लखीमपुर में 19 वर्षों की परंपरा के साथ गणपति बप्पा की भव्य विदाई, ढोल-ताशों और गुलाल से गूंजा शहर

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रिपोर्टर- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी। शहर के सुभाष पार्क में पिछले 19 वर्षों से चली आ रही गणेश महोत्सव की परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुई। 14 सितंबर से सुभाष पार्क में विराजमान गणपति बप्पा की मंगलवार, 22 सितंबर को विधि-विधान और भक्तिमय माहौल के बीच भव्य विदाई की गई। इस दौरान निकली विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। ढोल-ताशों की गूंज, ध्वज पथक, रंग-गुलाल और आतिशबाजी ने पूरे शहर को गणपति भक्ति के रंग में रंग दिया।

श्री गणेश महोत्सव सेवा समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में शुरुआत से ही उत्साह बना हुआ था। 14 सितंबर को विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की स्थापना के बाद प्रतिदिन पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं, महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को गणपति बप्पा की विदाई के लिए विशेष तैयारियां की गईं।

भव्य रथ पर सवार होकर निकले गणपति बप्पा

गणपति विसर्जन यात्रा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सजाए गए भव्य रथ पर विराजमान किया गया। इसके बाद सुभाष पार्क से यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। इस दौरान श्रद्धालु गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।

विसर्जन यात्रा सुभाष पार्क से निकलकर श्रीराम चौराहा, हमदर्द चौराहा, मिश्राना चौराहा और मेला मैदान रोड होते हुए शारदानगर की ओर रवाना हुई। यात्रा के दौरान रास्ते में श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। जगह-जगह लोगों ने यात्रा का स्वागत भी किया।

इसके साथ ही पूरे मार्ग पर धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और गणपति के जयकारों के बीच एक-दूसरे को गुलाल लगाया। इस दौरान युवाओं के साथ महिलाएं और बच्चे भी उत्साहपूर्वक यात्रा में शामिल हुए।

ढोल-ताशों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

गणपति विसर्जन यात्रा की सबसे खास बात महाराष्ट्र और उज्जैन से आई ढोल-ताशा टीमों की प्रस्तुतियां रहीं। भिंड, महाराष्ट्र की जिजाऊ धर्म योद्धा सेवाभावी संस्था और उज्जैन महाकालेश्वर की ढोल-ताशा टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।

ढोल और ताशों की ताल पर कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। वहीं, ध्वज पथक की प्रस्तुति ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। ढोल-ताशों की गूंज और गणपति बप्पा के जयकारों से शहर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।

इसके अलावा, रंग-गुलाल और आतिशबाजी ने भी विसर्जन यात्रा की भव्यता को बढ़ाया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी। हालांकि, उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का पालन करते हुए कार्यक्रम में भाग लिया।

19 वर्षों से जारी है गणेश महोत्सव

श्री गणेश महोत्सव सेवा समिति द्वारा लगातार 19 वर्षों से गणेश महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, हर वर्ष इस आयोजन को श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है। समय के साथ महोत्सव से जुड़ने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

समिति का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ लोगों को एकजुट करना और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना भी है। इसी क्रम में इस वर्ष भी गणेश स्थापना से लेकर विदाई तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

गणपति बप्पा की विदाई के अवसर पर समिति के मुख्य पदाधिकारी सियाराम, सुंदर ज्वैलर्स ने कहा कि गणपति बप्पा से उनकी कामना है कि वे अगले बरस जल्दी आएं और सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि लेकर आएं। उन्होंने सभी लोगों के मंगल और खुशहाली की कामना की।

अगले वर्ष फिर आगमन की कामना

गणपति उत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के बीच जहां विदाई का भाव था, वहीं अगले वर्ष गणपति बप्पा के पुनः आगमन की उम्मीद भी दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

इसके साथ ही गणपति बप्पा से सभी के जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से भगवान गणेश को विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने का आह्वान किया।

इस प्रकार, सुभाष पार्क से शुरू हुई गणपति बप्पा की भव्य विदाई यात्रा ने लखीमपुर खीरी में 19 वर्षों से चली आ रही गणेश महोत्सव की परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया। ढोल-ताशों की गूंज, ध्वज पथक, गुलाल और भक्तों के जयकारों के बीच संपन्न हुई यह यात्रा शहर के लिए यादगार बन गई।

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