कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड: शालू समेत तीन आरोपी 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर, सुब्रत से हो सकता है आमना-सामना
Digital UP News Desk
कानपुर: दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में बुधवार को एक अहम कदम सामने आया। पुलिस ने आरोपी बहू शालू मिनोचा, पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया। अदालत से रिमांड मंजूर होने के बाद बुधवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस तीनों आरोपियों को जेल से बाहर लेकर पूछताछ के लिए रवाना हुई। पुलिस का फोकस अब हत्या से जुड़े घटनाक्रम, संपर्कों, चाबी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने पर है।
अलग-अलग वाहनों से पूछताछ के लिए ले गई पुलिस
रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अलग-अलग वाहनों से रवाना किया। आरोपी शालू को प्राइवेट कार में ले जाया गया, जबकि विशाल और राजकिशोर को पुलिस जीप में बैठाया गया। इस दौरान शालू ने अपना चेहरा दुपट्टे से ढक रखा था।
इसके बाद पुलिस टीम सबसे पहले तीनों को कल्याणपुर थाने लेकर पहुंची। वहां करीब आधे घंटे तक पूछताछ की गई। इसके बाद जांच टीम शालू को लेकर जेड स्क्वायर मॉल पहुंची। पुलिस के अनुसार, जांच में यह बिंदु सामने आया है कि शालू ने कथित तौर पर विशाल के साथ वहां खरीदारी की थी। इसलिए पुलिस घटनाक्रम की कड़ियों को मौके से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
जेड स्क्वायर के बाद चाबी की दुकान की पहचान
पुलिस की जांच में फ्लैट की चाबी का मामला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को अभी उस डुप्लीकेट चाबी की तलाश है, जिसका इस्तेमाल घटनाक्रम में हुआ होने की आशंका है। शालू से चाबी बनवाने की जगह की पहचान कराने की भी तैयारी है।
पुलिस के अनुसार, इसके लिए परेड चौराहे पर स्थित चाबी की दुकान की पहचान कराई जा सकती है। इससे जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि चाबी कब, कहां और किस परिस्थिति में तैयार कराई गई थी। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सुब्रत की भूमिका भी जांच के दायरे में
विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में उनके बेटे सुब्रत की भूमिका को लेकर भी पुलिस पड़ताल कर रही है। पुलिस ने इससे पहले सुब्रत और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
पुलिस के मुताबिक, शालू, विशाल और सुब्रत से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल की जांच की गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सुब्रत और विशाल के बीच 300 से अधिक कॉल सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, केवल कॉल रिकॉर्ड अपने आप में किसी व्यक्ति की अपराध में भूमिका साबित नहीं करता। पुलिस इन संपर्कों को अन्य साक्ष्यों और बयानों के साथ मिलाकर जांच रही है।
आमने-सामने पूछताछ की तैयारी
कस्टडी रिमांड का एक प्रमुख उद्देश्य आरोपियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करना बताया जा रहा है। पुलिस शालू, विशाल और राजकिशोर से अलग-अलग पूछताछ करने के साथ जरूरत पड़ने पर उनका आमना-सामना भी करा सकती है।
इसके अलावा सुब्रत को भी पूछताछ के लिए सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए जाने की संभावना जताई गई है। पुलिस यह समझने का प्रयास कर रही है कि हत्याकांड से पहले आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ, घटनाक्रम की योजना कैसे बनी और वारदात के बाद कौन-कौन से कदम उठाए गए।
पांच सितंबर को हुई थी कारोबारी की हत्या
विनीत मिनोचा की हत्या पांच सितंबर की रात कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में हुई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और विशाल गौतम तथा राजकिशोर को गिरफ्तार किया। पूछताछ और जांच के दौरान शालू का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
शुरुआती जांच में पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। साथ ही आरोपियों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया है। अब 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
पुलिस के सामने कई सवाल
रिमांड के दौरान पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि हत्या की कथित योजना कैसे तैयार हुई, आरोपियों के बीच संपर्क कब और किस माध्यम से हुआ, डुप्लीकेट चाबी कहां से बनवाई गई और वारदात से पहले तथा बाद में आरोपी किन-किन स्थानों पर गए।
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच रही है कि मामले में केवल गिरफ्तार आरोपी ही शामिल थे या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी रही। इस संबंध में जांच एजेंसी अलग-अलग बयानों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
रिमांड से जांच को मिल सकती हैं अहम जानकारियां
24 घंटे की कस्टडी रिमांड पुलिस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अवधि में आरोपी उसके सीधे नियंत्रण में रहेंगे और जांच टीम घटनाक्रम से जुड़े स्थानों पर जाकर जरूरी जानकारी जुटा सकेगी। जेड स्क्वायर मॉल और चाबी की दुकान की पहचान इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है।
हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने से पहले किसी आरोपी की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता। फिलहाल सभी पहलुओं की जांच जारी है।
कानपुर के इस चर्चित हत्याकांड में अब पुलिस की नजर रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारियों पर है। शालू, विशाल और राजकिशोर से पूछताछ के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और चाबी से जुड़े तथ्यों का मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही मामले में आगे की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

