सोनभद्र में CUG नंबर पर अधिकारियों के फोन न उठाने का आरोप, किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने उठाए सवाल
रिपोर्टर- ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र। जिले में अधिकारियों की कार्यशैली और आम जनता की शिकायतों के निस्तारण को लेकर किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने सवाल उठाए हैं। मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने आरोप लगाया है कि कई अधिकारी अपने सीयूजी (CUG) नंबर पर आने वाली आम लोगों की फोन कॉल का जवाब नहीं देते। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारियों के सीयूजी नंबर जनता और प्रशासन के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, ऐसे में कॉल का जवाब नहीं मिलने से लोगों को अपनी समस्याएं बताने और उनका समाधान कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संदीप मिश्र ने कहा कि सोनभद्र में किसान, नौजवान और आम नागरिक विभिन्न समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास करते हैं। इसके लिए विभागीय कार्यालयों के साथ-साथ अधिकारियों के सीयूजी नंबर भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हालांकि, उनके आरोप के मुताबिक कई बार फोन करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाता। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
अधिकारियों की उपलब्धता पर उठाए सवाल
मोर्चा संयोजक ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता अपनी समस्याओं और शिकायतों को लेकर अधिकारियों तक पहुंचने का प्रयास करती है। ऐसे में अधिकारियों की उपलब्धता और शिकायतों को सुनने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में लोगों को अपनी समस्या बताने के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ता है। यदि फोन पर संपर्क नहीं हो पाता तो शिकायत लेकर संबंधित कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी हो सकती है।
संदीप मिश्र ने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच बेहतर संवाद से अनेक समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि शिकायतकर्ता अधिकारी से संपर्क ही नहीं कर पाएगा तो समस्या के समाधान की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी टिप्पणी
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक ने कुछ अधिकारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद में कुछ अधिकारी सोशल मीडिया पर रील और अन्य गतिविधियों के जरिए चर्चा में बने रहने में रुचि दिखाते हैं, जबकि जनता से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि, यह आरोप संदीप मिश्र की ओर से लगाया गया है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया गतिविधियों और जनसमस्याओं के बीच किसी संबंध को लेकर स्वतंत्र रूप से कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
संदीप मिश्र ने अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों दोनों की जिम्मेदारी जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है।
उनका आरोप है कि कई जनप्रतिनिधि जनता की स्थानीय समस्याओं के बजाय दलगत राजनीति तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा और संदीप मिश्र इससे पहले भी सोनभद्र में स्थानीय जनसमस्याओं और विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते रहे हैं। हाल के दिनों में संगठन की ओर से पर्यावरण संरक्षण, जल-जंगल-जमीन और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
संदीप मिश्र ने कहा कि यदि अधिकारियों ने सीयूजी नंबरों पर आने वाली जनता की कॉल का जवाब देने और शिकायतों को गंभीरता से सुनने की व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
उन्होंने कहा कि जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों तक आसानी से पहुंच मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसुनवाई महत्वपूर्ण है। इसलिए अधिकारियों को आम लोगों की शिकायतों के प्रति संवेदनशील रहते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
संदीप मिश्र ने कहा कि मोर्चा जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। यदि सीयूजी नंबरों पर संपर्क की समस्या बनी रहती है तो संगठन इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी करेगा।
प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संदीप मिश्र द्वारा लगाए गए आरोपों पर जिला प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अधिकारियों की ओर से पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासनिक व्यवस्था में सीयूजी नंबरों का उद्देश्य अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच संपर्क को आसान बनाना है। इसलिए यदि किसी अधिकारी से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो संबंधित विभाग की शिकायत प्रणाली, जनसुनवाई या निर्धारित आधिकारिक माध्यमों का उपयोग भी किया जा सकता है।
फिलहाल किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने इस मुद्दे को जनता से जुड़ा बताते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आने का इंतजार है।

