निर्धारित स्तर से काफी अधिक है। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर चेकिंग की योजना तैयार की जा रही है।

बॉडी कैमरे से होगी निगरानी

चेकिंग अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए टीमों को बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। इससे अभियान के दौरान होने वाली कार्रवाई की रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहेगी और विभागीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही हाईलॉस क्षेत्रों की निगरानी को तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। जरूरत के अनुसार ड्रोन निगरानी और रात्रि चेकिंग की मदद ली जाएगी।

कुल मिलाकर, दीपावली से पहले मेरठ के हाईलॉस फीडरों पर बिजली विभाग का विशेष अभियान तेज होने जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चिह्नित क्षेत्रों में लाइन लॉस को कम करने और बिजली चोरी पर नियंत्रण के लिए चलाया जाने वाला अभियान निर्धारित लक्ष्य को किस हद तक हासिल करता है।

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